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विजयेंद्र का बड़ा आरोप: कर्नाटक में सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने के लिए कांग्रेस सरकार माँग रही रिश्वत

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विजयेंद्र का बड़ा आरोप: कर्नाटक में सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने के लिए कांग्रेस सरकार माँग रही रिश्वत

सारांश

भाजपा कर्नाटक अध्यक्ष विजयेंद्र ने रायचूर पदयात्रा के दौरान कांग्रेस सरकार पर सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने के लिए ₹50 लाख तक रिश्वत माँगने का आरोप लगाया। साथ ही ₹52,000 करोड़ के दलित कल्याण कोष के दुरुपयोग और ₹187 करोड़ के वाल्मीकि निगम घोटाले का भी जिक्र किया।

मुख्य बातें

BJP कर्नाटक अध्यक्ष बी.वाई.
विजयेंद्र ने 2 सितंबर को रायचूर में कांग्रेस सरकार पर सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने के लिए ₹10 लाख से ₹50 लाख तक रिश्वत माँगने का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि SCSP और TSP के तहत आवंटित ₹52,000 करोड़ अन्य विभागों में स्थानांतरित कर दिए गए, जिससे दलित कल्याण प्रभावित हुआ।
कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से कथित तौर पर ₹187 करोड़ की हेराफेरी का आरोप लगाया गया।
विजयेंद्र के साथ पूर्व मंत्री बी.
श्रीरामुलु और विधायक राजू गौड़ा भी पदयात्रा में शामिल थे।
कांग्रेस नेता के.एन.
राजन्ना के इस्तीफे का हवाला देते हुए दलितों के प्रति सरकार की नीयत पर सवाल उठाए गए।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने 2 सितंबर को रायचूर में आरोप लगाया कि राज्य की कांग्रेस सरकार सूखा प्रभावित क्षेत्रों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित करने के एवज में किसानों से रिश्वत माँग रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने किसानों, दलितों, युवाओं और गरीबों की व्यापक उपेक्षा की है।

पदयात्रा के दौरान निरीक्षण और आरोप

विजयेंद्र भाजपा की चल रही पदयात्रा के दूसरे दिन रायचूर जिले के बेदार कार्लुकुंटी रोड पर सूखे की स्थिति और बाजरे की फसलों का जायजा लेने के लिए रुके। इस दौरान उनके साथ पूर्व मंत्री बी. श्रीरामुलु और विधायक राजू गौड़ा भी मौजूद थे।

मस्की में संबोधन करते हुए विजयेंद्र ने दावा किया कि यह क्षेत्र गंभीर सूखे की चपेट में है, लेकिन अभी तक इसे सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया, 'इस कांग्रेस सरकार में रिश्वत दिए बिना कोई काम नहीं होता। अगर मस्की के किसान ₹10 लाख या ₹50 लाख रिश्वत के तौर पर देते हैं तो मुख्यमंत्री इस क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित कर सकते हैं।'

एससीएसपी और टीएसपी फंड पर गंभीर आरोप

विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) और जनजातीय उप-योजना (TSP) के तहत आवंटित ₹52,000 करोड़ अन्य विभागों में स्थानांतरित कर दिए गए हैं। उनके अनुसार इससे दलितों को आवास, शिक्षा और अन्य कल्याणकारी सुविधाओं से वंचित होना पड़ा है।

उन्होंने कहा, 'युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर पैदा किए जा सकते थे। दलितों के लिए घर बनाए जा सकते थे। इस पैसे का इस्तेमाल शिक्षा को मज़बूत करने और गरीब लोगों के घर-घर तक पीने का पानी पहुँचाने के लिए किया जा सकता था। इसके बजाय, धनराशि को अन्य विभागों में भेज दिया गया।'

वाल्मीकि निगम घोटाले का संदर्भ

विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से कथित तौर पर ₹187 करोड़ की हेराफेरी की गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने इसी भ्रष्ट मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर पदयात्रा शुरू की थी।

उन्होंने दावा किया, 'हमारी पदयात्रा की घोषणा से मुख्यमंत्री में दहशत फैल गई है। आशंका है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है, इसीलिए मंत्री को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।'

