गंगा दशहरा 2026: प्रयागराज त्रिवेणी संगम और हरिद्वार में लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
सारांश
मुख्य बातें
गंगा दशहरा के पावन पर्व पर 25 मई को प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़े और गंगा, यमुना तथा सरस्वती के पवित्र संगम में डुबकी लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की। इसी के साथ हरिद्वार के हर की पौड़ी और आसपास के घाटों पर भी हजारों भक्तों ने भोर से ही स्नान, पूजा और दान-पुण्य किया।
संगम तट पर आस्था का सैलाब
प्रयागराज में सूर्योदय से पहले ही श्रद्धालुओं की कतारें संगम तट पर लग गईं। भक्तों ने तीनों नदियों के संगम पर प्रार्थना अर्पित की, दान किया और मां गंगा से परिवार की खुशहाली माँगी। संगम पर स्नान के लिए पहुँची एक महिला श्रद्धालु ने कहा, 'आज गंगा दशहरा का पावन पर्व है — इसकी काफी मान्यता है। प्रयागराज में रहकर संगम स्नान से वंचित रह जाना बड़ी विडंबना होगी।' उन्होंने बताया कि वे अपने परिवार की सुख-समृद्धि और शांति के लिए यहाँ स्नान, ध्यान और पूजा करने आई हैं।
हरिद्वार में दिव्य और भव्य उत्सव
देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार में भी गंगा दशहरा का उत्सव अत्यंत श्रद्धाभाव से मनाया गया। हर की पौड़ी सहित समस्त घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया, मां गंगा की पूजा-अर्चना की और दान-पुण्य में भाग लिया। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है।
सुरक्षा व्यवस्था: 11 जोन, 27 सेक्टर
हरिद्वार में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतज़ाम किए गए। एसपी सिटी अभय सिंह ने बताया कि मेला क्षेत्र को 11 जोन और 27 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। पुलिस टीमें, डॉग स्क्वाड, नदी पुलिस, घुड़सवार पुलिस और अग्निशमन दल को विभिन्न स्थानों पर तैनात किया गया। उन्होंने कहा, 'डीएम और एसएसपी की ओर से योजना बनाकर उसका क्रियान्वयन किया गया है — श्रद्धालु यहाँ से अच्छा अनुभव लेकर जाएँ।'
गंगा दशहरा का धार्मिक महत्व
गंगा दशहरा हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं और इस तिथि पर किया गया स्नान, दान व पूजन दस प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाता है। गौरतलब है कि प्रयागराज और हरिद्वार दोनों ही गंगा दशहरा के प्रमुख तीर्थ स्थल माने जाते हैं, जहाँ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु एकत्रित होते हैं।
आगे की स्थिति
स्नान का क्रम दिनभर जारी रहा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान कर अपने गंतव्य के लिए रवाना होते रहे। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और यातायात नियंत्रण के लिए अतिरिक्त बल तैनात रखा।