जयशंकर और विक्रम मिस्री ने MP-LEADS फेलो से की मुलाकात, विदेश नीति और विकसित भारत पर हुई गहन चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 14 अगस्त 2025 को नई दिल्ली में MP-LEADS फेलोशिप प्रोग्राम के युवा प्रतिभागियों से मुलाकात की और भारत की विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय साझेदारी तथा प्रमुख राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की। इसी क्रम में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी फेलो के एक अलग समूह से मुलाकात कर भारत की कूटनीतिक दिशा पर संवाद किया।
मुख्य घटनाक्रम
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'मेरे संसदीय साथी राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपचड़े द्वारा आयोजित किए गए MP-LEADS फेलोशिप प्रोग्राम के तहत भारत के अलग-अलग हिस्सों से आए टैलेंटेड युवा पार्टिसिपेंट्स से मिलकर खुशी हुई।' उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं की भारतीय विदेश नीति के प्रति दिलचस्पी और उत्साह प्रशंसनीय है।
चर्चा में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी, डायस्पोरा कल्याण, नेबरहुड फर्स्ट नीति, प्रौद्योगिकी, विकसित भारत और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को केंद्र में रखा गया।
विदेश सचिव की भागीदारी
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी MP-LEADS फेलो के एक समूह से मुलाकात की, जिसमें महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपचड़े उपस्थित रहे। विदेश मंत्रालय ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि इस बातचीत में भारत की विदेश नीति के विभिन्न पहलुओं पर 'दिलचस्प चर्चा' हुई।
MP-LEADS फेलोशिप क्या है
MP-LEADS — मेंबर्स ऑफ पार्लियामेंट लोकल एरिया डेवलपमेंट स्कीम - लीडरशिप एंड एंगेजमेंट फॉर एडवांस्ड डेवलपमेंट स्टडीज — एक दो महीने का इंटर्नशिप कार्यक्रम है, जिसे राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपचड़े ने प्रारंभ किया है। इसका उद्देश्य युवाओं को शासन, लोक नीति और विधायी प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना है।
उपराष्ट्रपति सचिवालय द्वारा 2 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 5,000 से अधिक आवेदनों में से केवल 40 प्रतिभागियों का चयन किया गया। चयनित प्रतिभागियों में 62 प्रतिशत महिलाएँ थीं और ये प्रतिभागी देश के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उपराष्ट्रपति का संदेश
2 जुलाई को उपराष्ट्रपति भवन में फेलो से संवाद करते हुए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने युवाओं से राष्ट्रीय सेवा के प्रति प्रतिबद्ध नेता बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, 'नेतृत्व का आकलन अधिकार से नहीं, बल्कि समाज की सेवा विनम्रता, ईमानदारी और करुणा के साथ करने की क्षमता से होता है।'
आगे की दिशा
यह फेलोशिप कार्यक्रम भारत की अगली पीढ़ी के नीति-निर्माताओं को कूटनीति और शासन की व्यावहारिक समझ देने की दिशा में एक ठोस पहल के रूप में देखा जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों की इस स्तर की सीधी भागीदारी इस कार्यक्रम को संस्थागत गंभीरता प्रदान करती है।