राजन्ना प्रसंग और दलित राजनीति पर सवाल

विजयेंद्र ने पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता के.एन. राजन्ना के इस्तीफे का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अनुसूचित जनजाति समुदाय से संबंध रखने वाले राजन्ना ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ बात की, तो क्या उन्हें 24 घंटे के भीतर इस्तीफा देने पर मजबूर नहीं किया गया? उन्होंने इसे दलितों के प्रति कांग्रेस की 'असली मानसिकता' बताया।

भाजपा का दावा और आगे की राह

विजयेंद्र ने कांग्रेस सरकार को 'दलित विरोधी, गरीब विरोधी और किसान विरोधी' करार देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के कार्यकाल में शुरू की गई भाग्यलक्ष्मी योजना, 108 एम्बुलेंस सेवाओं और दलित बस्तियों में पक्की सड़कों जैसी कल्याणकारी पहलों की याद दिलाई। उन्होंने जनता से कांग्रेस को सत्ता से हटाने के लिए सक्रिय होने की अपील की। यह देखना अब महत्वपूर्ण होगा कि कर्नाटक सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और सूखाग्रस्त क्षेत्रों की घोषणा को लेकर प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ के दलित कोष के कथित दुरुपयोग और ₹187 करोड़ के वाल्मीकि निगम घोटाले जैसे ठोस आँकड़े इन्हें राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाते हैं। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है और कांग्रेस सरकार की ओर से कोई आधिकारिक खंडन सामने नहीं आया है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सत्ता-विरोधी लहर को भाँपकर भाजपा जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ा रही है। असली सवाल यह है कि क्या ये पदयात्राएँ केवल राजनीतिक दबाव की रणनीति हैं, या इनके पीछे ऐसे दस्तावेज़ी साक्ष्य हैं जो न्यायिक या विधायी जाँच की माँग करते हों।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विजयेंद्र ने कर्नाटक कांग्रेस सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
भाजपा कर्नाटक अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस सरकार सूखा प्रभावित क्षेत्रों को आधिकारिक रूप से सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए किसानों से ₹10 लाख से ₹50 लाख तक रिश्वत माँग रही है। उन्होंने यह भी कहा कि दलित कल्याण के लिए आवंटित ₹52,000 करोड़ अन्य विभागों में भेज दिए गए हैं।
वाल्मीकि निगम घोटाला क्या है जिसका विजयेंद्र ने जिक्र किया?
विजयेंद्र के अनुसार, कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम से कथित तौर पर ₹187 करोड़ की हेराफेरी की गई है। भाजपा ने इसी मुद्दे पर जिम्मेदार मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए पदयात्रा शुरू की थी।
SCSP और TSP फंड क्या होते हैं और इन पर विवाद क्यों है?
अनुसूचित जाति उप-योजना (SCSP) और जनजातीय उप-योजना (TSP) विशेष रूप से दलितों और आदिवासियों के कल्याण के लिए आवंटित सरकारी कोष हैं। विजयेंद्र का आरोप है कि कर्नाटक कांग्रेस सरकार ने इन मदों के ₹52,000 करोड़ अन्य विभागों में स्थानांतरित कर दिए, जिससे आवास, शिक्षा और पेयजल जैसी सुविधाएँ प्रभावित हुईं।
भाजपा की यह पदयात्रा कहाँ और क्यों हो रही है?
भाजपा की यह पदयात्रा रायचूर जिले में चल रही है और इसका उद्देश्य कर्नाटक कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार, दलित उपेक्षा और किसान-विरोधी नीतियों को लेकर जनता का ध्यान आकर्षित करना है। पदयात्रा के दूसरे दिन मस्की में विजयेंद्र ने सूखे की स्थिति का निरीक्षण भी किया।
के.एन. राजन्ना का इस्तीफा इस विवाद से कैसे जुड़ा है?
विजयेंद्र ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री के.एन. राजन्ना के इस्तीफे का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जब अनुसूचित जनजाति समुदाय के राजन्ना ने राहुल गांधी के खिलाफ बात की तो उन्हें 24 घंटे में इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया। उन्होंने इसे दलितों के प्रति कांग्रेस के दोहरे रवैये का उदाहरण बताया।
राष्ट्र प्रेस
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