कर्नाटक में आरएसएस विवाद: भाजपा के विजयेंद्र ने सिद्धरामैया सरकार को दी खुली चुनौती — 'हिम्मत हो तो प्रतिबंध लगाएं'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा 'कर्नाटक सरकारी परिसर और सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग के नियमन से संबंधित विधेयक, 2026' को कैबिनेट में मंजूरी दिए जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने 14 अगस्त 2026 को बेंगलुरु में आरोप लगाया कि यह विधेयक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गतिविधियों पर अप्रत्यक्ष रूप से रोक लगाने की कोशिश है।
विधेयक में क्या है
राज्य कैबिनेट द्वारा पारित इस विधेयक का उद्देश्य निजी व्यक्तियों, संगठनों, संघों, सोसायटियों और अन्य संस्थाओं द्वारा सरकारी परिसरों तथा सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग को नियंत्रित करना है। आलोचकों का कहना है कि इसके तहत सार्वजनिक बैठकों के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य करने जैसे प्रावधान आरएसएस जैसे संगठनों को निशाना बना सकते हैं, हालांकि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सीधे तौर पर किसी संगठन का नाम नहीं लिया है।
विजयेंद्र की सीधी चुनौती
विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को खुली चुनौती देते हुए कहा, 'अगर हिम्मत है तो आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश करें।' उन्होंने माँग की कि सरकार स्पष्ट करे कि संगठन ने कौन-सी राष्ट्र-विरोधी गतिविधियाँ की हैं। विजयेंद्र ने यह भी याद दिलाया कि विधानसभा में मुख्यमंत्री ने आरएसएस की प्रार्थना का उल्लेख किया था, जिससे सरकार का इरादा स्पष्ट हो जाता है।
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर तंज कसते हुए विजयेंद्र ने कहा, 'अगर गृह मंत्री को आरएसएस में इतनी ही दिलचस्पी है, तो उन्हें गृह मंत्री का पद छोड़ देना चाहिए और आरएसएस का विरोध करने के लिए बने किसी विभाग की जिम्मेदारी संभाल लेनी चाहिए।'
ऐतिहासिक संदर्भ और भाजपा का तर्क
विजयेंद्र ने आरएसएस का बचाव करते हुए इसे एक ऐसा संगठन बताया जिसने एक शताब्दी पूरी कर ली है और देशभक्ति, राष्ट्रवाद तथा सेवा की भावना को बढ़ावा दिया है। उन्होंने सरकार को इतिहास से सीख लेने की नसीहत दी और याद दिलाया कि जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के कार्यकाल में भी आरएसएस पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन वह संगठन बाद में और अधिक मज़बूत होकर उभरा। उन्होंने कहा, 'सरकार को इतिहास से सीख लेनी चाहिए और उसी के अनुसार काम करना चाहिए।'
आवास मंत्री पर भी निशाना
विजयेंद्र ने आवास मंत्री बी.जेड. जमीर अहमद खान की भी आलोचना की। उनके अनुसार, जमीर अहमद खान ने 15 अगस्त को विजयनगर जिले में तिरंगा फहराने की ज़िम्मेदारी से छूट माँगते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा, जिसमें पार्टी के संगठनात्मक कार्यों और विधानसभा उपचुनावों की तैयारी का हवाला दिया गया था। विजयेंद्र ने इसे अनुचित बताते हुए कहा कि एक जिला प्रभारी मंत्री को स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए था।
आगे क्या होगा
यह विधेयक अब विधानसभा में पेश किए जाने की प्रतीक्षा में है, जहाँ भाजपा इसका कड़ा विरोध करने के संकेत दे चुकी है। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार गरीबों की समस्याओं और आम जनता की दिक्कतों को नजरअंदाज कर 'बेवजह के मुद्दे' उठा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आगामी विधानसभा सत्र में यह विधेयक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस का केंद्र बनेगा।