1 जून से पेट्रोल ₹1.5, डीजल ₹13.5 और एटीएफ ₹9.5 प्रति लीटर निर्यात शुल्क, घरेलू दरें अपरिवर्तित
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 1 जून 2026 से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर निर्यात शुल्क में संशोधन किया है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल पर निर्यात शुल्क ₹1.5 प्रति लीटर, डीजल पर ₹13.5 प्रति लीटर और एटीएफ पर ₹9.5 प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। घरेलू बाज़ार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
नई दरें कैसे तय हुईं
अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि नई दरें कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की अंतरराष्ट्रीय औसत कीमतों के आधार पर तय की गई हैं, जो पिछली समीक्षा के बाद की अवधि में प्रचलित थीं। यह समीक्षा पाक्षिक आधार पर होती है, जिससे वैश्विक तेल बाज़ार के उतार-चढ़ाव के अनुरूप शुल्क दरें समायोजित की जा सकें।
निर्यात शुल्क की पृष्ठभूमि
यह व्यवस्था मूलतः 27 मार्च 2026 को लागू की गई थी, जब पश्चिम एशिया संकट के बीच घरेलू बाज़ार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और निर्यात को नियंत्रित करने की ज़रूरत महसूस की गई। इससे पहले अंतिम संशोधन 16 मई 2026 से प्रभावी हुआ था, जिसमें पेट्रोल पर ₹3 प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) लगाया गया था और डीजल पर शुल्क ₹16.5 प्रति लीटर निर्धारित किया गया था।
डीजल और एटीएफ शुल्क में उतार-चढ़ाव
डीजल पर निर्यात शुल्क में कई बार बदलाव हुए हैं। 26 मार्च 2026 को इसे ₹21.50 प्रति लीटर तय किया गया था। 11 अप्रैल को इसे बढ़ाकर ₹55.5 प्रति लीटर किया गया — जो इस चक्र का उच्चतम स्तर रहा। 30 अप्रैल को इसे घटाकर ₹23 प्रति लीटर किया गया और अब 1 जून से यह ₹13.5 प्रति लीटर पर आ गया है।
एटीएफ पर भी इसी तरह उतार-चढ़ाव देखा गया। शुरुआत में यह ₹29.5 प्रति लीटर था, जिसे बढ़ाकर ₹42 प्रति लीटर किया गया। बाद में इसे ₹33 प्रति लीटर और अब ₹9.5 प्रति लीटर कर दिया गया है — जो इस पूरे चक्र का सबसे निचला स्तर है।
घरेलू उपभोक्ताओं पर असर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू बाज़ार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर लागू उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसका अर्थ है कि पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को मिलने वाली ईंधन दरें फिलहाल यथावत रहेंगी। यह व्यवस्था मुख्यतः रिफाइनरी कंपनियों के निर्यात लाभ को नियंत्रित करने के लिए है।
आगे क्या
पश्चिम एशिया संकट से उपजी वैश्विक तेल बाज़ार की अनिश्चितता जब तक बनी रहेगी, पाक्षिक समीक्षा का यह चक्र जारी रहने की संभावना है। विशेषज्ञों के अनुसार, डीजल और एटीएफ पर शुल्क में लगातार कटौती यह संकेत देती है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी आई है और घरेलू आपूर्ति दबाव कम हुआ है।