रक्षाबंधन पर MRM का संदेश: डॉ. इंद्रेश कुमार को मुस्लिम बहनों ने बांधी राखी, तिरंगा यात्रा से जोड़ा एकता का सूत्र
सारांश
मुख्य बातें
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) ने 27 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के ऐवान-ए-गालिब स्थित गालिब ऑडिटोरियम में रक्षाबंधन का एक अंतर-सामुदायिक आयोजन किया, जिसमें मुस्लिम बहनों ने डॉ. इंद्रेश कुमार की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। कार्यक्रम के बाद महिलाओं ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर तिरंगा यात्रा में भाग लिया, जो विविध पहचानों के बीच साझा राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बनी।
कार्यक्रम का स्वरूप और भागीदारी
आयोजन में हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन — छह समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। मोहम्मद अफजल, गिरीश जुयाल, डॉ. शालिनी अली, हाफिज साबरीन, इमरान चौधरी, अनिल गर्ग, फैज खान, फैज अहमद फैज और शाकिर अली सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। MRM के राष्ट्रीय संयोजकों की टीम, दिल्ली प्रदेश के संयोजक, सह-संयोजक और विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारी भी मौजूद थे।
मुस्लिम बहनों द्वारा डॉ. इंद्रेश कुमार की कलाई पर राखी बांधने की रस्म को आयोजकों ने केवल एक परंपरागत अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्वास, स्नेह और भाईचारे का सार्वजनिक प्रतीक बताया।
डॉ. इंद्रेश कुमार का संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. इंद्रेश कुमार ने शांति, सामाजिक सद्भाव और 'विविधता में एकता' पर जोर दिया। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे मतभेदों से ऊपर उठकर एक-दूसरे का सम्मान करें और ऐसे भारत के निर्माण में योगदान दें जहाँ अलग-अलग धर्म, भाषाएँ, संस्कृतियाँ और परंपराएँ विभाजन का नहीं, बल्कि देश की ताकत का कारण बनें।
उनके संबोधन में रक्षाबंधन को केवल पारिवारिक त्योहार के दायरे से बाहर निकालकर सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के अवसर के रूप में देखने की बात प्रमुख रही। यह ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर विभाजनकारी सामग्री और ट्रोलिंग की चुनौतियाँ युवा पीढ़ी के सामने लगातार बढ़ रही हैं।
युवा पीढ़ी और डिजिटल जिम्मेदारी
डॉ. इंद्रेश कुमार का संदेश विशेष रूप से जेन अल्फा और जेनजी को संबोधित था — वे पीढ़ियाँ जिनका जीवन डिजिटल दुनिया से गहराई से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया एक ही समय में नफरत और संवाद, दोनों का माध्यम बन सकता है; चुनाव युवाओं के हाथ में है।
गौरतलब है कि आज एक संदेश कुछ ही सेकंड में लाखों लोगों तक पहुँच सकता है। ऐसे में युवाओं की जिम्मेदारी केवल तकनीक अपनाने तक सीमित नहीं, बल्कि उसके उद्देश्य को तय करने की भी है। कार्यक्रम का स्पष्ट आग्रह था कि डिजिटल मंच का उपयोग भाईचारे और संवाद को मजबूत करने के लिए हो।
महिला सशक्तिकरण और तिरंगा यात्रा
डॉ. शालिनी अली ने महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भूमिका केवल परिवार तक सीमित नहीं है — जब महिलाएँ शिक्षित, आत्मनिर्भर और निर्णय लेने में सक्षम होती हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव परिवार से लेकर समाज और राष्ट्र तक दिखाई देता है।
रक्षाबंधन कार्यक्रम के बाद निकली तिरंगा यात्रा में महिलाओं ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर उत्साहपूर्वक भाग लिया। यात्रा ने यह संदेश दिया कि राष्ट्र निर्माण किसी एक वर्ग, धर्म या समुदाय की जिम्मेदारी नहीं — देश की प्रगति में हर भारतीय की समान भागीदारी है।
आयोजन का व्यापक निहितार्थ
कार्यक्रम का समापन शांति, सामाजिक सद्भाव, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय एकता के संकल्प के साथ हुआ। एक ओर कलाई पर बंधा रक्षा सूत्र विश्वास और भाईचारे का प्रतीक था, तो दूसरी ओर हाथों में लहराता तिरंगा साझा भारतीय पहचान की याद दिलाता रहा।
आयोजकों के अनुसार, भारत में त्योहार सदियों से केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक रिश्तों को मजबूत करने का माध्यम भी बने हैं। इस आयोजन ने रक्षाबंधन को उसी व्यापक भावना से जोड़ने का प्रयास किया — राखी, महिला सशक्तिकरण और तिरंगे को एक साथ पिरोकर सामाजिक सद्भाव की एक समग्र तस्वीर पेश की।