जयशंकर का मनीला दौरा 22-23 जुलाई: आसियान, क्वाड और द्विपक्षीय बैठकों का एजेंडा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 22-23 जुलाई को फिलीपींस की राजधानी मनीला का दौरा करेंगे, जहाँ वे आसियान के तहत आयोजित विदेश मंत्रियों की बैठकों के साथ-साथ क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भाग लेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह दौरा भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और आसियान-इंडिया कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम है।
मनीला में बैठकों का एजेंडा
विदेश मंत्रालय ने बताया कि जयशंकर मनीला में आसियान-इंडिया, ईस्ट एशिया समिट (EAS) और आसियान रीजनल फोरम (ARF) की विदेश मंत्रियों की बैठकों में हिस्सा लेंगे। इन बहुपक्षीय मंचों के अलावा, वे विभिन्न देशों के अपने समकक्ष मंत्रियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।
मंत्रालय ने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2026 को 'आसियान-इंडिया ईयर ऑफ मैरीटाइम को-ऑपरेशन' यानी समुद्री सहयोग वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिससे इस दौरे का कूटनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।
क्वाड बैठक और इंडो-पैसिफिक रणनीति
आसियान बैठकों के साथ-साथ जयशंकर ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के विदेश मंत्रियों के साथ क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भी शामिल होंगे। गौरतलब है कि इससे पहले 26 मई को नई दिल्ली में 11वीं क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें चारों देशों ने पहली बार इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोलैबोरेशन (IPMSC) पहल की शुरुआत की घोषणा की थी।
IPMSC के तहत क्वाड देशों की समुद्री निगरानी क्षमताओं का उपयोग करते हुए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सूचना साझाकरण और समुद्री गतिविधियों की निगरानी को मजबूत किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में इसका केंद्र हिंद महासागर क्षेत्र रहेगा, और विशेषज्ञों के बीच अनुभव साझाकरण तथा टेबलटॉप अभ्यास भी शामिल होंगे।
रुबियो की उपस्थिति और अमेरिकी रुख
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मनीला पहुँच चुके हैं और वे आसियान पोस्ट-मिनिस्ट्रियल कॉन्फ्रेंस, ईस्ट एशिया समिट विदेश मंत्री बैठक तथा आसियान रीजनल फोरम बैठक में भाग लेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि इस दौरे का उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को 'स्वतंत्र, खुला, सुरक्षित और समृद्ध' बनाए रखने की अमेरिकी नीति को आगे बढ़ाना है। रुबियो इस यात्रा के दौरान फिलीपींस के साथ अमेरिका की व्यापक साझेदारी को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का संदर्भ
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ गहराते संबंधों को रेखांकित करता है। यह ऐसे समय में आया है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग को लेकर वैश्विक ध्यान बढ़ रहा है। मनीला बैठकें भारत को अपने पड़ोसी और भागीदार देशों के साथ एक साथ कई मंचों पर संवाद करने का अवसर देती हैं।