31 साल बाद गिरफ्तार: गुजरात पुलिस ने 1996 के लूटकांड के फरार आरोपी को राजकोट से दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात पुलिस ने 23 अगस्त 2026 को एक उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हुए 31 वर्षों से फरार चल रहे लूटकांड के आरोपी प्रताप भूरिया (60 वर्ष) को राजकोट जिले के खातली गाँव से गिरफ्तार किया। वलसाड जिला स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) ने यह कार्रवाई वापी टाउन पुलिस स्टेशन में 27 नवंबर 1996 को दर्ज लूट के मामले के सिलसिले में की। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए वापी टाउन पुलिस स्टेशन के हवाले कर दिया गया है।
मूल घटनाक्रम: 1996 की रात का लूटकांड
27 नवंबर 1996 की रात वापी के छीरी काडिया फलिया इलाके में चार अज्ञात व्यक्ति एक स्थानीय निवासी के घर में घुस गए। आरोप है कि इन लोगों ने डंडे और चाकू जैसे हथियारों से शिकायतकर्ता और गवाहों को धमकाया तथा घर और दुकान से नकदी एवं सोने के आभूषण लूटकर फरार हो गए।
इस मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 392 (लूट) और धारा 395 (डकैती) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। जाँच के दौरान पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया, लेकिन प्रताप भूरिया सहित दो आरोपी दशकों तक फरार रहे।
तीन दशक की फरारी: कैसे बचता रहा आरोपी
पुलिस के अनुसार, प्रताप भूरिया ने गिरफ्तारी से बचने के लिए एक सुनियोजित तरीका अपनाया। वह राज्य के विभिन्न जिलों में कृषि मजदूर के रूप में काम करते हुए लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा। मूल रूप से मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के बोकडिया गाँव का निवासी प्रताप गिरफ्तारी के समय राजकोट के हरेशभाई वेकारिया के खेत पर रह रहा था।
गौरतलब है कि अंतर्राज्यीय पृष्ठभूमि और लगातार पलायन की रणनीति ने उसे तीन दशकों तक कानून की पकड़ से दूर रखा — यह ऐसे मामलों की एक आम प्रवृत्ति है जहाँ आरोपी राज्य की सीमाओं के पार जाकर नई पहचान बना लेते हैं।
एलसीबी की रणनीति: तीन महीने की गुप्त कार्रवाई
पुलिस उपनिरीक्षक जेबी धनैशा के नेतृत्व में एलसीबी की टीम पिछले लगभग तीन महीनों से इस मामले पर काम कर रही थी। टीम के सदस्य खातली गाँव में रहकर, वेश बदलकर और मानव खुफिया नेटवर्क के ज़रिये स्थानीय मुखबिरों से जानकारी जुटाते रहे।
निर्णायक सफलता तब मिली जब पैरोल-फरलो स्क्वॉड के सहायक पुलिस कांस्टेबल पंकज रूपाभाई को सूचना मिली कि प्रताप राजकोट जिले के जम कंडोरना क्षेत्र के खातली गाँव में काम कर रहा है। इसके बाद टीम ने पहले गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी, तकनीकी विश्लेषण और मुखबिर नेटवर्क को एकसाथ इस्तेमाल कर प्रताप को दबोचा।
व्यापक अभियान का हिस्सा
यह गिरफ्तारी गुजरात पुलिस के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है जिसके तहत लंबे समय से फरार वांछित आरोपियों की तलाश की जा रही है। यह ऐसे समय में आई है जब राज्य पुलिस पुराने लंबित मामलों के निपटारे पर ज़ोर दे रही है।
आगे की जाँच और कानूनी प्रक्रिया वापी टाउन पुलिस स्टेशन द्वारा संचालित की जाएगी। दूसरे फरार आरोपी की तलाश अभी भी जारी बताई जा रही है।