राजस्थान में दो साल में 8.4 लाख छात्र स्कूल छोड़ गए, गहलोत ने BJP सरकार पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 9 जुलाई 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिछले दो शैक्षणिक सत्रों में राजस्थान के सरकारी और निजी स्कूलों में कुल नामांकन 8.4 लाख से अधिक घट गया है। उन्होंने यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) के आँकड़ों का हवाला देते हुए इसे सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर जनता के घटते भरोसे का प्रमाण बताया।
UDISE+ आँकड़े क्या कहते हैं
UDISE+ रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में कुल स्कूल नामांकन 2023-24 में 1.67 करोड़ था, जो 2024-25 में घटकर 1.63 करोड़ और 2025-26 में 1.59 करोड़ रह गया। यानी दो वर्षों में कुल मिलाकर 8.4 लाख से अधिक छात्र स्कूली शिक्षा से बाहर हो गए। गहलोत ने दावा किया कि राज्य के इतिहास में पहली बार निजी स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या सरकारी स्कूलों से अधिक हो गई है।
गहलोत के प्रमुख आरोप
गहलोत ने कहा, "यह बहुत चिंता की बात है कि भाजपा सरकार के दौरान सिर्फ दो सालों में राजस्थान में 8.4 लाख से ज़्यादा छात्रों ने स्कूल छोड़ दिया। इतिहास में पहली बार, प्राइवेट स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या सरकारी स्कूलों से ज़्यादा हो गई है। यह राज्य के सरकारी स्कूलों की गिरती साख का सीधा सबूत है।"
उन्होंने एक और विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया — इसी अवधि में राज्य में शिक्षकों की संख्या 7.8 लाख से बढ़कर 7.9 लाख से अधिक हो गई, फिर भी सरकारी स्कूलों में 9.3 लाख से ज़्यादा छात्र कम हो गए। गहलोत के अनुसार, यह कुप्रबंधन की सीधी निशानी है।
गिरावट की वजहें
गहलोत ने गिरावट के लिए कई कारण गिनाए — शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाना, स्कूलों के बुनियादी ढाँचे का जर्जर होना, मरम्मत और रखरखाव में देरी, तथा पाठ्यक्रम का राजनीतिकरण। उन्होंने कहा, "जब शिक्षा मंत्री का ध्यान शिक्षा के अलावा हर चीज़ पर हो, तो ऐसी स्थिति का होना तय था।" उन्होंने आरोप लगाया कि BJP सरकार ने कांग्रेस कार्यकाल में बनाए गए इंग्लिश-मीडियम स्कूल मॉडल सहित कई सुधारों को कमज़ोर कर दिया।
सरकार की प्रतिक्रिया
इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक राजस्थान सरकार ने गहलोत के आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था। गहलोत ने मुख्यमंत्री से सीधे सवाल किया कि राजस्थान के बच्चों के भविष्य के लिए कौन जिम्मेदार है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी स्कूलों में नामांकन और शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि UDISE+ डेटा केंद्र सरकार का आधिकारिक शैक्षिक आँकड़ा स्रोत है, जिसे राज्यों की शिक्षा नीति की समीक्षा के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। विपक्ष की इस आक्रामक मुहिम के बाद राज्य सरकार पर जवाब देने का दबाव बढ़ने की संभावना है।