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वाटिका लिमिटेड पर ईडी की छापेमारी: दिल्ली-एनसीआर में 7 ठिकाने खंगाले, ₹33 करोड़ की संपत्ति जब्त

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वाटिका लिमिटेड पर ईडी की छापेमारी: दिल्ली-एनसीआर में 7 ठिकाने खंगाले, ₹33 करोड़ की संपत्ति जब्त

सारांश

ईडी ने रियल एस्टेट कंपनी वाटिका लिमिटेड पर शिकंजा कसा — दिल्ली-एनसीआर के 7 ठिकानों पर छापे, ₹33 करोड़ जब्त। आरोप है कि 2010-12 में खरीदारों से ₹260 करोड़ लेकर महज ₹120 करोड़ के प्लॉट दिए गए, 14 साल बाद भी बाकी नहीं मिले।

मुख्य बातें

ईडी ने 25 अगस्त 2026 को वाटिका लिमिटेड के दिल्ली-एनसीआर में 7 ठिकानों पर पीएमएलए के तहत तलाशी अभियान चलाया।
प्रमोटर-डायरेक्टर अनिल भल्ला , गौतम भल्ला और गौरव भल्ला के खिलाफ ईसीआईआर दर्ज।
2010–2012 के बीच पीड़ितों से लगभग ₹260.30 करोड़ लिए गए, केवल ₹120 करोड़ मूल्य के प्लॉट दिए गए।
14 प्लॉट पीड़ितों की सहमति के बिना तीसरे पक्ष को बेचे गए।
3 लग्जरी वाहन , गहने, बैंक खाते और सिक्योरिटीज सहित कुल ₹33 करोड़ की संपत्ति जब्त।
ईडी ने कहा — जाँच जारी है, फंड डायवर्जन की और परतें खंगाली जा रही हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 25 अगस्त 2026 को गुरुग्राम जोनल ऑफिस के नेतृत्व में रियल एस्टेट कंपनी वाटिका लिमिटेड और उसके प्रमोटर-डायरेक्टर से जुड़े दिल्ली-एनसीआर के सात रिहायशी और कमर्शियल ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई इस कार्रवाई में ₹33 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त और फ्रीज की गई हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने वाटिका लिमिटेड के प्रमोटर-डायरेक्टर अनिल भल्ला, गौतम भल्ला और गौरव भल्ला सहित अन्य लोगों के खिलाफ प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की थी। यह ईसीआईआर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज अनेक प्राथमिकियों पर आधारित है, जिनमें धोखाधड़ी से रकम लेने, रिहायशी प्लॉट न देने और अन्य संबंधित अपराधों के आरोप शामिल हैं।

मुख्य आरोप और घोटाले का स्वरूप

जाँच में सामने आया है कि वाटिका इंडिया नेक्स्ट और वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 परियोजनाओं के तहत कंपनी ने रिहायशी प्लॉट के आवंटन और बिक्री के नाम पर शिकायतकर्ताओं से अग्रिम रकम वसूली, लेकिन कई समयसीमाएँ बीत जाने के बाद भी वादे के अनुसार प्लॉट नहीं सौंपे गए।

ईडी के अनुसार, 2010 और 2012 के बीच पीड़ित पक्षों से लगभग ₹260.30 करोड़ की रकम ली गई, जिसके बदले केवल लगभग ₹120 करोड़ मूल्य के प्लॉट दिए गए। 14 साल बाद भी शेष प्लॉट नहीं सौंपे गए। इसके अतिरिक्त, आरोपियों ने पीड़ित पक्षों की सहमति के बिना चुपके से 14 प्लॉट तीसरे पक्ष को बेच दिए।

तलाशी में क्या मिला

छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए। इनमें प्रमोटर-डायरेक्टर से जुड़े संपत्ति दस्तावेज, अंकेक्षित वित्तीय विवरण, टैली डेटा, फंड के हस्तांतरण और डायवर्जन के रिकॉर्ड तथा शिकायतकर्ताओं से प्राप्त धनराशि से संबंधित जानकारी शामिल है।

इसके अलावा तीन लग्जरी वाहन, गहने, बैंक खाते और प्रतिभूतियाँ (सिक्योरिटीज) भी जब्त की गई हैं। इन सभी की कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹33 करोड़ बताई जा रही है। इन्हें पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत जब्त और फ्रीज किया गया है।

ग्रुप कंपनियों की भूमिका

ईडी की जाँच में वाटिका ग्रुप से जुड़ी विभिन्न भूमि-स्वामी और सहयोगी कंपनियों तथा उनके प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका भी उजागर हुई है। जाँच एजेंसी के अनुसार, फंड के दुरुपयोग की परतें अभी और खंगाली जा रही हैं।

आगे क्या होगा

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जाँच जारी है। यह मामला उन हज़ारों घर खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण है जो वर्षों से अपने प्लॉट का इंतजार कर रहे हैं। एजेंसी के अनुसार, जाँच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सुनियोजित वित्तीय कदाचार के संकेत हैं। ईडी की यह कार्रवाई देर से आई, लेकिन यह उन हज़ारों घर खरीदारों के लिए एक संकेत है कि राज्य-तंत्र अंततः हरकत में आ सकता है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाटिका लिमिटेड पर ईडी ने क्यों छापा मारा?
ईडी ने पीएमएलए, 2002 के तहत वाटिका लिमिटेड पर छापा मारा क्योंकि कंपनी पर आरोप है कि उसने रिहायशी प्लॉट के नाम पर खरीदारों से करोड़ों रुपये लिए लेकिन वादे के मुताबिक प्लॉट नहीं दिए। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज कई एफआईआर पर आधारित ईसीआईआर के तहत की गई।
वाटिका लिमिटेड के मामले में कितनी संपत्ति जब्त की गई?
25 अगस्त 2026 को हुई छापेमारी में ईडी ने लगभग ₹33 करोड़ की संपत्ति जब्त और फ्रीज की। इसमें तीन लग्जरी वाहन, गहने, बैंक खाते और प्रतिभूतियाँ शामिल हैं।
वाटिका इंडिया नेक्स्ट प्रोजेक्ट में क्या गड़बड़ी पाई गई?
जाँच के अनुसार, वाटिका इंडिया नेक्स्ट और वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2 परियोजनाओं में 2010–2012 के बीच पीड़ितों से ₹260.30 करोड़ लिए गए, लेकिन केवल ₹120 करोड़ मूल्य के प्लॉट दिए गए। इसके अलावा 14 प्लॉट पीड़ितों की सहमति के बिना तीसरे पक्ष को बेच दिए गए।
वाटिका लिमिटेड के किन लोगों पर कार्रवाई हुई है?
ईडी ने कंपनी के प्रमोटर-डायरेक्टर अनिल भल्ला, गौतम भल्ला और गौरव भल्ला सहित अन्य लोगों के खिलाफ ईसीआईआर दर्ज की है। जाँच में वाटिका ग्रुप की सहयोगी कंपनियों और उनके प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका भी सामने आई है।
वाटिका लिमिटेड मामले में आगे क्या होगा?
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में जाँच जारी है और फंड के दुरुपयोग की और परतें खंगाली जा रही हैं। जाँच के निष्कर्षों के आधार पर पीएमएलए के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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