जयशंकर की मनीला में फिलीपींस FM लाजारो से मुलाकात, हिंद-प्रशांत और रणनीतिक साझेदारी पर अहम चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 22 जुलाई 2026 को मनीला में फिलीपींस की विदेश मंत्री थेरेसा पी. लाजारो से द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें भारत-फिलीपींस रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र के ताज़ा घटनाक्रमों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक ऐसे संवेदनशील समय में हुई जब दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस और चीन के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है।
बैठक में क्या हुई चर्चा
बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'आज मनीला में फिलीपींस की विदेश मंत्री थेरेसा पी. लाजारो से मिलकर खुशी हुई। व्यापार एवं निवेश, शिक्षा, रक्षा एवं सुरक्षा, समुद्री सहयोग, क्षमता निर्माण और विकास सहयोग पर केंद्रित हमारी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर सार्थक चर्चा हुई।' उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्षों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए।
फिलीपींस की विदेश मंत्री लाजारो ने भी एक्स पर पोस्ट कर बताया कि दोनों देशों के बीच फिनटेक, व्यापार एवं निवेश, उच्च शिक्षा, दवा उद्योग, रक्षा, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
दक्षिण चीन सागर में बढ़ता तनाव — पृष्ठभूमि
फिलीपींस के अनुसार, 20 जुलाई 2026 को दक्षिण चीन सागर के सेकंड थॉमस शोल क्षेत्र में चीन ने उसकी नौसेना के जवानों के विरुद्ध 'खतरनाक और आक्रामक कार्रवाई' की। यह घटना ऐसे समय में हुई जब अमेरिका के नेतृत्व में 12 देशों — जिनमें ऑस्ट्रेलिया, जापान, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड शामिल हैं — ने 2016 के ऐतिहासिक मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले की 10वीं वर्षगाँठ पर 'स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत' के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उस फैसले में चीन के व्यापक समुद्री दावों को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत खारिज किया गया था।
भारत की रणनीतिक स्थिति
भारत के लिए दक्षिण चीन सागर के घटनाक्रम केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं — देश का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं समुद्री मार्गों से गुजरता है। नई दिल्ली लगातार नौवहन की स्वतंत्रता, निर्बाध समुद्री व्यापार और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के अनुरूप विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है। गौरतलब है कि भारत ने हाल ही में एक बार फिर स्पष्ट किया कि दक्षिण चीन सागर से जुड़े सभी विवाद UNCLOS के ढाँचे में ही सुलझाए जाने चाहिए।
आसियान-भारत पोस्ट-मिनिस्टीरियल सम्मेलन में जयशंकर का संबोधन
इसी दिन आसियान-भारत पोस्ट-मिनिस्टीरियल सम्मेलन 2026 में उद्घाटन संबोधन देते हुए जयशंकर ने हिंद-प्रशांत के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'भारत के लिए आसियान की केंद्रीय भूमिका एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। हिंद-प्रशांत पर आसियान का दृष्टिकोण भारत की इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव के साथ मेल खाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि भारत और आसियान, जिनकी संयुक्त आबादी लगभग दो अरब है, को सुरक्षित और स्थिर भविष्य के लिए साथ मिलकर आगे बढ़ना होगा।
आगे क्या
इस बैठक से भारत-फिलीपींस संबंधों में नई गति आने की उम्मीद है, विशेष रूप से रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में। दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव के बीच दोनों देशों के बीच बढ़ता सामरिक तालमेल हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भविष्य की रूपरेखा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।