वाल्मीकि निगम घोटाला: मंत्री नागेंद्र का इस्तीफा तय — कर्नाटक BJP नेता आर. अशोक
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने 27 अगस्त को बेंगलुरु में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि वाल्मीकि विकास निगम में कथित अनियमितताओं के आरोपी मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा अब निश्चित है। अशोक ने आरोप लगाया कि दलित समुदाय के लिए निर्धारित धनराशि की लूट में सत्तारूढ़ दल का 'हाई कमांड' मास्टरमाइंड है।
मुख्य आरोप और BJP की माँगें
अशोक ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सदन में लगातार मंत्री नागेंद्र के खिलाफ संघर्ष किया है। उन्होंने कहा, 'जब दलितों का पैसा लूटा गया, तब उन्हें याद नहीं था कि वे दलित हैं — अब वे जातिगत संरक्षण माँग रहे हैं।' पार्टी ने राज्यपाल को एक याचिका सौंपकर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जाँच कराने की माँग की है।
अशोक ने प्रश्न उठाया कि यदि कोई घोटाला नहीं हुआ, तो चंद्रशेखर को आत्महत्या क्यों करनी पड़ी — और सरकार को इस पर स्पष्टीकरण देना होगा। उन्होंने यह भी माँग की कि सरकार बताए कि नागेंद्र को मंत्रिमंडल में वापस क्यों लिया गया।
एक सप्ताह की चेतावनी
अशोक ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर मंत्री नागेंद्र के इस्तीफे पर कोई निर्णय नहीं हुआ, तो BJP मुख्यमंत्री के आवास का घेराव करेगी। उन्होंने कहा कि दलितों का पैसा हड़पने वाले व्यक्ति को मंत्रिमंडल में कोई स्थान नहीं होना चाहिए और पार्टी का यह संघर्ष अवश्य फलदायी होगा।
सूखे पर सरकार की आलोचना
अशोक ने कर्नाटक सरकार पर सूखे की घोषणा को 'महज औपचारिकता' बताते हुए निशाना साधा। उन्होंने कहा कि स्थिति बिगड़ने के बाद चार महीने के लिए सूखा घोषित करना 'किले के लूटे जाने के बाद द्वार बंद करने' जैसा है। उनके अनुसार, 175 तालुकों में सूखा घोषित होना चाहिए था, जबकि अभी केवल 89 तालुकों में गंभीर और 12 तालुकों में मध्यम सूखा घोषित हुआ है।
उन्होंने बताया कि प्रति तालुका केवल ₹1 करोड़ ही आवंटित किया गया है और ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजे की BJP की माँग पर अभी तक विचार नहीं किया गया। अशोक ने कहा कि उन्होंने मांड्या और मैसूरु सहित कई प्रभावित क्षेत्रों का स्वयं दौरा किया है।
अन्य मुद्दे: RSS पंजीकरण और शहरी समस्याएँ
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के RSS पंजीकरण संबंधी बयान पर अशोक ने पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि गणेश संघों और ईसाई संघों को पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती, जबकि केवल RSS के लिए यह अनिवार्य बताया जा रहा है — जो उनके अनुसार 'खड़गे का अपना संविधान' है, बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का नहीं।
अशोक ने बिदादी टाउनशिप परियोजना और NICE जैसे मुद्दों पर भी संघर्ष जारी रखने की घोषणा की, जिन्हें विधानसभा के अगले सत्र में उठाया जाएगा। उन्होंने 'कचरा मुक्ति' अभियान की विफलता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू न किए जाने पर भी सरकार की आलोचना की।
आगे क्या होगा
BJP ने स्पष्ट कर दिया है कि वाल्मीकि निगम घोटाले पर दबाव बनाए रखा जाएगा। एक सप्ताह की समयसीमा के बाद मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी और राज्यपाल को सौंपी गई CBI-ED जाँच की याचिका — दोनों मिलकर कर्नाटक की राजनीति में आने वाले दिनों में तनाव बढ़ा सकते हैं।