क्या सीबीआईसी ने डाक द्वारा भेजे जाने वाले माल पर इंसेंटिव बढ़ा दिया है?
सारांश
Key Takeaways
- डाक निर्यात पर इंसेंटिव बढ़ा
- ई-कॉमर्स और एमएसएमई को लाभ
- डिजिटल प्रक्रिया से सरलता
- वैश्विक व्यापार में मजबूती
- छोटे कारोबारियों के लिए अवसर
नई दिल्ली, १६ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के ई-कॉमर्स और छोटे व्यवसायियों के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने डाक के माध्यम से भेजे जाने वाले माल पर एक्सपोर्ट इंसेंटिव का दायरा बढ़ा दिया है। अब इलेक्ट्रॉनिक तरीके से डाक के जरिए किए गए निर्यात पर भी ड्यूटी ड्रॉबैक, आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल जैसी योजनाओं का लाभ मिलेगा।
सरकार के इस निर्णय से विशेष रूप से एमएसएमई, छोटे व्यवसायी और छोटे शहरों व दूरदराज के क्षेत्रों से निर्यात करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। डाक के जरिए कम मात्रा में सामान भेजने वाले निर्यातक अब बड़े निर्यातकों के मुकाबले अधिक बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे। इससे उनकी लागत कम होगी और विदेशी बाजारों तक पहुंच आसान होगी।
इन सुविधाओं को लागू करने के लिए सीबीआईसी ने डाक निर्यात (इलेक्ट्रॉनिक घोषणा और प्रसंस्करण) विनियम, २०२२ में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत डाक के रास्ते निर्यात किए गए माल पर अब आसानी से शुल्क वापसी और अन्य प्रोत्साहन मिल सकेंगे। इस संबंध में १५ जनवरी २०२६ को अधिसूचना जारी की गई है, जिसमें नई प्रक्रिया और नियमों की जानकारी दी गई है।
पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने ई-कॉमर्स निर्यात को मजबूत करने के लिए कई डिजिटल और नीतिगत सुधार किए हैं। विदेश व्यापार नीति २०२३ में पहली बार डिजिटल व्यापार और सीमा पार ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए अलग अध्याय जोड़ा गया है। इसमें डाक, कोरियर और ई-कॉमर्स के जरिए निर्यात को आसान बनाने पर जोर दिया गया है।
फिलहाल देश में सीमा शुल्क अधिनियम, १९६२ के तहत २८ विदेशी डाकघर अधिसूचित हैं। डाक निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल बना दिया गया है, ताकि निर्यातकों को कम कागजी काम करना पड़े। इसके अलावा, सितंबर २०२४ से डाक निर्यात पर आईजीएसटी रिफंड की प्रक्रिया भी स्वचालित कर दी गई है, जिससे रिफंड जल्दी मिल रहा है।
ई-कॉमर्स निर्यात को और सरल बनाने के लिए सीबीआईसी और डाक विभाग ने मिलकर 'हब एंड स्पोक' मॉडल शुरू किया है। इसके तहत देशभर में १,००० से ज्यादा डाक निर्यात केंद्र बनाए गए हैं, जहां से निर्यात पार्सल की बुकिंग और प्रोसेसिंग होती है। इससे छोटे कारोबारियों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल रही है।
डाक के जरिए निर्यात पर इंसेंटिव बढ़ाने का यह निर्णय निर्यात को सरल, सस्ता और अधिक समावेशी बनाने की दिशा में सरकार का एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ भारत के ई-कॉमर्स निर्यात को नई गति मिलेगी, बल्कि तेजी से बदलते वैश्विक व्यापार में देश की स्थिति भी और मजबूत होगी।