14 जुलाई 2026
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अमित शाह ने BSF को बताया 'रक्षा की पहली पंक्ति', 60 वर्षों में 2,000 शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि

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अमित शाह ने BSF को बताया 'रक्षा की पहली पंक्ति', 60 वर्षों में 2,000 शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि

सारांश

भुज के बॉर्डर आउटपोस्ट जी-7 पर गृह मंत्री अमित शाह ने BSF को 'रक्षा की पहली पंक्ति' बताया और 60 वर्षों में 2,000 से अधिक शहीद जवानों को नमन किया। माइनस 45 से प्लस 50 डिग्री तक की विषम परिस्थितियों में सेवा देने वाले इन जवानों के सम्मान में यह दौरा राष्ट्रीय कृतज्ञता का प्रतीक बना।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 29 मई 2026 को भुज स्थित BSF बॉर्डर आउटपोस्ट जी-7 का दौरा किया।
पिछले 60 वर्षों में ड्यूटी के दौरान 2,000 से अधिक BSF जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया।
BSF जवान माइनस 45 डिग्री से प्लस 50 डिग्री तक के तापमान में सेवा देते हैं — कश्मीर से सुंदरबन और राजस्थान से सरक्रीक तक।
बनासकांठा में ₹200 करोड़ की लागत से बने BSF पब्लिक आउटरीच सेंटर में हर माह 2.5 लाख से अधिक लोग आते हैं।
दौरे में गुजरात CM भूपेंद्र पटेल , गृह सचिव गोविंद मोहन , IB निदेशक तपन कुमार डेका और BSF DG प्रवीण कुमार भी उपस्थित रहे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 29 मई 2026 को भुज स्थित बॉर्डर आउटपोस्ट जी-7 पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों से सीधी मुलाकात की और बल को देश की 'रक्षा की पहली पंक्ति' करार दिया। उन्होंने कहा कि पिछले छह दशकों में ड्यूटी के दौरान 2,000 से अधिक BSF जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है — एक ऐसा आँकड़ा जो इस बल की कुर्बानी की गहराई को रेखांकित करता है।

मुख्य घटनाक्रम

गृह मंत्री ने बताया कि 1965-66 में अपनी स्थापना के बाद से BSF ने भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश — दोनों मोर्चों पर सफलतापूर्वक सीमा की रक्षा की है। उन्होंने कहा, "अपनी स्थापना से लेकर अब तक 60 सालों से (1966 से 2026 तक) BSF ने दो सबसे कठिन सीमाओं को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी संभाली है — एक पाकिस्तान के साथ और दूसरी बांग्लादेश के साथ।"

शाह ने जोर देकर कहा कि BSF के जवान माइनस 45 डिग्री से लेकर प्लस 45 डिग्री तक के तापमान में अपनी ड्यूटी निभाते हैं। यह दायरा गुजरात के सरक्रीक और हरामी नाला के दलदली क्षेत्रों से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान, कश्मीर के बर्फीले पहाड़ों और सुंदरबन व पूर्वोत्तर के घने जंगलों तक फैला हुआ है।

विषम परिस्थितियों का ज़िक्र

शाह ने अपने हालिया राजस्थान सीमा दौरे का उल्लेख करते हुए बताया कि जब वे सांचू बॉर्डर पोस्ट पहुँचे, तब वहाँ का तापमान 46 डिग्री था, जबकि रेगिस्तान में यह अक्सर 50 डिग्री के पार चला जाता है। उन्होंने कहा, "कहीं कच्छ का दुर्गम रेगिस्तान है तो कहीं सरक्रीक और हरामी नाला का दलदली इलाका, कहीं राजस्थान के रेत के टीलों के बीच आपको 50 डिग्री तक पहुँचने वाले तापमान में काम करना पड़ता है।"

गौरतलब है कि ये परिस्थितियाँ BSF जवानों की शारीरिक और मानसिक दृढ़ता की असाधारण परीक्षा लेती हैं — एक तथ्य जिसे अक्सर मुख्यधारा की नीतिगत चर्चाओं में नज़रअंदाज़ किया जाता है।

