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फाजिल्का: महिला कल्याण समिति ने आसफवाला युद्ध स्मारक पर सेना को समर्पित कीं 1,100 विशेष राखियाँ

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फाजिल्का: महिला कल्याण समिति ने आसफवाला युद्ध स्मारक पर सेना को समर्पित कीं 1,100 विशेष राखियाँ

सारांश

फाजिल्का की महिला कल्याण समिति ने रक्षाबंधन की भावना को सरहद तक पहुँचाया — आसफवाला युद्ध स्मारक पर 1,100 हाथ से तैयार राखियाँ सैनिकों को समर्पित कर समाज ने एक सशक्त संदेश दिया कि देश के रक्षकों के साथ हर बहन, हर नागरिक खड़ा है।

मुख्य बातें

फाजिल्का की महिला कल्याण समिति ने 23 अगस्त 2026 को सशस्त्र बलों को 1,100 विशेष राखियाँ समर्पित कीं।
समारोह आसफवाला युद्ध स्मारक पर राज्य-स्तरीय कार्यक्रम के रूप में आयोजित हुआ।
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि रहे; लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह विर्क सहित वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित थे।
कार्यक्रम का उद्देश्य युवा पीढ़ी को सैनिकों के बलिदान और समर्पण से जोड़ना था।
केजीएफ टीम , आसफवाला वॉर मेमोरियल कमेटी और नागरिक प्रशासन ने आयोजन में सहयोग दिया।

पंजाब के फाजिल्का जिले की महिला कल्याण समिति ने 23 अगस्त 2026 को आसफवाला युद्ध स्मारक पर आयोजित राज्य-स्तरीय समारोह में सशस्त्र बलों को 1,100 विशेष राखियाँ समर्पित कीं। 'राखी सरहद के नाम—राष्ट्रीय रक्षा का सम्मान, बहनों का गौरव' शीर्षक से आयोजित इस कार्यक्रम में देशभक्ति, आभार और सैन्य सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से दिखी।

मुख्य अतिथि और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने महिला सदस्यों द्वारा तैयार की गई राखियों की सराहना करते हुए कहा कि "देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों के प्रति समाज का सम्मान और आभार हमेशा बना रहना चाहिए।" लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह विर्क सहित सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद थे।

समारोह का महत्व और संदेश

आसफवाला युद्ध स्मारक का परिसर इस अवसर पर भावुक और देशभक्ति से ओतप्रोत वातावरण से भरा रहा। समिति की महिला सदस्यों ने सैनिकों के प्रति अपना स्नेह और सम्मान व्यक्त करते हुए देश की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में उन सैनिकों के साहस और समर्पण को विशेष रूप से याद किया गया जो विषम परिस्थितियों में सीमाओं पर तैनात रहते हैं और अपने परिजनों से दूर रहकर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

युवा पीढ़ी से जुड़ाव का उद्देश्य

आयोजकों के अनुसार इस कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य युवा पीढ़ी को सशस्त्र बलों के बलिदान, साहस और समर्पण से परिचित कराना था। समाज के विभिन्न वर्गों की महिलाओं और नागरिकों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि समुदाय देश की रक्षा में जुटे हर सैनिक के साथ एकजुट है। 1,100 राखियाँ भेंट करने का यह प्रतीकात्मक कदम बहनों के प्रेम, आभार और राष्ट्रीय गौरव का सशक्त प्रतीक बना।

आयोजन में सहयोगी संस्थाएँ

आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने के लिए केजीएफ टीम, आसफवाला वॉर मेमोरियल कमेटी और नागरिक प्रशासन का आभार व्यक्त किया। ऐतिहासिक युद्ध स्मारक पर इस पहल के आयोजन ने समारोह को विशेष गरिमा प्रदान की और स्मृति, सम्मान तथा राष्ट्रीय गौरव के संदेश को और गहरा किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये भावनात्मक अभिव्यक्तियाँ नीतिगत ध्यान में भी तब्दील होती हैं — विशेषकर सीमावर्ती सैनिकों के परिवारों के लिए कल्याण योजनाओं के संदर्भ में। पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्य में जहाँ सैन्य परिवारों की संख्या अधिक है, ऐसे आयोजन समुदाय और सेना के बीच सेतु का काम करते हैं। राज्यपाल स्तर की भागीदारी इस कार्यक्रम को सरकारी मान्यता देती है, जो इसे महज सामाजिक आयोजन से ऊपर उठाती है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'राखी सरहद के नाम' कार्यक्रम क्या है?
यह पंजाब के फाजिल्का में आसफवाला युद्ध स्मारक पर आयोजित राज्य-स्तरीय समारोह है, जिसमें महिला कल्याण समिति ने सशस्त्र बलों को 1,100 हाथ से तैयार राखियाँ समर्पित कीं। इसका पूरा नाम 'राखी सरहद के नाम—राष्ट्रीय रक्षा का सम्मान, बहनों का गौरव' है।
इस समारोह में कौन-कौन शामिल हुए?
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया मुख्य अतिथि थे। लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह विर्क सहित सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी और समाज के विभिन्न वर्गों की महिलाएँ व नागरिक उपस्थित रहे।
आसफवाला युद्ध स्मारक कहाँ स्थित है?
आसफवाला युद्ध स्मारक पंजाब के फाजिल्का जिले से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह ऐतिहासिक स्मारक सैन्य बलिदान और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जाता है।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य क्या था?
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सशस्त्र बलों के प्रति सामाजिक सम्मान और आभार व्यक्त करना था। साथ ही युवा पीढ़ी को सैनिकों के बलिदान, साहस और समर्पण से जोड़ना भी इस आयोजन का एक प्रमुख लक्ष्य था।
1,100 राखियाँ तैयार करने में किसका योगदान था?
ये राखियाँ महिला कल्याण समिति की सदस्यों ने विशेष रूप से तैयार कीं। आयोजन में केजीएफ टीम, आसफवाला वॉर मेमोरियल कमेटी और नागरिक प्रशासन ने भी सहयोग दिया।
राष्ट्र प्रेस
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