बल्क डीजल बिक्री पर केंद्र की रोक: तेल कंपनियों को ₹500 करोड़ प्रतिदिन के नुकसान से राहत की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 12 जून 2026 को देशभर के रिटेल आउटलेट्स पर बल्क डीजल की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियाँ वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग ₹500 करोड़ की अंडर रिकवरी झेल रही हैं। यह कदम सब्सिडी वाले रिटेल ईंधन के बल्क उपभोक्ताओं की ओर अनधिकृत डायवर्जन को रोकने के लिए उठाया गया है।
नए नियमों में क्या है
'मोटर स्पिरिट और हाई-स्पीड डीजल आदेश, 2026' के तहत ये अस्थायी प्रतिबंध शुरुआती 90 दिनों के लिए लागू किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार, रिटेल आउटलेट डीजल केवल गाड़ियों के टैंक में या पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) से मंजूरी प्राप्त कंटेनरों में ही दे सकते हैं। प्रत्येक ग्राहक या गाड़ी के लिए प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर की सीमा निर्धारित की गई है।
इसके साथ ही, रिटेल आउटलेट से खरीदे गए डीजल की पुनर्बिक्री पर पूर्णतः प्रतिबंध है। औद्योगिक, संस्थागत, व्यावसायिक और प्रत्यक्ष उपभोक्ताओं को रिटेल आउटलेट से डीजल लेने से मना किया गया है — उन्हें अब निर्धारित कंज्यूमर पंपों से ही आपूर्ति लेनी होगी।
प्रतिबंध की वजह क्या बनी
मंत्रालय ने बताया कि मई 2026 के आँकड़ों में सार्वजनिक क्षेत्र के रिटेल आउटलेट्स पर डीजल की माँग में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई। 327 जिलों में पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक और 80 जिलों में 30 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी सामने आई।
इसकी मुख्य वजह यह रही कि रिटेल डीजल, बल्क डीजल की तुलना में लगभग ₹40 प्रति लीटर सस्ता है। बल्क उपभोक्ता इस मूल्य अंतर का फायदा उठाकर सार्वजनिक ईंधन स्टेशनों से खरीदारी करने लगे थे। मंत्रालय के संज्ञान में जेरी कैन में बड़ी मात्रा में डीजल खरीदकर उसे दोबारा बेचने के मामले भी आए।
निजी कंपनियों पर असर
वहीं, ऊँची कीमतों के कारण मई 2026 में निजी तेल विपणन कंपनियों की हाई-स्पीड डीजल (HSD) बिक्री में लगभग 58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह आँकड़ा दर्शाता है कि मूल्य अंतर किस हद तक बाज़ार को विकृत कर रहा था।
नियम पालन की जिम्मेदारी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आदेश के अनुपालन और उल्लंघन रोकने की जिम्मेदारी तेल विपणन कंपनियों (OMC) और रिटेल आउटलेट डीलरों की होगी। इसके अलावा, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को कालाबाज़ारी और अनधिकृत डायवर्जन के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार घरों, किसानों और आम उपभोक्ताओं को ऊर्जा मूल्य वृद्धि से बचाने के लिए सार्वजनिक तेल कंपनियों को नुकसान में चलाने की नीति पर कायम है। आगामी 90 दिनों में इस आदेश की समीक्षा और वैश्विक कच्चे तेल की स्थिति के आधार पर नीतिगत निर्णय अपेक्षित हैं।