अमित शाह ने सर क्रीक सीमा का निरीक्षण किया, 'स्मार्ट बॉर्डर' और 'घुसपैठ-मुक्त नीति' पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 मई 2026 को गुजरात के कच्छ जिले के अत्यंत संवेदनशील सर क्रीक और हरामी नाला क्षेत्रों में भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा ढाँचे का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरे में उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (BSF) की परिचालन तत्परता की समीक्षा की और कैमरा-आधारित निगरानी अवसंरचना सहित तकनीकी सुरक्षा प्रणालियों का आकलन किया। शाह ने स्पष्ट किया कि 'स्मार्ट बॉर्डर' और 'घुसपैठ-मुक्त बॉर्डर' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताएँ बनी हुई हैं।
मुख्य घटनाक्रम
गृह मंत्री ने भुज के निकट BSF की बॉर्डर आउटपोस्ट जी-7 का उद्घाटन किया और क्षेत्र में तैनात जवानों से सीधा संवाद किया। अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा चुनौतियों पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी इस दौरे के विभिन्न चरणों में उपस्थित रहे।
सर क्रीक की रणनीतिक संवेदनशीलता
सर क्रीक और हरामी नाला क्षेत्र भारत की पश्चिमी सीमा के सर्वाधिक रणनीतिक रूप से जटिल इलाकों में से हैं। यह भूभाग उथले नालों, दलदली ज़मीन और ज्वारीय जलमार्गों से बना है, जिनकी निगरानी करना तकनीकी दृष्टि से कठिन है। घुसपैठ, तस्करी और अनधिकृत समुद्री आवागमन के निरंतर खतरे के कारण यह क्षेत्र सुरक्षा एजेंसियों के लिए दशकों से चुनौतीपूर्ण रहा है।
गौरतलब है कि पिछली सुरक्षा समीक्षाओं में इस क्षेत्र में कई कमज़ोरियाँ चिह्नित की गई थीं। शाह ने बताया कि तब से अब तक अवसंरचना सुदृढ़ीकरण का काम प्रगति पर है और महत्वपूर्ण सुधार किए जा चुके हैं।
स्मार्ट बॉर्डर परियोजना की पृष्ठभूमि
यह दौरा कई सीमावर्ती राज्यों में चल रही सीमा सुरक्षा समीक्षा की व्यापक श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले शाह ने राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों का भी दौरा किया था, जहाँ उन्होंने ड्रोन, रडार और आधुनिक निगरानी प्रणालियों के ज़रिए पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ लगती भारतीय सीमाओं को सुदृढ़ करने के लिए एक 'स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट' की घोषणा की थी।
BSF जवानों को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि सरकार अधिक प्रौद्योगिकी-उन्मुख सुरक्षा ढाँचे की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रही है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव और सतर्कता दोनों में वृद्धि दर्ज की जा रही है।
आम जनता और सुरक्षाबलों पर असर
सीमावर्ती गाँवों के निवासियों और स्थानीय मछुआरों के लिए यह क्षेत्र आजीविका का केंद्र भी है। उन्नत निगरानी और अवसंरचना विस्तार से जहाँ सुरक्षा मज़बूत होने की उम्मीद है, वहीं स्थानीय आबादी को नई परिचालन सीमाओं के अनुकूल होना पड़ सकता है।
आगे की राह
सरकार के अनुसार, स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट के तहत तकनीकी उन्नयन का काम चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सर क्रीक जैसे भूगोल में प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी पारंपरिक गश्त की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकती है, बशर्ते रखरखाव और प्रशिक्षण पर पर्याप्त ध्यान दिया जाए।