27 अगस्त 2026
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रक्षाबंधन पर MRM का संदेश: डॉ. इंद्रेश कुमार को मुस्लिम बहनों ने बांधी राखी, तिरंगा यात्रा से जोड़ा एकता का सूत्र

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रक्षाबंधन पर MRM का संदेश: डॉ. इंद्रेश कुमार को मुस्लिम बहनों ने बांधी राखी, तिरंगा यात्रा से जोड़ा एकता का सूत्र

सारांश

रक्षाबंधन पर नई दिल्ली में MRM के आयोजन में मुस्लिम बहनों ने डॉ. इंद्रेश कुमार को राखी बांधी और महिलाओं ने तिरंगा यात्रा निकाली। छह समुदायों की भागीदारी वाले इस कार्यक्रम ने जेनजी से लेकर हर भारतीय को प्रेम, संवाद और राष्ट्रीय जिम्मेदारी का संदेश दिया।

मुख्य बातें

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) ने 27 अगस्त 2026 को गालिब ऑडिटोरियम, नई दिल्ली में अंतर-सामुदायिक रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया।
मुस्लिम बहनों ने डॉ.
इंद्रेश कुमार की कलाई पर राखी बांधी; कार्यक्रम में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन — छह समुदायों ने भाग लिया।
इंद्रेश कुमार ने शांति, सामाजिक सद्भाव और 'विविधता में एकता' पर जोर देते हुए जेनजी और जेन अल्फा से डिजिटल मंच का जिम्मेदार उपयोग करने का आह्वान किया।
शालिनी अली ने महिला शिक्षा, आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्वतंत्रता को राष्ट्र निर्माण के लिए अनिवार्य बताया।
कार्यक्रम के बाद महिलाओं ने तिरंगा यात्रा निकाली, जिसने राष्ट्रीय ध्वज को सर्व-समावेशी साझा पहचान के प्रतीक के रूप में स्थापित किया।

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) ने 27 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के ऐवान-ए-गालिब स्थित गालिब ऑडिटोरियम में रक्षाबंधन का एक अंतर-सामुदायिक आयोजन किया, जिसमें मुस्लिम बहनों ने डॉ. इंद्रेश कुमार की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। कार्यक्रम के बाद महिलाओं ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर तिरंगा यात्रा में भाग लिया, जो विविध पहचानों के बीच साझा राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बनी।

कार्यक्रम का स्वरूप और भागीदारी

आयोजन में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन — छह समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। मोहम्मद अफजल, गिरीश जुयाल, डॉ. शालिनी अली, हाफिज साबरीन, इमरान चौधरी, अनिल गर्ग, फैज खान, फैज अहमद फैज और शाकिर अली सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। MRM के राष्ट्रीय संयोजकों की टीम, दिल्ली प्रदेश के संयोजक, सह-संयोजक और विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारी भी मौजूद थे।

मुस्लिम बहनों द्वारा डॉ. इंद्रेश कुमार की कलाई पर राखी बांधने की रस्म को आयोजकों ने केवल एक परंपरागत अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्वास, स्नेह और भाईचारे का सार्वजनिक प्रतीक बताया।

डॉ. इंद्रेश कुमार का संदेश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. इंद्रेश कुमार ने शांति, सामाजिक सद्भाव और 'विविधता में एकता' पर जोर दिया। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे मतभेदों से ऊपर उठकर एक-दूसरे का सम्मान करें और ऐसे भारत के निर्माण में योगदान दें जहाँ अलग-अलग धर्म, भाषाएँ, संस्कृतियाँ और परंपराएँ विभाजन का नहीं, बल्कि देश की ताकत का कारण बनें।

उनके संबोधन में रक्षाबंधन को केवल पारिवारिक त्योहार के दायरे से बाहर निकालकर सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखने की बात प्रमुख रही। यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर विभाजनकारी सामग्री और ट्रोलिंग की चुनौतियाँ युवा पीढ़ी के सामने लगातार बढ़ रही हैं।

युवा पीढ़ी और डिजिटल जिम्मेदारी

डॉ. इंद्रेश कुमार का संदेश विशेष रूप से जेन अल्फा और जेनजी को संबोधित था — वे पीढ़ियाँ जिनका जीवन डिजिटल दुनिया से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया एक ही समय में नफरत और संवाद, दोनों का माध्यम बन सकता है; चुनाव युवाओं के हाथ में है।

