कर्नाटक विधानसभा: कांग्रेस विधायकों का भाजपा के खिलाफ प्रदर्शन, नागेंद्र घोटाले पर तीखी बहस
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा के बाहर 21 अगस्त 2026 को कांग्रेस विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने भाजपा पर सदन की कार्यवाही जानबूझकर बाधित करने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने राज्य के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र पर जनजातीय कल्याण निधि से जुड़े कथित ₹184 करोड़ के घोटाले में संलिप्तता का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की माँग की है।
मुख्य घटनाक्रम
विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस विधायक विधानसभा भवन के समक्ष स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास एकत्रित हुए और प्लेकार्ड लेकर भाजपा के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन में स्वयं मंत्री बी. नागेंद्र भी शामिल हुए। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सूखा राहत और जनहित के मुद्दों पर सदन में चर्चा से जानबूझकर बच रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया
कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं विधायक बीके हरिप्रसाद ने कहा, 'राज्य में स्थिति गंभीर बनी हुई है। सूखे को देखते हुए राहत एवं बचाव कार्य 18 जिलों में जारी है। लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है। भाजपा इन मुद्दों पर सदन में चर्चा के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है।' हरिप्रसाद ने बताया कि मुख्यमंत्री पहले ही सभी दलों के सांसदों से मुलाकात कर सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए केंद्र से ₹10,000 करोड़ की राशि जारी कराने का आग्रह कर चुके हैं।
हरिप्रसाद ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा, 'विपक्षी दल चर्चा से इसलिए डर रहा है क्योंकि उसे केंद्र की आलोचना होने का भय है। हम मंत्री नागेंद्र के खिलाफ हर आरोप का जवाब देने के लिए तैयार हैं और यह सब एक ही दिन में स्पष्ट हो जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि अगर भाजपा इस्तीफे की माँग करती है, तो उसे पहले केंद्रीय मंत्रियों पर लगे आरोपों का जवाब देना चाहिए।
मंत्री नागेंद्र का पक्ष
मंत्री बी. नागेंद्र ने भाजपा के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि SIT ने जाँच के बाद उन्हें इस मामले में क्लीनचिट दे दी है। नागेंद्र ने आरोप लगाया कि भाजपा यह स्वीकार नहीं कर पा रही कि एक दलित नेता मंत्री पद पर आसीन है और इसीलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
राज्य मंत्री प्रियांक खड़गे ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'भाजपा नेता इस्तीफा माँगने वाले कौन होते हैं? क्या वे सर्वोच्च न्यायालय हैं या लोकायुक्त? अगर यही मापदंड है, तो उन्हें पहले असम के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के उन मंत्रियों का इस्तीफा माँगना चाहिए जो गंभीर आरोपों का सामना कर रहे हैं।'
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के 18 जिले गंभीर सूखे की चपेट में हैं और राहत कार्यों के लिए केंद्र से वित्तीय सहायता की प्रतीक्षा है। विधानसभा में गतिरोध जारी रहने से सूखा राहत, पेयजल संकट और जनजातीय कल्याण जैसे अहम मुद्दों पर बहस रुकी हुई है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है।
क्या होगा आगे
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह 27 अगस्त तक सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के पक्ष में है। हरिप्रसाद ने कहा कि अंततः जनता यह तय करेगी कि भाजपा जनविरोधी है या नहीं। इस बीच, जनजातीय कल्याण घोटाले की SIT जाँच जारी है और इसके निष्कर्ष विधानसभा की आगामी कार्यवाही को प्रभावित कर सकते हैं।