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गुजरात की आंगनबाड़ी बहनों ने भेजीं 4.50 लाख राखियाँ, बॉर्डर के जवानों को रक्षाबंधन पर मिला घर जैसा प्यार

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गुजरात की आंगनबाड़ी बहनों ने भेजीं 4.50 लाख राखियाँ, बॉर्डर के जवानों को रक्षाबंधन पर मिला घर जैसा प्यार

सारांश

गुजरात की आंगनबाड़ी बहनों ने रक्षाबंधन पर सीमा के जवानों को 4.50 लाख राखियाँ भेजकर त्योहार को देशभक्ति से जोड़ा। तीन साल से जारी इस अभियान में BSF, CRPF और NDRF के जवानों ने रक्षा सूत्र स्वीकार किए — परिवार से दूर रहे सैनिकों के लिए घर जैसी ऊष्मा।

मुख्य बातें

गुजरात की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने रक्षाबंधन पर बॉर्डर के जवानों को 4.50 लाख से अधिक राखियाँ भेजीं।
'एक राखी देश के जवानों के नाम' अभियान पिछले तीन वर्षों से गुजरात में चल रहा है।
उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और महिला एवं बाल कल्याण मंत्री डॉ.
मनीषाबेन वकील की उपस्थिति में गांधीनगर में समारोह आयोजित हुआ।
BSF , CRPF , सेना और NDRF के जवानों ने रक्षा सूत्र स्वीकार किए।
आंगनबाड़ी बहनों ने राखियाँ महिला एवं बाल कल्याण मंत्री डॉ.
मनीषाबेन वकील के मार्गदर्शन में तैयार कीं।

गुजरात की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने रक्षाबंधन के पावन अवसर पर 'एक राखी देश के जवानों के नाम' अभियान के तहत सीमा पर तैनात सैनिकों को 4.50 लाख से अधिक राखियाँ भेजकर देशभक्ति और भाई-बहन के स्नेह का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। गांधीनगर में आयोजित एक विशेष समारोह में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और महिला एवं बाल कल्याण मंत्री डॉ. मनीषाबेन वकील की उपस्थिति में सीमा पर तैनात सैनिकों के अधिकारियों को प्रतीक स्वरूप रक्षा सूत्र कलश भेंट किए गए।

अभियान की पृष्ठभूमि

गुजरात सरकार पिछले तीन वर्षों से इस अभियान को निरंतर चला रही है, जिसका उद्देश्य सीमा पर अपने परिवारों से दूर रहकर मातृभूमि की रक्षा करने वाले जवानों को यह अहसास दिलाना है कि राज्य की माताएँ और बहनें उनके साथ हैं। महिला एवं बाल कल्याण मंत्री डॉ. मनीषाबेन वकील के मार्गदर्शन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने ये राखियाँ तैयार कर सैनिकों तक पहुँचाईं।

किसे मिलीं राखियाँ

ये रक्षा सूत्र सेना, बीएसएफ (BSF), सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों द्वारा धारण किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के जवानों ने भी इन राखियों को स्वीकार किया। यह पहल उन सैनिकों के लिए विशेष रूप से भावनात्मक महत्व रखती है, जो त्योहार के दिन अपने घर-परिवार से दूर देश की सेवा में तत्पर रहते हैं।

समारोह में उपस्थित प्रमुख अधिकारी

इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास सचिव राकेश शंकर, महिला एवं बाल विकास आयुक्त डॉ. रणजीत कुमार सिंह, विभाग के वरिष्ठ अधिकारीगण, बीएसएफ, सीआरपीएफ और एनडीआरएफ के जवान तथा बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएँ उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की उपस्थिति ने इस पहल को राज्य सरकार का पूर्ण समर्थन प्रदर्शित किया।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

यह अभियान रक्षाबंधन के पारंपरिक त्योहार को एक व्यापक राष्ट्रीय भावना से जोड़ता है। आंगनबाड़ी बहनों द्वारा बनाई गई ये राखियाँ केवल धागे नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की ओर से उन जवानों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक हैं, जो दिन-रात सीमाओं पर पहरा देते हैं। गौरतलब है कि यह पहल गुजरात में नागरिक-सैन्य संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में एक सतत प्रयास बन चुकी है। आने वाले वर्षों में इस अभियान के और विस्तार की संभावना जताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनकी असली ताकत तब होती है जब ये केवल प्रतीकात्मक न रहकर सैनिकों के कल्याण की ठोस नीतियों से भी जुड़ें। गुजरात का यह तीन साल पुराना प्रयोग दर्शाता है कि राज्य सरकारें सामाजिक एकजुटता के लिए आंगनबाड़ी नेटवर्क को प्रभावी रूप से सक्रिय कर सकती हैं। सवाल यह है कि क्या अन्य राज्य भी ऐसी सांस्कृतिक पहलों को संस्थागत रूप दे सकते हैं, जो सैनिकों के मनोबल को वास्तविक रूप से बल दें।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'एक राखी देश के जवानों के नाम' अभियान क्या है?
यह गुजरात सरकार का एक वार्षिक अभियान है, जिसके तहत राज्य की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताएँ रक्षाबंधन पर सीमा पर तैनात सैनिकों को राखियाँ भेजती हैं। इसका उद्देश्य सैनिकों को यह अहसास दिलाना है कि राज्य की बहनें और माताएँ उनके साथ हैं।
इस बार कितनी राखियाँ भेजी गईं और किसे मिलीं?
इस वर्ष आंगनबाड़ी बहनों ने 4.50 लाख से अधिक राखियाँ भेजीं, जो BSF , CRPF , सेना और NDRF के जवानों को प्राप्त हुईं। गांधीनगर स्थित NDRF के जवानों ने भी इन रक्षा सूत्रों को स्वीकार किया।
इस समारोह में कौन-कौन से अधिकारी उपस्थित थे?
समारोह में उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी , महिला एवं बाल कल्याण मंत्री डॉ. मनीषाबेन वकील , महिला एवं बाल विकास सचिव राकेश शंकर , आयुक्त डॉ. रणजीत कुमार सिंह और BSF, CRPF, NDRF के जवान उपस्थित रहे।
गुजरात कब से यह अभियान चला रहा है?
गुजरात पिछले तीन वर्षों से यह अभियान चला रहा है। यह एक सतत प्रयास है, जो हर रक्षाबंधन पर आंगनबाड़ी नेटवर्क के माध्यम से सैनिकों तक भावनात्मक जुड़ाव पहुँचाता है।
इन राखियों का क्या प्रतीकात्मक महत्व है?
ये राखियाँ उन सैनिकों के लिए रक्षा का प्रतीक हैं, जो त्योहार के दिन भी अपने परिवार से दूर रहकर देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। यह पहल रक्षाबंधन के पारिवारिक त्योहार को राष्ट्रीय कृतज्ञता की अभिव्यक्ति में बदल देती है।
राष्ट्र प्रेस
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