1 जुलाई से व्यावसायिक ग्राहकों पर पेट्रोल-डीजल प्रतिबंध हटाएगी केंद्र सरकार, 19 दिन बाद मिलेगी राहत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 29 जून 2026 को घोषणा की कि 1 जुलाई 2026 से व्यावसायिक ग्राहकों के लिए पेट्रोल और डीजल की खुदरा बिक्री पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध हटा लिए जाएंगे। इस फैसले से औद्योगिक, संस्थागत और परिवहन क्षेत्र के उपभोक्ता एक बार फिर खुदरा पेट्रोल पंपों से बिना किसी मात्रा-सीमा के ईंधन खरीद सकेंगे।
क्या था प्रतिबंध और कब लगा
12 जून 2026 को लागू किए गए 'मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल (खुदरा आउटलेट्स के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026' के तहत औद्योगिक, संस्थागत और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को खुदरा पेट्रोल पंपों से ईंधन खरीदने पर रोक लगाई गई थी। इसके साथ ही डीजल की खुदरा बिक्री भी प्रति ग्राहक या प्रति वाहन प्रतिदिन 200 लीटर तक सीमित कर दी गई थी। यह प्रतिबंध महज 19 दिन ही लागू रहा।
प्रतिबंध लगाने की वजह
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने उस समय स्पष्ट किया था कि ये पाबंदियां वैश्विक ऊर्जा व्यापार में संभावित बाधाओं और ईंधन की मांग में असामान्य बढ़ोतरी को देखते हुए घरेलू आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए लगाई गई थीं। मंत्रालय के अनुसार, कई औद्योगिक और थोक डीजल उपभोक्ता अपने निर्धारित उपभोक्ता पंपों को छोड़कर सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMC) के खुदरा पंपों से डीजल खरीदने लगे थे।
इसकी प्रमुख वजह खुदरा और थोक डीजल की कीमतों के बीच बड़ा अंतर था — खुदरा डीजल, थोक डीजल की तुलना में करीब ₹40 प्रति लीटर सस्ता था, जबकि थोक डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप बनी हुई थीं। इससे ईंधन की कालाबाजारी, जमाखोरी और खुदरा पंपों से अनधिकृत निकासी का खतरा बढ़ गया था।
सरकार की स्थिति और आश्वासन
सरकारी अधिकारियों ने प्रतिबंध लागू होते समय यह भी स्पष्ट किया था कि इनका मतलब देश में पेट्रोल या डीजल की कमी नहीं है और न ही इनका उद्देश्य ईंधन की राशनिंग करना था। मंत्रालय ने यह भी बताया था कि यह पूरी तरह अस्थायी व्यवस्था है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर अधिकतम 90 दिनों तक लागू रखा जा सकता था।
व्यावसायिक क्षेत्र पर असर
गौरतलब है कि इन प्रतिबंधों से परिवहन कंपनियों, निर्माण उद्योगों और अन्य संस्थागत उपभोक्ताओं को सबसे अधिक असुविधा हुई थी, क्योंकि उनकी ईंधन की दैनिक जरूरतें बड़ी मात्रा में होती हैं। 1 जुलाई 2026 से इन सभी वर्गों के लिए खुदरा पेट्रोल पंपों पर खरीद की कोई मात्रा-सीमा नहीं रहेगी।
आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है और खुदरा व थोक डीजल की कीमतों के बीच का अंतर एक संरचनात्मक चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक इस मूल्य अंतर को दूर नहीं किया जाता, भविष्य में इस तरह की स्थिति फिर उत्पन्न हो सकती है। सरकार की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि थोक और खुदरा डीजल मूल्य के अंतर को पाटने के लिए कोई दीर्घकालिक नीति बनाई जाएगी या नहीं।