गोवा अपहरण केस: मुख्य आरोपी नीलेश जाधव दावणगेरे से गिरफ्तार, 3 लाख की लूट का खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- मुख्य आरोपी नीलेश जाधव (53) को 24 अप्रैल 2026 को कर्नाटक के दावणगेरे से गिरफ्तार किया गया।
- आरोपी ने खुद को ईडी अधिकारी बताकर पीड़ित अशोक कुमार को धोखे में रखा और 3,00,000 रुपए लूटे।
- घटना 1 अप्रैल 2026 को गोवा के मकाजाना, सालसेटे में केनरा बैंक के बाहर से अपहरण से शुरू हुई।
- जेएमएफसी कोर्ट, मडगांव ने आरोपी को 6 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा।
- मामले की निगरानी दक्षिण गोवा एसपी संतोष एस. देसाई कर रहे हैं; अन्य आरोपी बलराम शेट्टी अभी भी फरार है।
- यह अंतरराज्यीय अपराध गोवा-कर्नाटक सीमा पर तकनीकी फोरेंसिक की मदद से सुलझाया गया।
बेंगलुरु, 24 अप्रैल 2026 (राष्ट्र प्रेस)। गोवा के मैना कर्टोरिम पुलिस स्टेशन को अपहरण और 3 लाख रुपए की लूट के बहुचर्चित मामले में बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने मुख्य आरोपी नीलेश पुत्र भीमराव जाधव (53 वर्ष) को कर्नाटक के दावणगेरे से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने वारदात के दौरान खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का अधिकारी बताकर पीड़ित को धोखे में रखा था।
क्या है पूरा मामला?
1 अप्रैल 2026 को गोवा के बोरडा, फतोरडा निवासी अशोक कुमार (56 वर्ष) ने मैना कर्टोरिम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 3(5), 205, 140(3), 351(3), 308(5) और 309(4) के तहत अपराध संख्या 21/2026 दर्ज किया गया था।
शिकायतकर्ता अशोक कुमार के अनुसार, शुक्रवार दोपहर लगभग 2:30 बजे जब वे मकाजाना, सालसेटे, गोवा स्थित केनरा बैंक के बाहर खड़े थे, तभी आरोपी नीलेश जाधव, बलराम शेट्टी, अजीत और कुछ अन्य अज्ञात व्यक्तियों ने मिलकर उनका अपहरण कर लिया।
अपहरण से लेकर लूट तक का घटनाक्रम
आरोपियों ने अशोक कुमार को जबरदस्ती अपनी कार में बिठाया और उन्हें कर्नाटक के कारवार स्थित एक सुनसान स्थान पर ले गए। वहां उन्हें जान से मारने की धमकी देकर डराया-धमकाया गया और 3,00,000 रुपए लूट लिए गए।
इस पूरे षड्यंत्र में मुख्य आरोपी नीलेश जाधव ने ईडी अधिकारी का नाटक किया, जिससे पीड़ित पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया जा सके। यह तरीका अपने आप में बेहद संगठित और सोची-समझी आपराधिक रणनीति को दर्शाता है।
जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया
जांच के दौरान एक अन्य आरोपी अजीत कुमार कट्टिमानी (34 वर्ष) को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था, जिसे बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था। मुख्य आरोपी नीलेश जाधव लगातार फरार चल रहा था।
24 अप्रैल 2026 को लगातार तकनीकी निगरानी के जरिए पुलिस ने नीलेश जाधव का पता दावणगेरे, कर्नाटक में लगाया। इसके बाद पीएसआई प्रफुल पी. गिरी, एचसी-5725 गोरखनाथ गवास, पीसी-6022 समीर सुधीर और पीसी-7409 चेतन कोली की एक विशेष पुलिस टीम दावणगेरे रवाना की गई।
आरोपी को बेंगलुरु की ओर भागने की कोशिश के दौरान सफलतापूर्वक दबोच लिया गया और उसे गोवा लाया गया। जेएमएफसी कोर्ट, मडगांव ने उसे 6 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
पर्यवेक्षण और आगे की जांच
इस मामले की आगे की जांच पीएसआई प्रफुल पी. गिरी के नेतृत्व में जारी है। पीआई कपिल नायक और एसडीपीओ सिद्धांत यू. शिरडोकर जांच की निगरानी कर रहे हैं, जबकि पूरे मामले की देखरेख दक्षिण गोवा के पुलिस अधीक्षक संतोष एस. देसाई कर रहे हैं।
विश्लेषण: ईडी अधिकारी बनकर ठगी की बढ़ती प्रवृत्ति
यह मामला उस खतरनाक प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है जिसमें अपराधी सरकारी एजेंसियों — खासकर ईडी, सीबीआई या आयकर विभाग के अधिकारियों का रूप धारण कर निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में देशभर में ऐसे मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जहां आम लोग कानूनी कार्रवाई के डर से आसानी से शिकार बन जाते हैं।
गोवा-कर्नाटक सीमा पर इस तरह के अंतरराज्यीय अपराध पुलिस समन्वय की चुनौती को भी उजागर करते हैं। तकनीकी निगरानी के माध्यम से मुख्य आरोपी को पकड़ना इस बात का प्रमाण है कि डिजिटल फोरेंसिक अब अपराध नियंत्रण में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
आने वाले दिनों में पुलिस हिरासत के दौरान नीलेश जाधव से पूछताछ में अन्य फरार आरोपियों — खासकर बलराम शेट्टी और अज्ञात सहयोगियों — के बारे में अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है।