जन-जागरूकता केंद्र और सामुदायिक जुड़ाव

शाह ने गुजरात के बनासकांठा जिले में स्थापित एक पब्लिक आउटरीच सेंटर का भी उल्लेख किया, जो आम नागरिकों को BSF के कार्यों और बलिदानों से परिचित कराने के उद्देश्य से बनाया गया है। उन्होंने बताया कि करीब ₹200 करोड़ की लागत से निर्मित इस केंद्र में हर महीने 2.5 लाख से अधिक लोग आते हैं।

उन्होंने बताया कि फीडबैक फॉर्म में कई माताओं सहित नागरिकों ने लिखा कि वे भविष्य में अपने बच्चों को BSF में भर्ती करवाना चाहेंगे — जो इस बल के प्रति समाज में बढ़ते सम्मान का प्रमाण है।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस दौरे में गृह मंत्री के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के निदेशक तपन कुमार डेका और BSF के महानिदेशक प्रवीण कुमार भी उपस्थित रहे।

आम जनता पर असर और आगे की राह

शाह ने कहा कि देशवासी जो चैन की नींद सोते हैं, वह BSF जवानों की अथक सेवा का ही परिणाम है। उन्होंने बल के प्रति राष्ट्र की 'गहरी कृतज्ञता, सम्मान और श्रद्धा' का भाव व्यक्त किया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब सीमा सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय विमर्श एक बार फिर केंद्र में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन BSF जवानों की असल चुनौतियाँ — वेतन विसंगतियाँ, उपकरणों की कमी और सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव — इस तरह के संबोधनों में प्रायः अनुपस्थित रहती हैं। ₹200 करोड़ का आउटरीच सेंटर नागरिक जागरूकता के लिए सराहनीय है, परंतु सवाल यह है कि क्या यह राशि जवानों की परिचालन ज़रूरतों पर खर्च होती तो अधिक प्रभावी होती। 2,000 शहीदों का आँकड़ा राष्ट्रीय विमर्श में उचित स्थान माँगता है — केवल औपचारिक अवसरों पर नहीं, बल्कि नीति-निर्माण की मेज़ पर भी।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने BSF को 'रक्षा की पहली पंक्ति' क्यों कहा?
अमित शाह ने BSF को 'रक्षा की पहली पंक्ति' इसलिए कहा क्योंकि यह बल 1966 से भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश — दोनों सबसे कठिन सीमाओं की रक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि BSF जवान माइनस 45 से प्लस 50 डिग्री तक की विषम परिस्थितियों में देश की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
BSF के कितने जवानों ने अब तक सर्वोच्च बलिदान दिया है?
गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, पिछले छह दशकों में ड्यूटी के दौरान 2,000 से अधिक BSF जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। यह आँकड़ा 1966 से 2026 तक की सेवा अवधि को कवर करता है।
बनासकांठा का BSF पब्लिक आउटरीच सेंटर क्या है?
गुजरात के बनासकांठा जिले में ₹200 करोड़ की लागत से बना यह केंद्र आम नागरिकों को BSF के कार्यों और बलिदानों से परिचित कराने के लिए स्थापित किया गया है। इस केंद्र में हर महीने 2.5 लाख से अधिक लोग आते हैं।
अमित शाह के भुज दौरे में कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे?
इस दौरे में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, IB के निदेशक तपन कुमार डेका और BSF के महानिदेशक प्रवीण कुमार उपस्थित रहे।
BSF किन-किन सीमाओं और इलाकों में तैनात है?
BSF भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमाओं पर तैनात है। इसके जवान गुजरात के सरक्रीक और हरामी नाला के दलदली क्षेत्रों, राजस्थान के रेगिस्तान, कश्मीर के बर्फीले इलाकों और पूर्वोत्तर व सुंदरबन के घने जंगलों में ड्यूटी निभाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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