25 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

31 साल बाद गिरफ्तार: गुजरात पुलिस ने 1996 के लूटकांड के फरार आरोपी को राजकोट से दबोचा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
31 साल बाद गिरफ्तार: गुजरात पुलिस ने 1996 के लूटकांड के फरार आरोपी को राजकोट से दबोचा

सारांश

31 साल की फरारी, राज्य बदलते रहे, पहचान छुपाते रहे — लेकिन वलसाड एलसीबी की तीन महीने की गुप्त कार्रवाई ने 1996 के वापी लूटकांड के आरोपी प्रताप भूरिया को राजकोट के एक खेत से दबोच लिया। मध्य प्रदेश से गुजरात तक फैली यह कहानी पुलिस की लंबी जद्दोजहद की मिसाल है।

मुख्य बातें

प्रताप भूरिया (60 वर्ष) को 23 अगस्त 2026 को राजकोट जिले के खातली गाँव से गिरफ्तार किया गया।
वह 27 नवंबर 1996 को वापी में दर्ज लूटकांड मामले में 31 वर्षों से फरार था।
आरोपी पर आईपीसी धारा 392 (लूट) और धारा 395 (डकैती) के तहत मामला दर्ज है।
मूल रूप से मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के बोकडिया गाँव का निवासी, कृषि मजदूर बनकर छुपा था।
पुलिस उपनिरीक्षक जेबी धनैशा के नेतृत्व में वलसाड एलसीबी टीम ने तीन महीने की गुप्त कार्रवाई के बाद गिरफ्तारी की।
मामले में सात आरोपी पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं; दूसरे फरार आरोपी की तलाश जारी।

गुजरात पुलिस ने 23 अगस्त 2026 को एक उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हुए 31 वर्षों से फरार चल रहे लूटकांड के आरोपी प्रताप भूरिया (60 वर्ष) को राजकोट जिले के खातली गाँव से गिरफ्तार किया। वलसाड जिला स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) ने यह कार्रवाई वापी टाउन पुलिस स्टेशन में 27 नवंबर 1996 को दर्ज लूट के मामले के सिलसिले में की। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए वापी टाउन पुलिस स्टेशन के हवाले कर दिया गया है।

मूल घटनाक्रम: 1996 की रात का लूटकांड

27 नवंबर 1996 की रात वापी के छीरी काडिया फलिया इलाके में चार अज्ञात व्यक्ति एक स्थानीय निवासी के घर में घुस गए। आरोप है कि इन लोगों ने डंडे और चाकू जैसे हथियारों से शिकायतकर्ता और गवाहों को धमकाया तथा घर और दुकान से नकदी एवं सोने के आभूषण लूटकर फरार हो गए।

इस मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 392 (लूट) और धारा 395 (डकैती) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। जाँच के दौरान पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया, लेकिन प्रताप भूरिया सहित दो आरोपी दशकों तक फरार रहे।

तीन दशक की फरारी: कैसे बचता रहा आरोपी

पुलिस के अनुसार, प्रताप भूरिया ने गिरफ्तारी से बचने के लिए एक सुनियोजित तरीका अपनाया। वह राज्य के विभिन्न जिलों में कृषि मजदूर के रूप में काम करते हुए लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा। मूल रूप से मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के बोकडिया गाँव का निवासी प्रताप गिरफ्तारी के समय राजकोट के हरेशभाई वेकारिया के खेत पर रह रहा था।

गौरतलब है कि अंतर्राज्यीय पृष्ठभूमि और लगातार पलायन की रणनीति ने उसे तीन दशकों तक कानून की पकड़ से दूर रखा — यह ऐसे मामलों की एक आम प्रवृत्ति है जहाँ आरोपी राज्य की सीमाओं के पार जाकर नई पहचान बना लेते हैं।

एलसीबी की रणनीति: तीन महीने की गुप्त कार्रवाई

पुलिस उपनिरीक्षक जेबी धनैशा के नेतृत्व में एलसीबी की टीम पिछले लगभग तीन महीनों से इस मामले पर काम कर रही थी। टीम के सदस्य खातली गाँव में रहकर, वेश बदलकर और मानव खुफिया नेटवर्क के ज़रिये स्थानीय मुखबिरों से जानकारी जुटाते रहे।

निर्णायक सफलता तब मिली जब पैरोल-फरलो स्क्वॉड के सहायक पुलिस कांस्टेबल पंकज रूपाभाई को सूचना मिली कि प्रताप राजकोट जिले के जम कंडोरना क्षेत्र के खातली गाँव में काम कर रहा है। इसके बाद टीम ने पहले गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी, तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर नेटवर्क को एकसाथ इस्तेमाल कर प्रताप को दबोचा।

व्यापक अभियान का हिस्सा

यह गिरफ्तारी गुजरात पुलिस के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसके तहत लंबे समय से फरार वांछित आरोपियों की तलाश की जा रही है। यह ऐसे समय में आई है जब राज्य पुलिस पुराने लंबित मामलों के निपटारे पर ज़ोर दे रही है।

आगे की जाँच और कानूनी प्रक्रिया वापी टाउन पुलिस स्टेशन द्वारा संचालित की जाएगी। दूसरे फरार आरोपी की तलाश अभी भी जारी बताई जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इतने दशकों तक यह मामला ठंडे बस्ते में क्यों रहा। दूसरा आरोपी अभी भी फरार है — और जब तक वह भी पकड़ में नहीं आता, न्याय अधूरा है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रताप भूरिया को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
प्रताप भूरिया को 27 नवंबर 1996 को गुजरात के वापी के छीरी काडिया फलिया इलाके में हुए लूटकांड के मामले में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में आईपीसी की धारा 392 और 395 के तहत वापी टाउन पुलिस स्टेशन में मुकदमा दर्ज था।
प्रताप भूरिया इतने साल कैसे फरार रहा?
पुलिस के अनुसार, प्रताप कृषि मजदूर के रूप में काम करते हुए गुजरात के विभिन्न जिलों में लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा। मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले का मूल निवासी होने के कारण अंतर्राज्यीय पृष्ठभूमि ने भी उसकी पहचान छुपाने में मदद की।
गिरफ्तारी किस टीम ने और कैसे की?
वलसाड जिला स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) की टीम ने पुलिस उपनिरीक्षक जेबी धनैशा के नेतृत्व में लगभग तीन महीने की गुप्त कार्रवाई के बाद यह गिरफ्तारी की। टीम ने वेश बदलकर मानव खुफिया नेटवर्क और मुखबिरों की मदद से आरोपी का पता लगाया।
1996 के वापी लूटकांड में कितने आरोपी थे?
मामले में कुल नौ आरोपी थे, जिनमें से सात को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था। प्रताप भूरिया और एक अन्य आरोपी लंबे समय से फरार थे; दूसरे फरार आरोपी की तलाश अभी भी जारी है।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी का क्या होगा?
गिरफ्तारी के बाद प्रताप भूरिया को आगे की कानूनी कार्रवाई और जाँच के लिए वापी टाउन पुलिस स्टेशन के हवाले कर दिया गया है। मामले में न्यायालय में आगे की प्रक्रिया अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले