9 जुलाई 2026
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इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा बूस्ट: सरकार ने स्मार्टफोन, लिथियम-आयन बैटरी पुर्जों पर कस्टम ड्यूटी घटाई

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इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बड़ा बूस्ट: सरकार ने स्मार्टफोन, लिथियम-आयन बैटरी पुर्जों पर कस्टम ड्यूटी घटाई

सारांश

केंद्र सरकार ने स्मार्टफोन, वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल और लिथियम-आयन बैटरी उत्पादन से जुड़े दर्जनों कंपोनेंट्स व मशीनों पर कस्टम ड्यूटी घटा दी है। सीबीआईसी की तीन अधिसूचनाओं के ज़रिए यह राहत 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी — भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने की दिशा में एक ठोस नीतिगत कदम।

मुख्य बातें

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने 9 जुलाई 2026 को तीन अधिसूचनाएँ जारी कर इलेक्ट्रॉनिक्स पुर्जों और मशीनरी पर कस्टम ड्यूटी में राहत दी।
ऑटोमोबाइल, मेडिकल और औद्योगिक डिस्प्ले असेंबली के 5 प्रमुख कंपोनेंट्स को 31 मार्च 2029 तक मूल सीमा शुल्क से पूर्ण छूट।
वायरलेस चार्जिंग इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल के 6 कंपोनेंट्स पर शून्य कस्टम ड्यूटी 31 मार्च 2029 तक जारी।
लिथियम-आयन सेल निर्माण के लिए 85 प्रकार के कैपिटल गुड्स पर रियायती शुल्क की विस्तृत नई सूची जारी।
मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, टीवी पैनल और इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले की असेंबली इस छूट के दायरे से बाहर ।

केंद्र सरकार ने 9 जुलाई 2026 को घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से स्मार्टफोन, लिथियम-आयन बैटरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कंपोनेंट्स तथा पूंजीगत मशीनों (कैपिटल गुड्स) के आयात पर कस्टम ड्यूटी में व्यापक राहत देने का फैसला किया। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने इस संबंध में तीन अलग-अलग अधिसूचनाएँ जारी की हैं, जो 31 मार्च 2029 तक प्रभावी रहेंगी।

डिस्प्ले असेंबली कंपोनेंट्स पर शून्य शुल्क

पहली अधिसूचना के तहत ऑटोमोबाइल, मेडिकल और औद्योगिक उपयोग के लिए डिस्प्ले असेंबली बनाने में काम आने वाले पाँच प्रमुख कंपोनेंट्स को 31 मार्च 2029 तक मूल सीमा शुल्क (बेसिक कस्टम ड्यूटी) से पूरी तरह छूट दी गई है। इनमें डिस्प्ले सेल, फ्लेक्सिबल प्रिंटेड सर्किट असेंबली (एफपीसीए), बैकलाइट यूनिट, फ्रेम और एनिसोट्रॉपिक कंडक्टिव फिल्म (एसीएफ) शामिल हैं।

हालाँकि, यह छूट मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, स्मार्ट मीटर, टीवी पैनल और इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले में इस्तेमाल होने वाली डिस्प्ले असेंबली पर लागू नहीं होगी — यह एक महत्वपूर्ण अपवाद है जो स्पष्ट करता है कि राहत का लक्ष्य विशिष्ट औद्योगिक उपयोग है।

वायरलेस चार्जिंग मॉड्यूल के लिए शून्य ड्यूटी

दूसरी अधिसूचना के जरिए सेलुलर मोबाइल फोन में वायरलेस चार्जिंग के लिए उपयोग होने वाले इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल के निर्माण में काम आने वाले छह कंपोनेंट्स पर भी 31 मार्च 2029 तक शून्य कस्टम ड्यूटी बरकरार रखी गई है। इनमें नैनो-क्रिस्टलाइन असेंबली, ई-शील्ड, पीईटी लाइनर, पीसी शिम, स्ट्रैंडेड और एनएफसी कॉइल तथा नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (एनडीएफईबी) मैग्नेट शामिल हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में वायरलेस चार्जिंग तकनीक से लैस स्मार्टफोन की माँग तेज़ी से बढ़ रही है और घरेलू विनिर्माताओं पर आयात लागत का दबाव बना हुआ था।

