कर्नाटक BJP ने विशेष विधानसभा सत्र एक हफ्ते बढ़ाने की माँग की, सूखा और कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर व्यापक चर्चा की अपील
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक बीवाई विजयेंद्र ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को राज्य की कांग्रेस सरकार से प्रस्तावित तीन दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र को कम से कम एक सप्ताह तक बढ़ाने की माँग की। उनका तर्क है कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट, राज्य में गंभीर सूखे की स्थिति, पश्चिमी घाटों के संरक्षण और किसानों की चिंताओं जैसे अहम मुद्दों पर तीन दिनों में पर्याप्त चर्चा संभव नहीं होगी।
विपक्ष की माँग और तर्क
बेंगलुरु में विपक्ष के नेता आर. अशोक के साथ पत्रकारों को संबोधित करते हुए विजयेंद्र ने कहा कि पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील पश्चिमी घाटों की रक्षा करना उतना ही ज़रूरी है जितना वन-सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले किसानों की आजीविका सुनिश्चित करना। उन्होंने स्पष्ट किया कि BJP और उसकी सहयोगी जनता दल (सेक्युलर) — JD(S) इस सत्र में किसानों के मुद्दे और जनहित के अन्य मामले संयुक्त रूप से उठाएंगे।
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि BJP और JD(S) के लगातार विरोध प्रदर्शनों के दबाव में ही कांग्रेस सरकार को यह विशेष सत्र बुलाने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने हाल ही में संपन्न बेल्लारी चलो पदयात्रा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार विपक्ष की इस लामबंदी से 'विचलित' नज़र आ रहे हैं।
सत्र के एजेंडे पर विवाद
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने बैठक को 'विशेष सत्र' कहे जाने पर ही सवाल खड़े कर दिए। उनका आरोप है कि सत्र का एजेंडा जानबूझकर केवल कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और सूखे तक सीमित रखा गया है, ताकि NISE और बिदादी टाउनशिप परियोजना विवाद तथा KPSC घोटाले जैसे संवेदनशील मामलों पर चर्चा से बचा जा सके। अशोक ने यह भी तर्क दिया कि जिस प्रक्रिया से सत्र बुलाया गया, वह स्थापित विधायी मानदंडों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने बताया कि BJP पहले ही कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर सदन में नोटिस जमा कर चुकी है और विधानसभा में इस मुद्दे को पूरी दृढ़ता से उठाया जाएगा।
पिछले साढ़े तीन वर्षों के शासन पर बहस की माँग
विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री की हालिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि विधानसभा को कांग्रेस सरकार के पिछले साढ़े तीन वर्षों के शासनकाल का भी लेखा-जोखा लेना चाहिए और यह परखना चाहिए कि क्या सरकार ने जनता की समस्याओं को प्रभावी ढंग से सुलझाया है। उनके अनुसार, केवल एजेंडा-बद्ध सत्र से राज्य के वास्तविक मुद्दे अनसुलझे रह जाएंगे।
कस्तूरीरंगन रिपोर्ट और सूखे की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि कस्तूरीरंगन रिपोर्ट में पश्चिमी घाटों के एक बड़े हिस्से को 'पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र' (ESZ) घोषित करने की सिफारिश की गई है, जिससे कर्नाटक के कई ज़िलों में खनन, निर्माण और कृषि गतिविधियाँ प्रभावित होने की आशंका है। इसके साथ-साथ राज्य के कई जिले इस वर्ष गंभीर सूखे की चपेट में हैं, जिसने किसानों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में अगले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के बीच ग्रामीण मतदाताओं को साधने की होड़ तेज़ हो रही है।
आने वाले दिनों में विशेष सत्र की अवधि और एजेंडे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनातनी जारी रहने की संभावना है।