23 जुलाई 2026
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जयशंकर का मनीला में संदेश: हिंद-प्रशांत में स्वतंत्र समुद्री मार्ग और आसियान केंद्रीयता भारत की प्राथमिकता

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जयशंकर का मनीला में संदेश: हिंद-प्रशांत में स्वतंत्र समुद्री मार्ग और आसियान केंद्रीयता भारत की प्राथमिकता

सारांश

मनीला में 21वें ईस्ट एशिया समिट में जयशंकर का संदेश साफ था — भारत हिंद-प्रशांत में मूक दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय हितधारक है। समुद्री सुरक्षा, UNCLOS-आधारित आचार संहिता और साइबर अपराध पर उनकी टिप्पणियाँ क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत की बहुआयामी कूटनीतिक स्थिति को दर्शाती हैं।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 23 जुलाई को मनीला में 21वें ईस्ट एशिया समिट को संबोधित किया।
भारत ने आसियान की केंद्रीय भूमिका और हिंद-प्रशांत में स्वतंत्र, खुले समुद्री मार्गों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
दक्षिण चीन सागर पर भारत ने UNCLOS 1982 के अनुरूप कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता का समर्थन किया।
जयशंकर ने साइबर स्कैम सेंटरों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई की माँग की, जो बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।
भारत जल्द कोच्चि में 7वें EAS समुद्री सुरक्षा सहयोग सम्मेलन और लोथल में EAS मैरिटाइम हेरिटेज फेस्टिवल की मेज़बानी करेगा।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 जुलाई को मनीला में आयोजित 21वें ईस्ट एशिया समिट (EAS) को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत एक स्वतंत्र, खुले और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आसियान की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षित समुद्री मार्गों और बहुपक्षीय सहयोग को भारत की विदेश नीति का मूल स्तंभ बताया।

वैश्विक अनिश्चितता और बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य

जयशंकर ने समिट में कहा कि आज दुनिया का माहौल अनिश्चित और अस्थिर है — एक ओर देश परस्पर निर्भर हैं और उनके साझा हित हैं, वहीं दूसरी ओर प्रतिस्पर्धा और टकराव भी गहरे हो रहे हैं। समिट के बाद उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'दुनिया की अर्थव्यवस्था इस समय कई संघर्षों के असर से जूझ रही है। खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए ऊर्जा, खाद्य और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी जरूरी चीजों को अब पहले की तरह तय मानकर नहीं चल सकते।'

उन्होंने यह भी जोड़ा कि नई तकनीकों, बढ़ती पहुँच और बदलते अंतरराष्ट्रीय रिश्तों की वजह से राजनीति और सुरक्षा के मुद्दे अब कई बार अर्थव्यवस्था और कार्यकुशलता से भी ज़्यादा अहम हो गए हैं।

समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून पर भारत का रुख

जयशंकर ने दृढ़ता से कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग सुरक्षित रहने चाहिए और उन पर बिना किसी रुकावट के आवाजाही होनी चाहिए — यह सब अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'किसी भी हाल में नाविकों, आम नागरिकों के जहाज़ों या महत्वपूर्ण ढाँचे पर हमलों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।'

दक्षिण चीन सागर के संदर्भ में उन्होंने कहा कि भारत एक प्रभावी, ठोस और कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता (Code of Conduct) का समर्थन करता है, जो समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन 1982 (UNCLOS 1982) के अनुरूप हो और किसी भी वैध उपयोगकर्ता के अधिकारों को नुकसान न पहुँचाए।

पश्चिम एशिया, म्यांमार और साइबर अपराध पर चिंता

विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्षों को समाप्त करने के लिए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। म्यांमार के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत शांतिपूर्ण समाधान चाहता है और इस दिशा में आसियान के प्रयासों का निरंतर समर्थन करेगा।

जयशंकर ने साइबर ठगी गिरोहों के खिलाफ सामूहिक और सख्त कार्रवाई की अपील करते हुए कहा कि ऐसे साइबर स्कैम सेंटर बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को अपना शिकार बना चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर अपराध केंद्रों से भारतीयों की तस्करी की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं।

भारत की आगामी मेज़बानी और क्षेत्रीय सहयोग

जयशंकर ने घोषणा की कि भारत जल्द ही कोच्चि में 7वें ईस्ट एशिया समिट समुद्री सुरक्षा सहयोग सम्मेलन की मेज़बानी करेगा। इसके अतिरिक्त, लोथल में ईस्ट एशिया समिट मैरिटाइम हेरिटेज फेस्टिवल का आयोजन भी प्रस्तावित है — जो भारत की समुद्री विरासत और क्षेत्रीय जुड़ाव को एक साथ रेखांकित करता है। गौरतलब है कि लोथल सिंधु घाटी सभ्यता का प्राचीन बंदरगाह स्थल है, जो भारत की हज़ारों वर्ष पुरानी समुद्री परंपरा का प्रतीक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिना नाम लिए। साइबर स्कैम सेंटरों पर ज़ोर देना घरेलू राजनीतिक दबाव का भी प्रतिबिंब है, क्योंकि दक्षिण-पूर्व एशिया से भारतीयों की तस्करी की खबरें सुर्खियाँ बन चुकी हैं। कोच्चि और लोथल में आयोजनों की मेज़बानी भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को ठोस कार्यक्रमों से जोड़ने का प्रयास है — हालाँकि इन पहलों का दीर्घकालिक प्रभाव क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

21वें ईस्ट एशिया समिट में जयशंकर ने क्या कहा?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 23 जुलाई को मनीला में 21वें ईस्ट एशिया समिट में भारत की हिंद-प्रशांत नीति, समुद्री सुरक्षा, आसियान केंद्रीयता और साइबर अपराध पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि नाविकों, नागरिक जहाज़ों या महत्वपूर्ण ढाँचे पर हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।
दक्षिण चीन सागर पर भारत का क्या रुख है?
भारत एक प्रभावी, ठोस और कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता का समर्थन करता है जो UNCLOS 1982 के अनुरूप हो और किसी भी वैध उपयोगकर्ता के अधिकारों को नुकसान न पहुँचाए। जयशंकर ने यह स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर बिना रुकावट आवाजाही अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुनिश्चित होनी चाहिए।
भारत साइबर स्कैम सेंटरों पर इतना जोर क्यों दे रहा है?
दक्षिण-पूर्व एशिया में सक्रिय साइबर स्कैम सेंटर बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों को अपना शिकार बना चुके हैं। जयशंकर ने ईस्ट एशिया समिट में इन गिरोहों के खिलाफ सामूहिक और सख्त कार्रवाई की अपील की, जो इस मुद्दे को द्विपक्षीय से बहुपक्षीय एजेंडे पर ले जाने का प्रयास है।
कोच्चि और लोथल में कौन से आयोजन होने वाले हैं?
भारत जल्द ही कोच्चि में 7वें ईस्ट एशिया समिट समुद्री सुरक्षा सहयोग सम्मेलन की मेज़बानी करेगा। इसके अलावा, सिंधु घाटी सभ्यता के प्राचीन बंदरगाह स्थल लोथल में ईस्ट एशिया समिट मैरिटाइम हेरिटेज फेस्टिवल का आयोजन भी प्रस्तावित है।
म्यांमार संकट पर भारत का क्या रुख है?
जयशंकर ने कहा कि भारत म्यांमार के मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है और इस दिशा में आसियान के प्रयासों का निरंतर समर्थन करता रहेगा। भारत ने बातचीत और कूटनीति को संघर्ष समाधान का सबसे उचित माध्यम बताया।
राष्ट्र प्रेस
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