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पेट्रोकेमिकल आयात पर कस्टम ड्यूटी छूट 15 जुलाई 2026 तक बढ़ाई, प्लास्टिक-फार्मा सेक्टर को राहत

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पेट्रोकेमिकल आयात पर कस्टम ड्यूटी छूट 15 जुलाई 2026 तक बढ़ाई, प्लास्टिक-फार्मा सेक्टर को राहत

सारांश

पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण बाधित आपूर्ति शृंखला को संभालने के लिए शुरू की गई पेट्रोकेमिकल कस्टम ड्यूटी छूट को केंद्र ने 15 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया है। प्लास्टिक, फार्मा और ऑटो समेत कई सेक्टरों को इनपुट लागत में राहत मिलती रहेगी।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 30 जून 2026 को पेट्रोकेमिकल आयात पर कस्टम ड्यूटी छूट 15 जुलाई 2026 तक बढ़ाई।
यह छूट मूलतः पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला बाधित होने पर शुरू की गई थी।
उत्पादों की सूची पहले से अधिसूचित सूची के अनुसार ही रहेगी; कोई नया उत्पाद नहीं जोड़ा गया।
प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स और ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स सेक्टर को राहत मिलती रहेगी।
वित्त मंत्रालय के अनुसार स्थिति सामान्य हो रही है, लेकिन सुचारू बदलाव के लिए विस्तार ज़रूरी था।

केंद्र सरकार ने 30 जून 2026 को महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात पर लागू कस्टम ड्यूटी छूट को 15 दिन और बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे यह राहत अब 15 जुलाई 2026 तक प्रभावी रहेगी। यह छूट पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं के मद्देनज़र एक अस्थायी उपाय के रूप में शुरू की गई थी और मंगलवार को समाप्त होने वाली थी।

छूट की पृष्ठभूमि

पश्चिम एशिया में चल रहे टकराव के कारण वैश्विक पेट्रोकेमिकल आपूर्ति शृंखला बाधित हुई, जिससे भारत में महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित हुई। इसी दौरान भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों को एलपीजी उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए थे, जिससे घरेलू पेट्रोकेमिकल उत्पादन पर दबाव बढ़ा। इन परिस्थितियों में घरेलू बाज़ार में पेट्रोकेमिकल्स की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने के लिए कस्टम ड्यूटी में यह छूट दी गई थी।

विस्तार का कारण

वित्त मंत्रालय के अनुसार, स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन आयातित पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और इंटरमीडिएट्स पर निर्भर उद्योगों के लिए सुचारू और बिना किसी रुकावट के बदलाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छूट की अवधि बढ़ाई गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इसमें शामिल उत्पादों की सूची पहले से अधिसूचित सूची के अनुरूप ही रहेगी।

किन सेक्टरों को होगा फायदा

इस विस्तार से प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स और ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स सहित पेट्रोकेमिकल इनपुट पर निर्भर विनिर्माण क्षेत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला को लाभ मिलने की उम्मीद है। इस कदम से निर्माताओं की इनपुट लागत स्थिर रहेगी और उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर तैयार उत्पादों की उपलब्धता बनी रहेगी।

सरकार का रुख

सरकार ने कहा है कि वह भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को समर्थन देने और ज़रूरी कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक जिंस बाज़ारों में अस्थिरता बनी हुई है और घरेलू उद्योग आपूर्ति पक्ष के दबावों से जूझ रहे हैं। 15 जुलाई 2026 के बाद की स्थिति पर सरकार का अगला कदम उद्योग जगत की नज़र में रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो एक और विस्तार उद्योग को दीर्घकालिक नीतिगत अनिश्चितता में डाल सकता है। घरेलू पेट्रोकेमिकल उत्पादकों के लिए यह राहत दोधारी तलवार है — आयात सस्ता रहने से उनकी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कमज़ोर होती है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट्रोकेमिकल आयात पर कस्टम ड्यूटी छूट क्यों बढ़ाई गई है?
वित्त मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति शृंखला बाधित होने से घरेलू पेट्रोकेमिकल उपलब्धता प्रभावित हुई थी, इसलिए यह छूट शुरू की गई थी। स्थिति सामान्य हो रही है, लेकिन आयातित फीडस्टॉक पर निर्भर उद्योगों के लिए सुचारू बदलाव सुनिश्चित करने हेतु इसे 15 जुलाई 2026 तक बढ़ाया गया है।
यह छूट कब तक लागू रहेगी?
केंद्र सरकार ने इस छूट को 15 जुलाई 2026 तक 15 दिनों के लिए बढ़ाया है। इससे पहले यह 30 जून 2026 को समाप्त होने वाली थी।
किन उत्पादों पर यह कस्टम ड्यूटी छूट लागू है?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि छूट उन्हीं पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर लागू रहेगी जो पहले से अधिसूचित सूची में शामिल हैं। इसमें कोई नया उत्पाद नहीं जोड़ा गया है।
इस छूट से किन सेक्टरों को फायदा होगा?
प्लास्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स और ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स सहित पेट्रोकेमिकल इनपुट पर निर्भर व्यापक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों को इस विस्तार से राहत मिलेगी। इससे निर्माताओं की इनपुट लागत स्थिर रहेगी और उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी कीमतें मिलती रहेंगी।
एलपीजी उत्पादन और पेट्रोकेमिकल छूट का क्या संबंध है?
संघर्ष के दौरान भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों को एलपीजी उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए थे, जिससे घरेलू पेट्रोकेमिकल उत्पादन में कमी आई। इस कमी की भरपाई के लिए आयात पर कस्टम ड्यूटी छूट दी गई ताकि घरेलू बाज़ार में पेट्रोकेमिकल्स की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे।
राष्ट्र प्रेस
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