तिब्बत ग्लेशियर टूटना चीन की साजिश? बाढ़ विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार का बड़ा दावा
सारांश
मुख्य बातें
बाढ़ विशेषज्ञ डॉ. विजय कुमार ने 27 अगस्त को भागलपुर में दावा किया कि तिब्बत में हाल ही में हुई ग्लेशियर टूटने की घटना कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि चीन के जानबूझकर किए गए हस्तक्षेप का परिणाम है। उनके अनुसार, चीन ने तिब्बती क्षेत्र में नदियों के प्रवाह को मोड़कर अपने नियंत्रण में कर लिया है, जिससे नेपाल में बाढ़ की स्थिति और भीषण हो गई है।
मुख्य दावा: मानवकृत आपदा
डॉ. विजय कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ये शुद्ध रूप से मानवकृत घटना है।' उनके अनुसार, ग्लेशियर तभी टूटता है जब उस पर असामान्य दबाव बनाया जाए, और यह दबाव नदी क्षेत्र में बाहरी हस्तक्षेप से उत्पन्न हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि हिमालय के पुराने इलाकों से आने वाली हवाओं और ग्लेशियरों के बीच का संतुलन बिगड़ने से गंगा और उसकी सहायक नदियों के व्यवहार पर सीधा असर पड़ता है।
विशेषज्ञ ने कहा, 'जो लोग इसे प्राकृतिक घटना मानते हैं, वे या तो इसे समझ नहीं पा रहे हैं, या जानबूझकर ऐसा कह रहे हैं।' उन्होंने कुसहा त्रासदी का भी संदर्भ दिया और बताया कि उस समय भी उन्होंने चीनी हस्तक्षेप की आशंका जताई थी, हालाँकि तब प्रमाण उपलब्ध नहीं थे।
चीन का स्वीकारोक्ति और तिब्बत का संदर्भ
डॉ. कुमार के अनुसार, 2016 में चीन ने स्वयं स्वीकार किया था कि उसने हिमालयी क्षेत्र में हस्तक्षेप किया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तिब्बत के स्वतंत्र रहते चीन कभी भारत का सीमावर्ती देश नहीं था — तिब्बत पर कब्जे के बाद ही यह स्थिति बनी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि जब यह घटना हुई, उसी समय भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) बीजिंग में सीमा-संबंधी वार्ता के लिए मौजूद थे।
नदियों और बाँधों की राजनीति
डॉ. कुमार ने भारत की अपनी नदी नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फरक्का बैराज ने गंगा के प्रवाह को बाधित किया और टिहरी बाँध ने ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र को प्रभावित किया — ये दोनों विकास के नाम पर किए गए, लेकिन नदी के स्वाभाविक व्यवहार से छेड़छाड़ का परिणाम भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि 1954 से इस क्षेत्र में 8 बड़े बाँध प्रस्तावित हैं, जिन पर अमेरिका, चीन और अन्य देशों की नज़र है। भारत भी बिजली और सिंचाई के लिए इन परियोजनाओं में रुचि रखता है, लेकिन जन-दबाव के कारण ये अटकी हुई हैं।
नेपाल को अस्थिर करने की रणनीति?
डॉ. कुमार का आरोप है कि चीन की मंशा बाढ़ की स्थिति का राजनीतिक उपयोग करते हुए नेपाल में अस्थिरता पैदा करना है, ताकि नेपाल मजबूर होकर चीन के साथ खड़ा हो और भारत के विरुद्ध रहे। उन्होंने भारत सरकार से माँग की कि वह इस मुद्दे पर चीन के साथ सीधी कूटनीतिक बातचीत करे।
गौरतलब है कि ये दावे एक विशेषज्ञ की व्यक्तिगत राय हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। भारत सरकार या किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था ने अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारत-चीन कूटनीतिक स्तर पर इस जल-विवाद को किस दिशा में ले जाते हैं।