22 जुलाई 2026
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जयशंकर का मनीला में आह्वान: वैश्विक उथल-पुथल में भारत-आसियान को चाहिए गहरा सहयोग

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जयशंकर का मनीला में आह्वान: वैश्विक उथल-पुथल में भारत-आसियान को चाहिए गहरा सहयोग

सारांश

मनीला में जयशंकर का संदेश साफ था — वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में भारत और आसियान की 2 अरब की संयुक्त आबादी को अकेले नहीं, मिलकर चलना होगा। सप्लाई चेन से लेकर समुद्री सुरक्षा तक, यह सम्मेलन भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति का अहम पड़ाव बन गया।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 22 जुलाई 2026 को मनीला में भारत-आसियान पोस्ट-मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस में भाग लिया।
उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता में कोई भी एकल देश या समूह अकेले चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता।
सप्लाई चेन , ऊर्जा सुरक्षा , खाद्य सुरक्षा और समुद्री व्यापार को प्रमुख चिंता क्षेत्र बताया।
2026 को 'आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष' घोषित किया गया है।
भारत-आसियान की संयुक्त आबादी 2 अरब ; जयशंकर ने इसे वैश्विक स्थिरता की साझा ज़िम्मेदारी बताया।
इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव और आसियान के इंडो-पैसिफिक नज़रिये में स्वाभाविक समन्वय पर ज़ोर।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 22 जुलाई 2026 को मनीला में आयोजित 'भारत के साथ आसियान पोस्ट-मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस' में स्पष्ट संदेश दिया कि बढ़ती वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में भारत और आसियान (दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्र संघ) के बीच सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाना अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कोई भी एकल देश या क्षेत्रीय समूह आज की बहुआयामी चुनौतियों से अकेले नहीं निपट सकता।

सम्मेलन का संदर्भ और फिलीपींस की भूमिका

जयशंकर ने अपने उद्घाटन वक्तव्य में फिलीपींस को उसके गर्मजोशी भरे आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया और भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने में देश की कंट्री कोऑर्डिनेटर की भूमिका को सराहा। सम्मेलन की अध्यक्षता की थीम 'एक साथ हमारे भविष्य को आगे बढ़ाना' का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "दुनिया बहुत उथल-पुथल भरी है और यह बात तेज़ी से साफ हो रही है कि कोई भी एक देश या समूह अकेले इससे नहीं निपट सकता।"

सप्लाई चेन, ऊर्जा और समुद्री सुरक्षा पर चिंता

विदेश मंत्री ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद व्यावहारिक खतरों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "उतार-चढ़ाव और उथल-पुथल के इस दौर में सप्लाई चेन पर सबसे ज़्यादा दबाव दिख रहा है। ऊर्जा, भोजन और स्वास्थ्य सुरक्षा को अब हल्के में नहीं लिया जा सकता।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि चूँकि भारत और आसियान दोनों समुद्री व्यापार पर अत्यधिक निर्भर हैं, इसलिए इस क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पालन अनिवार्य है। यह टिप्पणी दक्षिण चीन सागर में बढ़ते तनाव की पृष्ठभूमि में विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।

2026: आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष

जयशंकर ने सदस्य देशों को याद दिलाया कि 2026 को आधिकारिक रूप से 'आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष' घोषित किया गया है। उन्होंने इसे "एक ज़्यादा स्थिर और सुरक्षित भविष्य के लिए हम क्या कर सकते हैं, इसकी समय पर याद दिलाने वाला कदम" बताया। गौरतलब है कि यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं।

भारत-आसियान एजेंडा: व्यापार से डिजिटल तक

विदेश मंत्री ने भारत-आसियान सहयोग के विस्तृत एजेंडे की रूपरेखा रखी, जिसमें व्यापार और निवेश, लोगों की आवाजाही और प्रतिभा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल और हवाई संपर्क, हरित अर्थव्यवस्था और कनेक्टिविटी जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने कहा, "सिर्फ गहरे सहयोग से ही हम जोखिम कम कर सकते हैं और विविधता ला सकते हैं।" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंडो-पैसिफिक पर आसियान का नज़रिया भारत की 'इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव' के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाता है।

साझा भविष्य: 2 अरब की आबादी की ज़िम्मेदारी

जयशंकर ने अपने संबोधन के अंत में एक व्यापक दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि भारत और आसियान की संयुक्त 2 अरब की आबादी को मिलकर इस परिवर्तनकारी दौर से गुज़रना होगा ताकि दुनिया सुरक्षित और स्थिर बनी रहे। उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि चुनौतियों के बीच भी अवसरों पर ध्यान केंद्रित रखें। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों के बीच व्यापार समीक्षा और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर ठोस प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूरक के रूप में देखा जा रहा है। समुद्री कानूनों के पालन पर ज़ोर देना दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की आक्रामकता पर परोक्ष टिप्पणी है — बिना नाम लिए। हालाँकि, भारत-आसियान व्यापार समीक्षा वर्षों से लंबित है और कनेक्टिविटी परियोजनाएँ अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ी हैं; इसलिए सहयोग की यह भाषा तब तक अधूरी रहेगी जब तक ठोस समयसीमाएँ और जवाबदेही तंत्र सामने नहीं आते।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर ने मनीला में किस सम्मेलन में भाग लिया?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 22 जुलाई 2026 को मनीला में 'भारत के साथ आसियान पोस्ट-मिनिस्टीरियल कॉन्फ्रेंस' में भाग लिया। यह सम्मेलन भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मज़बूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
जयशंकर ने भारत-आसियान सहयोग में किन क्षेत्रों को प्राथमिकता बताई?
जयशंकर ने व्यापार और निवेश, लोगों की आवाजाही और प्रतिभा, प्रौद्योगिकी, डिजिटल और हवाई संपर्क, हरित अर्थव्यवस्था तथा कनेक्टिविटी को प्रमुख प्राथमिकताएँ बताया। उन्होंने कहा कि गहरे सहयोग से ही जोखिम कम किए जा सकते हैं।
आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष 2026 क्या है?
2026 को आधिकारिक रूप से 'आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष' घोषित किया गया है। जयशंकर ने इसे एक स्थिर और सुरक्षित भविष्य की दिशा में साझा प्रयासों की याद दिलाने वाला महत्त्वपूर्ण कदम बताया।
जयशंकर ने समुद्री व्यापार और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों पर क्यों ज़ोर दिया?
जयशंकर ने कहा कि भारत और आसियान दोनों समुद्री व्यापार पर अत्यधिक निर्भर हैं, इसलिए इस क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का पालन अनिवार्य है। यह टिप्पणी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं की पृष्ठभूमि में आई है।
भारत की 'इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव' और आसियान के नज़रिये में क्या समानता है?
जयशंकर के अनुसार, इंडो-पैसिफिक पर आसियान का नज़रिया भारत की 'इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव' के साथ स्वाभाविक रूप से मेल खाता है। दोनों पक्ष क्षेत्र में स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के पक्षधर हैं।
राष्ट्र प्रेस
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