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जयशंकर का मनीला में कड़ा संदेश: समुद्री मार्गों पर हमले अस्वीकार्य, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस

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जयशंकर का मनीला में कड़ा संदेश: समुद्री मार्गों पर हमले अस्वीकार्य, आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस

सारांश

मनीला में 33वीं ARF बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने दो-टूक कहा — व्यापारिक जहाजों पर हमले बर्दाश्त नहीं, आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं। भारत ने UNCLOS आधारित दक्षिण चीन सागर आचार संहिता, AI सुरक्षा और वैश्विक आपदा राहत सहयोग पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।

मुख्य बातें

विदेश मंत्री जयशंकर ने 23 जुलाई 2026 को मनीला में 33वीं ARF मंत्रिस्तरीय बैठक को संबोधित किया।
व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हमलों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया; अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर दिया।
आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई; भारत-मलेशिया मिलकर ADMM+ आतंकवाद-रोधी कार्य समूह की सह-अध्यक्षता कर रहे हैं।
भारत ने UNCLOS-1982 के अनुरूप दक्षिण चीन सागर में कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता का समर्थन किया।
CDRI के तहत आपदा राहत में सहयोग; श्रीलंका, फिलीपींस, म्यांमार, वेनेजुएला, अफगानिस्तान को हाल में सहायता दी।
AI के लिए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण और साइबर अपराधों पर वैश्विक सहयोग बढ़ाने की वकालत।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 23 जुलाई 2026 को मनीला में आयोजित 33वीं आसियान क्षेत्रीय मंच (ARF) मंत्रिस्तरीय बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा कि व्यापारिक जहाजों और नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से होने वाला व्यापार सुरक्षित, निर्बाध और स्वतंत्र रूप से जारी रहना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दक्षिण चीन सागर और उत्तरी अरब सागर में समुद्री टकराव की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

मनीला प्लान ऑफ एक्शन और भारत का इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण

बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए जयशंकर ने मनीला प्लान ऑफ एक्शन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस योजना के पाँचों प्रमुख स्तंभ भारत के इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण के अनुरूप हैं। गौरतलब है कि भारत लंबे समय से एक स्वतंत्र, खुले और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की वकालत करता रहा है।

आपदा राहत में सहयोग और भारत की भूमिका

जयशंकर ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भारत की सक्रिय भागीदारी को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, "भारत आपदा राहत के क्षेत्र में सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने, सर्वोत्तम प्रक्रियाओं को साझा करने, साझा मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOP) विकसित करने और वास्तविक समय व टेबल-टॉप अभ्यास आयोजित करने का समर्थन करता है।" उन्होंने बताया कि भारत कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर (CDRI) का समर्थन करता है और नियमित रूप से फील्ड अस्पताल, खोज एवं बचाव दल तथा चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराता है।

उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि हाल के वर्षों में भारत ने श्रीलंका, फिलीपींस और जमैका में आए चक्रवातों के साथ-साथ म्यांमार, वेनेजुएला और अफगानिस्तान में आए भूकंपों के बाद पुनर्वास और राहत कार्यों में सहयोग किया है।

आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस की नीति

आतंकवाद के मुद्दे पर जयशंकर ने अपनी कड़ी स्थिति दोहराई। उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों के गंभीर परिणाम होने चाहिए और आतंकवाद को वित्तीय सहायता पहुँचाने वाले स्रोतों पर रोक लगाना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि भारत, मलेशिया के साथ मिलकर आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस (ADMM+) के आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता कर रहा है और आतंकवाद से निपटने की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का संकलन तैयार कर रहा है।

समुद्री सुरक्षा और दक्षिण चीन सागर विवाद

समुद्री सुरक्षा पर विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर, इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (IPMDA) पहल और उत्तरी अरब सागर से लेकर पश्चिमी प्रशांत तक भारतीय नौसैनिक बलों की तैनाती समुद्री डकैती, मानव तथा मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

दक्षिण चीन सागर पर जयशंकर ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS-1982) के अनुरूप एक प्रभावी, सार्थक और कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता का समर्थन करता है, जो सभी वैध उपयोगकर्ताओं के अधिकारों का सम्मान करे। उल्लेखनीय है कि दक्षिण चीन सागर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है, जिस पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान अपने-अपने दावे करते हैं।

AI, साइबर सुरक्षा और परमाणु अप्रसार

जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से परमाणु अप्रसार और निरस्त्रीकरण को कमज़ोर करने वाली गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए जिम्मेदार और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने तथा साइबर अपराधों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग बढ़ाने की भी वकालत की। भारत की यह स्थिति इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली केवल पारंपरिक सुरक्षा नहीं, बल्कि उभरते तकनीकी खतरों पर भी बहुपक्षीय सहमति चाहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आलोचकों का कहना है कि जब तक ADMM+ जैसे मंचों के प्रस्ताव बाध्यकारी तंत्र में नहीं बदलते, ये घोषणाएँ कागज़ी रहती हैं। असली परीक्षा यह है कि क्या भारत आसियान देशों को चीन से स्वतंत्र सुरक्षा ढाँचे की ओर खींच पाता है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

33वीं आसियान क्षेत्रीय मंच बैठक में जयशंकर ने क्या कहा?
विदेश मंत्री जयशंकर ने 23 जुलाई 2026 को मनीला में कहा कि व्यापारिक जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग सुरक्षित व निर्बाध रहने चाहिए। उन्होंने आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस, दक्षिण चीन सागर में UNCLOS-आधारित आचार संहिता और AI सुरक्षा पर भी भारत की स्थिति स्पष्ट की।
भारत दक्षिण चीन सागर विवाद पर क्या रुख रखता है?
भारत UNCLOS-1982 के अनुरूप एक प्रभावी, सार्थक और कानूनी रूप से बाध्यकारी आचार संहिता का समर्थन करता है जो सभी वैध उपयोगकर्ताओं के अधिकारों का सम्मान करे। दक्षिण चीन सागर पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान के बीच क्षेत्रीय विवाद है।
आतंकवाद-रोधी मोर्चे पर भारत आसियान में क्या भूमिका निभा रहा है?
भारत, मलेशिया के साथ मिलकर ADMM+ के आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञ कार्य समूह की सह-अध्यक्षता कर रहा है और आतंकवाद से निपटने की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का संकलन तैयार कर रहा है। जयशंकर ने आतंकवाद के वित्तपोषण पर रोक लगाने की भी ज़रूरत बताई।
भारत आपदा राहत के क्षेत्र में आसियान देशों के साथ कैसे सहयोग करता है?
भारत CDRI का समर्थन करता है और नियमित रूप से फील्ड अस्पताल, खोज एवं बचाव दल, राहत सामग्री तथा चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराता है। हाल में भारत ने श्रीलंका, फिलीपींस, जमैका में चक्रवातों और म्यांमार, वेनेजुएला, अफगानिस्तान में भूकंपों के बाद राहत कार्यों में सहयोग दिया।
मनीला प्लान ऑफ एक्शन क्या है और भारत इसका समर्थन क्यों करता है?
मनीला प्लान ऑफ एक्शन आसियान क्षेत्रीय मंच का एक बहुपक्षीय सहयोग ढाँचा है जिसके पाँच प्रमुख स्तंभ हैं। जयशंकर के अनुसार ये पाँचों स्तंभ भारत के इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, इसीलिए भारत ने इसका स्वागत किया।
राष्ट्र प्रेस
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