पूर्वी मेदिनीपुर में पीएम मोदी और सुवेंदु अधिकारी की तस्वीरों वाली राखियों की धूम, रक्षाबंधन से पहले उमड़ी भीड़
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के कांथी बाज़ार में इस वर्ष रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पहले, 27 अगस्त को, एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के चुनाव चिह्न वाली राखियों की माँग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। स्थानीय दुकानदारों के अनुसार, राज्य विधानसभा चुनाव में BJP की जीत के बाद से इन राजनीतिक थीम वाली राखियों के प्रति लोगों का रुझान तेज़ी से बढ़ा है।
बाज़ार में क्या है नज़ारा
कांथी पोस्ट ऑफिस क्रॉसिंग के पास — जो मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के आवास के करीब है — दुकानों में ये राजनीतिक थीम वाली राखियाँ करीने से सजाई गई हैं। शहर के निवासियों के साथ-साथ आसपास की ग्राम पंचायतों और ब्लॉकों से आए खरीदार भी इन्हें बड़े उत्साह से खरीद रहे हैं। खासतौर पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की तस्वीर वाली राखियाँ सबसे अधिक पसंद की जा रही हैं।
दुकानदारों की प्रतिक्रिया
कांथी के दुकानदार बिजन साहू ने बताया कि इस वर्ष नेपाल में अचानक आई बाढ़ और अन्य कारणों से राखियों की कुल बिक्री अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया, 'पीएम मोदी, सीएम सुवेंदु दा, योगी जी और BJP के चुनाव चिह्न वाली राखियों की माँग लगातार बढ़ रही है।' साहू ने यह भी बताया कि इन राखियों की कीमत मात्र ₹10 से ₹20 के बीच है, जो इन्हें आम खरीदारों की पहुँच में रखती है।
एक अन्य दुकानदार मिलन देबनाथ ने भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि राज्य में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद ग्राहक केसरिया रंग-थीम वाली राखियों की अधिक माँग कर रहे हैं।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में BJP की विधानसभा चुनाव में जीत के बाद से राजनीतिक माहौल बदला हुआ है। गौरतलब है कि रक्षाबंधन जैसे सांस्कृतिक और पारिवारिक त्योहारों में राजनीतिक प्रतीकों का इस तरह समाहित होना एक उल्लेखनीय सामाजिक बदलाव को दर्शाता है। पूर्वी मेदिनीपुर जिला, जो सुवेंदु अधिकारी का गृह क्षेत्र भी है, इस प्रवृत्ति का केंद्र बनकर उभरा है।
आम जनता पर असर
दुकानदारों ने बताया कि बिक्री के आँकड़े संतोषजनक रहे हैं। ये राखियाँ केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं — कांथी के आसपास की कई ग्राम पंचायतों और ब्लॉकों से भी खरीदार विशेष रूप से इन्हें खरीदने आ रहे हैं। रंग-बिरंगी और विविध डिज़ाइन वाली ये राखियाँ बाज़ार में आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
आगे की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक थीम वाले उत्पादों की बढ़ती माँग पश्चिम बंगाल में बदलती राजनीतिक पहचान और जन-भावना का प्रतिबिंब है। रक्षाबंधन के बाद भी यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो यह राज्य की चुनावी राजनीति पर दीर्घकालिक प्रभाव का संकेत हो सकती है।