आरएसएस न पंजीकृत है, न होगा: बी.एल. संतोष का कर्नाटक सरकार पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बी.एल. संतोष ने 15 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) न तो अभी पंजीकृत संगठन है और न ही भविष्य में इसका पंजीकरण कराया जाएगा। यह बयान उन्होंने बेंगलुरु के बन्नप्पा पार्क में 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हिंदू जागरण वेदिके द्वारा आयोजित 'अखंड भारत संकल्प दिवस' कार्यक्रम में दिया। यह टिप्पणी कर्नाटक सरकार के प्रस्तावित 'कर्नाटक सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग के विनियमन विधेयक, 2026' को लेकर उठे राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि में आई है।
संतोष का सीधा बयान
संतोष ने कार्यक्रम में तिरंगा और भगवा ध्वज फहराने के बाद कहा, 'आरएसएस पंजीकृत नहीं है और पंजीकृत नहीं होगा। हम जानते हैं कि जिन संगठनों ने पंजीकरण कराया है, वे क्या कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी संगठन के पंजीकरण को उसकी विश्वसनीयता या मूल्यांकन का पैमाना नहीं बनाया जा सकता।
इस बयान को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की आरएसएस के पंजीकरण से जुड़ी पूर्व टिप्पणी पर प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया माना जा रहा है। संतोष ने कहा कि हर चीज के लिए प्रियंक खड़गे को मानक नहीं माना जा सकता।
कर्नाटक विधेयक और राजनीतिक विवाद
राज्य में प्रस्तावित कानून को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) का आरोप है कि कर्नाटक सरकार इस विधेयक के माध्यम से आरएसएस और अन्य संगठनों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रही है। वहीं, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए सवाल किया था कि प्रस्तावित कानून में आरएसएस का उल्लेख कहाँ किया गया है।
प्रस्तावित विधेयक के तहत सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्ति के अनधिकृत उपयोग को अतिक्रमण माना जाएगा। पहली बार अपराध पर तीन साल तक की जेल और/या ₹5 लाख तक का जुर्माना, और दूसरी बार या उसके बाद पाँच साल तक की जेल तथा ₹10 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है। दोषसिद्धि के बाद भी उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन ₹5,000 तक का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
खड़गे परिवार और रजाकारों का संदर्भ
संतोष ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे पर निशाना साधते हुए हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र में रजाकारों के ऐतिहासिक हमलों का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि खड़गे परिवार रजाकारों के हमलों से बचकर कलबुर्गी आया था और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे भी उसी दौर में यहाँ आए थे।
संतोष ने कहा, 'आप और आपका परिवार यहाँ शांतिपूर्वक रह सका, इसका कारण हिंदू थे।' उन्होंने यह भी दावा किया कि जब पुलिस और राजनीतिक नेता मौजूद नहीं थे, तब आरएसएस के कार्यकर्ता रजाकारों के खिलाफ सड़कों पर खड़े थे।
बेंगलुरु की विधानसभा सीटों पर चुनौती
संतोष ने यह भी दावा किया कि पिछले 20 वर्षों से बेंगलुरु की शिवाजीनगर और चामराजपेट विधानसभा सीटों से कोई हिंदू प्रतिनिधि विधायक नहीं चुना जा सका। उन्होंने चुनौती दी कि इन दोनों क्षेत्रों में किसी हिंदू नेता को उम्मीदवार बनाकर जिताकर दिखाया जाए।
गौरतलब है कि संतोष ने खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि वे कार्यक्रम में राजनीति करने नहीं आए, हालाँकि उनके पूरे संबोधन में राजनीतिक और ऐतिहासिक संदर्भों का स्पष्ट समावेश रहा। यह विवाद आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में और तीखा रूप ले सकता है, खासकर जब विधेयक विधानसभा में पेश होने की संभावना है।