मध्य प्रदेश PWD में गुणवत्ता गड़बड़ी: बुरहानपुर समेत 7 जिलों में जाँच, 4 अफसरों को नोटिस, ठेकेदार का पंजीयन निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा प्रदेशभर में कराए जा रहे निर्माण कार्यों के औचक निरीक्षण में गंभीर गुणवत्ता संबंधी खामियाँ सामने आई हैं। 9 जुलाई 2026 को आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई के तहत चार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और बुरहानपुर जिले में कार्यरत ठेकेदार एजेंसी मेसर्स कालिका फर्नीचर इंडस्ट्रीज, खंडवा का पंजीयन निलंबित करने के निर्देश दिए गए हैं।
औचक निरीक्षण का दायरा और प्रक्रिया
विभाग के मुख्य अभियंताओं के सात दलों ने रायसेन, पांढुर्णा, शिवपुरी, बुरहानपुर, उमरिया, मंदसौर एवं निवाड़ी जिलों में निर्माणाधीन और पूर्ण हो चुके कार्यों का अचानक निरीक्षण किया। रेंडम आधार पर कुल 34 निर्माण कार्यों की जाँच की गई, जिनमें लोक निर्माण विभाग (सड़क एवं पुल) के 21, PIU के 6, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) के 6 तथा मध्यप्रदेश भवन विकास निगम (BDC) का 1 कार्य शामिल था।
निरीक्षण प्रतिवेदनों की विस्तृत समीक्षा प्रमुख अभियंता (सड़क व पुल) आर.एल. वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में की गई। बैठक में प्रमुख अभियंता (MPRDC) के.पी.एस. राणा, प्रमुख अभियंता (भवन) एस.आर. बघेल और प्रमुख अभियंता (BDC) अजय श्रीवास्तव सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं सभी निरीक्षण दल ऑनलाइन उपस्थित रहे।
बुरहानपुर में दो बड़ी खामियाँ उजागर
समीक्षा में सर्वाधिक गंभीर स्थिति बुरहानपुर जिले में पाई गई। सुंदर नगर-कुंदन डेयरी रोड पर पंडारोल नाला पर निर्माणाधीन उच्च स्तरीय पुल में गुणवत्ता की कमियाँ मिलने पर संबंधित अनुविभागीय अधिकारी एवं तत्कालीन कार्यपालन यंत्री को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।
इसी जिले में हिवरा फाटा-हैदरपुर फाटा सड़क के निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी अपेक्षित मानकों पर खरी नहीं उतरी। इस मामले में संबंधित अनुविभागीय अधिकारी एवं उपयंत्री को नोटिस जारी करने के साथ ही प्रमुख अभियंता इंदौर को ठेकेदार एजेंसी मेसर्स कालिका फर्नीचर इंडस्ट्रीज, खंडवा का पंजीयन निलंबित करने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
विभागीय जवाबदेही का संदेश
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सरकार सार्वजनिक निर्माण कार्यों में गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर सख्त रुख अपना रही है। गौरतलब है कि औचक निरीक्षण की यह व्यवस्था विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में नियमित रूप से लागू की जा रही है, ताकि ठेकेदारों और अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जा सके। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई तब तक प्रभावी नहीं होगी जब तक दोषी अधिकारियों के विरुद्ध केवल नोटिस से आगे बढ़कर ठोस दंडात्मक कदम न उठाए जाएँ।
आगे क्या होगा
नोटिस प्राप्त चारों अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में अपना जवाब प्रस्तुत करना होगा। मेसर्स कालिका फर्नीचर इंडस्ट्रीज का पंजीयन निलंबन लागू होने के बाद वह एजेंसी नए सरकारी कार्यों के लिए अर्हता नहीं रखेगी। विभाग के अनुसार, प्रदेशभर में इस तरह के औचक निरीक्षण आगे भी जारी रहेंगे।