कर्नाटक सरकारी संपत्ति विधेयक 2026 को कैबिनेट की मंजूरी, प्रियांक खड़गे बोले — किसी संगठन के खिलाफ नहीं
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 13 अगस्त 2026 को सार्वजनिक संपत्तियों के अनधिकृत उपयोग पर लगाम लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाया। राज्य कैबिनेट ने 'कर्नाटक सरकारी परिसर और सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग के नियमन से संबंधित विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी है। राज्य के गृहमंत्री प्रियांक खड़गे ने गुरुवार को इस निर्णय की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से दी।
विधेयक में क्या है
नए विधेयक का उद्देश्य निजी व्यक्तियों, संगठनों, संघों और सोसायटियों द्वारा सरकारी परिसरों एवं सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग को विनियमित करना है। इसमें सरकारी भूमि, भवनों, खेल के मैदानों, पार्कों और सड़कों की सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट कानूनी ढाँचा तैयार किया गया है। विधेयक में आवेदन प्रक्रिया, शुल्क संरचना और उपयोगकर्ता की जिम्मेदारी को परिभाषित किया जाएगा, साथ ही उल्लंघन पर जुर्माने और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान भी रखा गया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
गृहमंत्री प्रियांक खड़गे ने एक्स पर लिखा, "कैबिनेट ने 'कर्नाटक सरकारी परिसर और सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग के नियमन से संबंधित विधेयक, 2026' को मंजूरी दे दी है।" उन्होंने उन आशंकाओं को भी सीधे खारिज किया जिनमें इस कानून को किसी विशेष संगठन पर निशाना साधने की कोशिश बताया जा रहा था। खड़गे ने लिखा, "हर कोई ऐसा क्यों सोच रहा है कि इसका मकसद किसी खास संस्थान, संघ, संगठन, सोसाइटी, क्लब, यूनियन, सिंडिकेट या एनजीओ पर रोक लगाना या उसे सीमित करना है? मेरी तो समझ से बाहर है।"
विधेयक की जरूरत क्यों पड़ी
अधिकारियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बेंगलुरु सहित राज्यभर में सरकारी मैदानों, पार्कों और सामुदायिक भवनों का बिना अनुमति के निजी कार्यक्रमों, बैठकों और व्यावसायिक उपयोग के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। इससे न केवल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचा, बल्कि आम नागरिकों को भी असुविधा का सामना करना पड़ा। गौरतलब है कि यह विधेयक ऐसे समय में आया है जब राज्य में सार्वजनिक स्थानों के व्यावसायिक दुरुपयोग को लेकर शिकायतें बढ़ रही थीं।
आम जनता पर असर
सरकार का तर्क है कि यह कानून करदाताओं के धन से निर्मित संपत्तियों के पारदर्शी और जनहितकारी उपयोग को सुनिश्चित करेगा। नए ढाँचे के तहत यह स्पष्ट किया जाएगा कि कौन, कब और किन शर्तों पर सरकारी परिसर का उपयोग कर सकता है। इससे आम नागरिकों को सार्वजनिक स्थानों तक बेहतर और निर्बाध पहुँच मिलने की उम्मीद है।
आगे क्या होगा
कैबिनेट की मंजूरी के बाद यह विधेयक अब कर्नाटक विधानसभा में पेश किया जाएगा। विधेयक के पारित होने के बाद राज्य सरकार इसके क्रियान्वयन के लिए विस्तृत नियम और दिशानिर्देश जारी करेगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधानसभा में विपक्ष इस पर क्या रुख अपनाता है।