गौरतलब है कि आज एक संदेश कुछ ही सेकंड में लाखों लोगों तक पहुँच सकता है। ऐसे में युवाओं की जिम्मेदारी केवल तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं, बल्कि उसके उद्देश्य को तय करने की भी है। कार्यक्रम का स्पष्ट आग्रह था कि डिजिटल मंच का उपयोग भाईचारे और संवाद को मजबूत करने के लिए हो।

महिला सशक्तिकरण और तिरंगा यात्रा

डॉ. शालिनी अली ने महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भूमिका केवल परिवार तक सीमित नहीं है — जब महिलाएँ शिक्षित, आत्मनिर्भर और निर्णय लेने में सक्षम होती हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव परिवार से लेकर समाज और राष्ट्र तक दिखाई देता है।

रक्षाबंधन कार्यक्रम के बाद निकली तिरंगा यात्रा में महिलाओं ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर उत्साहपूर्वक भाग लिया। यात्रा ने यह संदेश दिया कि राष्ट्र निर्माण किसी एक वर्ग, धर्म या समुदाय की जिम्मेदारी नहीं — देश की प्रगति में हर भारतीय की समान भागीदारी है।

आयोजन का व्यापक निहितार्थ

कार्यक्रम का समापन शांति, सामाजिक सद्भाव, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकता के संकल्प के साथ हुआ। एक ओर कलाई पर बंधा रक्षा सूत्र विश्वास और भाईचारे का प्रतीक था, तो दूसरी ओर हाथों में लहराता तिरंगा साझा भारतीय पहचान की याद दिलाता रहा।

आयोजकों के अनुसार, भारत में त्योहार सदियों से केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम भी बने हैं। इस आयोजन ने रक्षाबंधन को उसी व्यापक भावना से जोड़ने का प्रयास किया — राखी, महिला सशक्तिकरण और तिरंगे को एक साथ पिरोकर सामाजिक सद्भाव की एक समग्र तस्वीर पेश की।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु इसके लिए संरचनात्मक प्रयास — पाठ्यक्रम, नीति और संस्थागत समर्थन — की भी दरकार है, जिसका इस आयोजन में उल्लेख नहीं हुआ।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) का रक्षाबंधन कार्यक्रम कहाँ और कब हुआ?
यह कार्यक्रम 27 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के ऐवान-ए-गालिब स्थित गालिब ऑडिटोरियम में आयोजित हुआ। इसमें छह समुदायों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में डॉ. इंद्रेश कुमार को राखी किसने बांधी?
कार्यक्रम में मुस्लिम बहनों ने डॉ. इंद्रेश कुमार की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। आयोजकों ने इसे विश्वास, स्नेह और सामुदायिक भाईचारे का प्रतीक बताया।
तिरंगा यात्रा का क्या उद्देश्य था?
रक्षाबंधन कार्यक्रम के बाद निकाली गई तिरंगा यात्रा में महिलाओं ने राष्ट्रीय ध्वज लेकर भाग लिया। यात्रा का संदेश था कि राष्ट्र निर्माण में हर धर्म, वर्ग और समुदाय की समान भागीदारी है और तिरंगा सभी भारतीयों की साझा पहचान है।
डॉ. इंद्रेश कुमार ने जेनजी और जेन अल्फा को क्या संदेश दिया?
डॉ. इंद्रेश कुमार ने युवा पीढ़ी से आग्रह किया कि वे डिजिटल मंच का उपयोग नफरत और विभाजन के बजाय संवाद, सहयोग और भाईचारे को मजबूत करने के लिए करें। उन्होंने कहा कि अलग विचार रखने वाले को सुनना और सम्मान देना बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण पर क्या कहा गया?
डॉ. शालिनी अली ने महिलाओं की शिक्षा, आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता को उनके मजबूत भविष्य के लिए जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि जब महिलाएँ आत्मनिर्भर और निर्णय लेने में सक्षम होती हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव परिवार से लेकर समाज और राष्ट्र तक दिखाई देता है।
राष्ट्र प्रेस
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