वाल्मीकि निगम घोटाला: नागेंद्र का इस्तीफा जनदबाव की जीत, BJP बोली — जांच अभी बाकी है
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने 28 अगस्त को स्पष्ट किया कि मंत्री बी. नागेंद्र का मंत्रिमंडल से इस्तीफा कथित वाल्मीकि जनजातीय कल्याण निगम घोटाले के विरुद्ध भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) (JD-S) द्वारा चलाए गए आंदोलन और जनता के लगातार बढ़ते दबाव का सीधा परिणाम है। अशोक ने कहा कि यह इस्तीफा मामले का अंत नहीं, बल्कि जांच की असली शुरुआत है।
मुख्य घटनाक्रम
कर्नाटक के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री बी. नागेंद्र ने 28 अगस्त को मंत्रिमंडल से इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने कहा कि कथित वाल्मीकि जनजातीय कल्याण निगम घोटाले को लेकर कांग्रेस पार्टी और उसके नेतृत्व को असहज स्थिति का सामना न करना पड़े, इसीलिए उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया। विपक्ष के अनुसार, अनुसूचित जनजातियों के कल्याण के लिए निर्धारित ₹187 करोड़ के कथित दुरुपयोग को लेकर यह मामला सामने आया था।
सरकार पर विपक्ष के आरोप
आर. अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार शुरू से ही नागेंद्र को जवाबदेही से बचाने की कोशिश करती रही। उन्होंने कहा, 'जब BJP और JD-S ने जवाब मांगा तो कांग्रेस सरकार ने क्या किया? हमने सवाल उठाए, लेकिन सरकार सदन से भाग गई। हमने जवाब मांगे, लेकिन विधानसभा का सत्र छोटा कर दिया गया। हमने सच्चाई सामने रखी, लेकिन सरकार ने आरोपियों को बचाने के लिए पूरे सरकारी तंत्र को ढाल बना लिया।'
अशोक ने यह भी दावा किया कि BJP की राज्यव्यापी पदयात्रा की घोषणा के बाद कांग्रेस सरकार घबरा गई और अंततः मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर सकती है, लेकिन सच्चाई को दबा नहीं सकती।
कांग्रेस पर सामाजिक न्याय को लेकर हमला
भाजपा नेता ने कांग्रेस पर डॉ. भीमराव आंबेडकर और सामाजिक न्याय के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा, 'जो पार्टी बाबा साहेब आंबेडकर का नाम लेने का कोई मौका नहीं छोड़ती, उसके लिए यह एक बड़ा सवाल है। आप खुद को वंचितों के साथ खड़ा बताएं और उनके कल्याण के लिए आवंटित धन के कथित दुरुपयोग को नजरअंदाज करें — यह स्वीकार्य नहीं है।'
विपक्ष के अनुत्तरित सवाल
अशोक ने कथित जनजातीय कल्याण निधि दुरुपयोग को लेकर कई सवाल उठाए — कथित घोटाले का मास्टरमाइंड कौन है, धनराशि के हस्तांतरण की अनुमति किसने दी, आदेश किस कार्यालय से जारी हुआ और कथित रूप से धन का लाभ आखिरकार किसे मिला। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या किसी ने जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश की।
अशोक ने मांग की कि धनराशि के पूरे लेनदेन की जानकारी सार्वजनिक की जाए और सभी जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए। उन्होंने कहा, 'हर सवाल का जवाब मिलना चाहिए। सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग में शामिल हर व्यक्ति को कानून का सामना करना चाहिए।'
आगे क्या होगा
BJP नेता ने स्पष्ट किया कि केवल एक मंत्री का इस्तीफा कांग्रेस सरकार की जिम्मेदारी को खत्म नहीं करता। उन्होंने कहा, 'नागेंद्र का इस्तीफा इस मामले का अंत नहीं है, बल्कि जांच की शुरुआत है।' BJP ने घोषणा की है कि वह तब तक संघर्ष जारी रखेगी जब तक कथित घोटाले की पूरी सच्चाई सामने नहीं आ जाती और जनता को सभी सवालों के जवाब नहीं मिल जाते। यह राजनीतिक टकराव बेंगलुरु से आगे पूरे कर्नाटक में गूंजने की संभावना है।