नागेंद्र की बर्खास्तगी की मांग पर भाजपा-जेडीएस एकजुट, कर्नाटक विधानसभा सत्र में संयुक्त आंदोलन का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में कथित आदिवासी कल्याण घोटाले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) (JDS) ने 18 अगस्त 2026 को संयुक्त मोर्चा खोलते हुए मंत्री बी. नागेंद्र को मंत्रिमंडल से तत्काल हटाने की मांग को और तेज कर दिया। दोनों विपक्षी दलों ने ऐलान किया कि नागेंद्र की बर्खास्तगी और कथित घोटाले की ₹184 करोड़ की राशि राज्य के खजाने में वापस आने तक उनका आंदोलन नहीं रुकेगा।
विपक्ष का रुख और मुख्य माँगें
विधान सौध में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, 'यह कर्नाटक की भ्रष्ट सरकार है। जब तक इस भ्रष्ट सरकार को हटाया नहीं जाता, हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हम मंत्री नागेंद्र को बर्खास्त किए जाने और ₹184 करोड़ राज्य के खजाने में वापस लाए जाने तक आंदोलन जारी रखेंगे।'
अशोक ने यह भी सवाल उठाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में मामले दर्ज होने और चार्जशीट में नाम होने के बावजूद नागेंद्र को मंत्रिमंडल में क्यों बनाए रखा गया है।
जेडीएस का समर्थन और संयुक्त रणनीति
जेडीएस विधायक और पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पुत्र एच.डी. रेवन्ना ने कहा कि दोनों दलों ने सरकार के खिलाफ एकजुट होकर मोर्चा खोलने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा, 'हमने संयुक्त आंदोलन करने को लेकर चर्चा की है। भाजपा नेताओं ने विरोध को लेकर जो बात कही है, हम उससे सहमत हैं। हम बैठक करेंगे और सरकार का एकजुट होकर विरोध करने की रणनीति तय करेंगे।'
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की माँगें
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने विधानसभा के मौजूदा सत्र में सूखे की स्थिति, कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में कथित अनियमितताओं, नाईस टाउनशिप और बिदादी परियोजना सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा की मांग रखी। उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से 'हठ छोड़ने' और बिना किसी अतिरिक्त बहस की प्रतीक्षा किए नागेंद्र को तत्काल मंत्रिमंडल से हटाने की अपील की।
विजयेंद्र ने याद दिलाया कि जब सिद्धारमैया मुख्यमंत्री थे, तब भी विधानसभा में चर्चा के बाद नागेंद्र को पद से हटाया गया था, इसलिए अब नए सिरे से बहस की कोई आवश्यकता नहीं है।
कथित घोटाले की पृष्ठभूमि
कर्नाटक का यह कथित आदिवासी कल्याण घोटाला राज्य संचालित कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम लिमिटेड से जुड़ा है। आरोप है कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के कल्याण के लिए आवंटित ₹89 से ₹94 करोड़ की राशि फर्जी खातों और शेल संस्थाओं के माध्यम से अन्यत्र भेजी गई। एक नए खोले गए बैंक खाते में कुल ₹187 करोड़ जमा किए गए थे।
यह मामला मई 2024 में तब सुर्खियों में आया जब निगम के एक लेखा अधीक्षक ने आत्महत्या कर ली और उनके सुसाइड नोट में अनधिकृत एवं अवैध फंड ट्रांसफर का उल्लेख था। इसके बाद पड़ोसी राज्यों के खातों में कथित तौर पर रकम भेजे जाने की जानकारी सामने आने पर तत्कालीन आदिवासी कल्याण मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आगे की स्थिति
ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच करते हुए नेताओं और उनके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। ED की अभियोजन शिकायत में पूर्व मंत्री बी. नागेंद्र को कथित तौर पर मुख्य आरोपी और मामले का मास्टरमाइंड बताया गया है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक विधानसभा का सत्र चल रहा है और दोनों विपक्षी दल सदन के भीतर और बाहर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में भाजपा-जेडीएस की संयुक्त बैठक में आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।