लिथियम-आयन बैटरी मशीनरी के लिए विस्तृत सूची

तीसरी और सबसे व्यापक अधिसूचना के तहत लिथियम-आयन सेल निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी की मौजूदा सूची को बदलकर 85 प्रकार के कैपिटल गुड्स की एक विस्तृत सूची जारी की गई है, जिन पर रियायती कस्टम ड्यूटी का लाभ मिलेगा।

इस नई सूची में कोटिंग मशीन, वाइंडिंग मशीन, वेल्डिंग सिस्टम, टेस्टिंग उपकरण, फॉर्मेशन मशीन, ड्राइंग सिस्टम और लिथियम-आयन सेल उत्पादन प्रक्रिया में उपयोग होने वाली अन्य विशेष मशीनें शामिल हैं। गौरतलब है कि यह कदम इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्षेत्र के लिए भी अहम है, क्योंकि बैटरी लागत ईवी की कुल कीमत का बड़ा हिस्सा होती है।

सरकार की मंशा और व्यापक असर

सरकार का मानना है कि इन रियायतों से उत्पादन लागत घटेगी, प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में घरेलू मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) को बल मिलेगा। यह कदम भारत को उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स एवं बैटरी मैन्युफैक्चरिंग के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।

आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इन रियायतों का लाभ घरेलू उत्पादकों तक कितनी तेज़ी से पहुँचता है और क्या यह कदम भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात क्षमता को नई ऊँचाई दे पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह घरेलू मूल्य संवर्धन को वास्तव में बढ़ाएगी या सिर्फ आयात को सस्ता करेगी। मोबाइल फोन और टीवी पैनल को छूट के दायरे से बाहर रखना एक चतुर नीतिगत चाल है जो 'असेंबली हब' से 'मैन्युफैक्चरिंग हब' की ओर धकेलती है — लेकिन 85 कैपिटल गुड्स की सूची तब तक कागज़ी रहेगी जब तक देश में कुशल तकनीशियनों और गुणवत्ता अवसंरचना की कमी दूर नहीं होती। आलोचकों का कहना है कि बिना घरेलू कंपोनेंट इकोसिस्टम विकसित किए केवल आयात सस्ता करना दीर्घकाल में चीन पर निर्भरता कम नहीं करेगा।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग पर कस्टम ड्यूटी क्यों घटाई?
केंद्र सरकार का उद्देश्य स्मार्टफोन, लिथियम-आयन बैटरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की उत्पादन लागत घटाना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। सीबीआईसी ने 9 जुलाई 2026 को तीन अधिसूचनाएँ जारी कर यह राहत 31 मार्च 2029 तक के लिए दी है।
डिस्प्ले असेंबली पर कस्टम ड्यूटी छूट किन उत्पादों पर लागू होगी?
यह छूट ऑटोमोबाइल, मेडिकल और औद्योगिक उपयोग की डिस्प्ले असेंबली के पाँच कंपोनेंट्स — डिस्प्ले सेल, एफपीसीए, बैकलाइट यूनिट, फ्रेम और एसीएफ — पर लागू होगी। मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, टीवी पैनल और इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले इस छूट के दायरे से बाहर हैं।
लिथियम-आयन बैटरी निर्माताओं को इस फैसले से क्या फायदा होगा?
लिथियम-आयन सेल बनाने में इस्तेमाल होने वाले 85 प्रकार के कैपिटल गुड्स — जैसे कोटिंग मशीन, वाइंडिंग मशीन, वेल्डिंग सिस्टम और टेस्टिंग उपकरण — पर रियायती कस्टम ड्यूटी मिलेगी। इससे बैटरी उत्पादन की लागत घटेगी और इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र को भी सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
वायरलेस चार्जिंग कंपोनेंट्स पर शून्य ड्यूटी कब तक लागू रहेगी?
सेलुलर मोबाइल फोन के इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल निर्माण में उपयोग होने वाले छह कंपोनेंट्स पर शून्य कस्टम ड्यूटी 31 मार्च 2029 तक जारी रहेगी। इनमें नैनो-क्रिस्टलाइन असेंबली, ई-शील्ड, पीईटी लाइनर, पीसी शिम, एनएफसी कॉइल और एनडीएफईबी मैग्नेट शामिल हैं।
क्या यह छूट स्थायी है या अस्थायी?
ये सभी कस्टम ड्यूटी छूट और रियायतें 31 मार्च 2029 तक के लिए अस्थायी हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि के बाद इनकी समीक्षा की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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