कर्नाटक सार्वजनिक संपत्ति विधेयक 2026: प्रियंक खड़गे बोले — 'विधेयक में आरएसएस का नाम तक नहीं', BJP ने किया पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने 14 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों से कहा कि प्रस्तावित कर्नाटक रेगुलेशन ऑफ यूज ऑफ गवर्नमेंट प्रिमाइसेज एंड पब्लिक प्रॉपर्टी बिल, 2026 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का कोई उल्लेख नहीं है। सत्तारूढ़ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच इस विधेयक को लेकर राजनीतिक विवाद तेजी से गहरा गया है, जिसमें BJP आरोप लगा रही है कि यह कानून आरएसएस की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के इरादे से लाया जा रहा है।
विधेयक में क्या है
प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य सरकारी ज़मीन, भवनों, सड़कों, पार्कों, खेल मैदानों, जल निकायों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों के अनधिकृत उपयोग को नियंत्रित करना है। इसके तहत निजी व्यक्तियों के साथ-साथ संगठनों, संघों और सोसाइटियों द्वारा ऐसी संपत्तियों के अनाधिकृत इस्तेमाल को अतिक्रमण माना जाएगा।
दंड के प्रावधानों के अनुसार, पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की जेल और/या ₹5 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। दूसरी या बाद की बार के अपराध पर पाँच साल तक की जेल और ₹10 लाख तक का जुर्माना प्रस्तावित है। दोषसिद्धि के बाद भी उल्लंघन जारी रहने पर प्रतिदिन ₹5,000 तक का अतिरिक्त जुर्माना लगाया जा सकता है।
सरकार की स्थिति
खड़गे ने BJP के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, 'क्या उन्होंने विधेयक पढ़ा है? अगर पढ़ा है तो उन्हें बताना चाहिए कि उनकी आपत्ति क्या है। विधेयक सदन में पेश होने दीजिए और उस पर बहस होने दीजिए।' उन्होंने यह भी कहा, 'इस विधेयक और आपके अपंजीकृत एवं अनियंत्रित संगठन का कोई संबंध नहीं है।'
श्रम, रोज़गार एवं प्रशिक्षण मंत्री संतोष लाड ने भी कहा, 'प्रस्तावित विधेयक में आरएसएस का कोई उल्लेख नहीं है। हम सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल के लिए कुछ मानदंड और शर्तें तय करने वाला विधेयक ला रहे हैं।' मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि सरकारी परिसरों या सार्वजनिक संपत्तियों पर गतिविधियाँ आयोजित करने वाले सभी संगठनों को बिना किसी भेदभाव के अनुमति लेनी होगी।
BJP का पलटवार
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने आरोप लगाया कि खड़गे ने अपने 'अहंकार' को संतुष्ट करने के लिए यह विधेयक लाया है और कहा कि सरकार के पास करीब डेढ़ साल का कार्यकाल बचा है, लेकिन वह रचनात्मक काम के बजाय ऐसे विवादों में उलझी है।
विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष चलवाड़ी नारायणस्वामी ने कहा कि कानून सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होना चाहिए, लेकिन किसी एक संगठन के खिलाफ प्रचार कर राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश गलत है। पूर्व गृह मंत्री और BJP विधायक अरागा ज्ञानेंद्र ने आरोप लगाया कि सरकार आरएसएस के प्रति पूर्वाग्रह के कारण यह कानून ला रही है और BJP इसका विरोध करेगी।
BJP विधायक वी. सुनील कुमार ने कहा कि गृह मंत्री को आरएसएस को लेकर 'फोबिया' है और आरएसएस का उल्लेख किए बिना भी खड़गे को लगता है कि वे प्रासंगिक नहीं रहेंगे।
खड़गे का जान से मारने की धमकी का दावा
इस विवाद के बीच खड़गे ने यह भी दावा किया कि उन्हें जान से मारने की धमकी मिली है और सवाल उठाया कि BJP नेता उन्हें निशाना क्यों बना रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मीडिया तय करे कि मैं उन्हें निशाना बना रहा हूँ या मैं उनका निशाना बन गया हूँ।'
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के पास विधानसभा कार्यकाल के लगभग डेढ़ साल शेष हैं। गौरतलब है कि सार्वजनिक संपत्तियों के उपयोग को लेकर इस तरह के विधेयक देश के अन्य राज्यों में भी विवाद का विषय रहे हैं। विधेयक के सदन में पेश होने के बाद बहस और तीखी होने की संभावना है, और यह देखना होगा कि सरकार विपक्ष की आपत्तियों का किस प्रकार जवाब देती है।