जयशंकर का मनीला में कड़ा संदेश: समुद्री मार्गों पर हमले अस्वीकार्य, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 23 जुलाई 2026 को मनीला में आयोजित 33वीं आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) मंत्रिस्तरीय बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा कि व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से होने वाला व्यापार सुरक्षित, निर्बाध और स्वतंत्र रूप से जारी रहना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दक्षिण चीन सागर और उत्तरी अरब सागर में समुद्री टकराव की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।
मनीला प्लान ऑफ एक्शन और भारत का इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण
बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए जयशंकर ने मनीला प्लान ऑफ एक्शन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के पाँचों प्रमुख स्तंभ भारत के इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। गौरतलब है कि भारत लंबे समय से एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की वकालत करता रहा है।
आपदा राहत में सहयोग और भारत की भूमिका
जयशंकर ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत की सक्रिय भागीदारी को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "भारत आपदा राहत के क्षेत्र में सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करने, साझा मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOP) विकसित करने और वास्तविक समय व टेबल-टॉप अभ्यास आयोजित करने का समर्थन करता है।" उन्होंने बताया कि भारत कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) का समर्थन करता है और नियमित रूप से फील्ड अस्पताल, खोज एवं बचाव दल तथा चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराता है।
उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि हाल के वर्षों में भारत ने श्रीलंका, फिलीपींस और जमैका में आए चक्रवातों के साथ-साथ म्यांमार, वेनेजुएला और अफगानिस्तान में आए भूकंपों के बाद पुनर्वास और राहत कार्यों में सहयोग किया है।
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति
आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने अपनी कड़ी स्थिति दोहराई। उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों के गंभीर परिणाम होने चाहिए और आतंकवाद को वित्तीय सहायता पहुँचाने वाले स्रोतों पर रोक लगाना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि भारत, मलेशिया के साथ मिलकर आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस (ADMM+) के आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता कर रहा है और आतंकवाद से निपटने की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का संकलन तैयार कर रहा है।
समुद्री सुरक्षा और दक्षिण चीन सागर विवाद
समुद्री सुरक्षा पर विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर, इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (IPMDA) पहल और उत्तरी अरब सागर से लेकर पश्चिमी प्रशांत तक भारतीय नौसैनिक बलों की तैनाती समुद्री डकैती, मानव तथा मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
दक्षिण चीन सागर पर जयशंकर ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS-1982) के अनुरूप एक प्रभावी, सार्थक और कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता का समर्थन करता है, जो सभी वैध उपयोगकर्ताओं के अधिकारों का सम्मान करे। उल्लेखनीय है कि दक्षिण चीन सागर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है, जिस पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान अपने-अपने दावे करते हैं।
AI, साइबर सुरक्षा और परमाणु अप्रसार
जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण को कमज़ोर करने वाली गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए जिम्मेदार और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने तथा साइबर अपराधों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने की भी वकालत की। भारत की यह स्थिति इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली केवल पारंपरिक सुरक्षा नहीं, बल्कि उभरते तकनीकी खतरों पर भी बहुपक्षीय सहमति चाहती है।