गंडक बाढ़ पर बिहार सरकार का बड़ा बयान: स्थिति नियंत्रण में, डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने वाल्मीकिनगर का किया हवाई सर्वेक्षण
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 27 अगस्त को स्पष्ट किया कि नेपाल के ऊपरी क्षेत्र में ग्लेशियर फटने की घटना से उत्पन्न बाढ़ का बिहार पर फिलहाल कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ा है। गंडक नदी में जलस्राव नियंत्रण में है और वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर स्थिति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है।
हवाई सर्वेक्षण और ज़मीनी समीक्षा
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ मिलकर नेपाल की बाढ़ और उसके संभावित प्रभाव को लेकर गंडक नदी की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। सबसे पहले पूरे क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया गया, इसके बाद वाल्मीकिनगर पहुँचकर जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की गई। उन्होंने कहा कि वाल्मीकिनगर पहुँचने पर यह स्पष्ट हुआ कि सभी संबंधित अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद हैं और स्थानीय लोगों में भी सरकार की तैयारियों को लेकर संतोष है।
250-300 किलोमीटर की दूरी ने घटाई बाढ़ की तीव्रता
चौधरी ने बताया कि नेपाल में जहाँ ग्लेशियर फटने की घटना हुई, वह स्थान वाल्मीकिनगर से करीब 250 से 300 किलोमीटर ऊपर है। इतनी लंबी दूरी तय करने के दौरान बाढ़ के पानी का वेग और प्रवाह स्वाभाविक रूप से कम होता जाता है। इसके अतिरिक्त, घटना के समय गंडक नदी में जलस्तर सामान्य से भी कुछ कम था, जिससे संभावित खतरे के बावजूद स्थिति गंभीर नहीं बनी।
उन्होंने नदी के मार्ग की भी जानकारी दी — नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद पानी पहले भोटे कोसी नदी में आया, फिर त्रिशूली नदी में पहुँचा, जो आगे चलकर नारायणी बनती है और भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक के रूप में प्रवाहित होती है। इस लंबे मार्ग के कारण पानी की तीव्रता में उल्लेखनीय कमी आई।
जलस्राव के आँकड़े और नेपाल की निगरानी
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि नेपाल के देवघाट में जलस्तर की निगरानी के लिए गेज मीटर लगाया गया है। नेपाल सरकार की ओर से वहाँ करीब सात से आठ मीटर पानी आने का अनुमान जताया गया था, जबकि आठ मीटर वहाँ का खतरे का निशान है। हालाँकि जलस्तर अधिकतम करीब सात मीटर तक ही पहुँचा और अब इसमें कमी शुरू हो गई है।
वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर अधिकतम दो से सवा दो लाख क्यूसेक जलस्राव आने का आकलन किया गया था। वास्तव में अब तक अधिकतम जलस्राव करीब एक लाख दस से बारह हज़ार क्यूसेक रहा, जबकि फिलहाल यह करीब एक लाख चार हज़ार क्यूसेक है। सुबह के समय यह एक लाख क्यूसेक से भी नीचे चला गया था।
सरकार की तैयारी और प्रशासन की सतर्कता
चौधरी ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के बारे में निश्चित भविष्यवाणी करना संभव नहीं है — बादल फटने या ग्लेशियर टूटने जैसी घटनाएँ अचानक हो सकती हैं। इसलिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जिला प्रशासन से लेकर सभी संबंधित अधिकारियों को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। निचले इलाकों के लोगों को सतर्क किया गया और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। जल संसाधन विभाग पूरी मुस्तैदी से स्थिति पर नज़र रख रहा है।
आगे क्या
उपमुख्यमंत्री ने दोहराया कि मौजूदा स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और ऊपर से मिल रही सूचनाओं के अनुसार फिलहाल चिंता की कोई बड़ी वजह नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के दौरान नेपाल से आने वाली नदियों में अचानक बाढ़ बिहार के लिए हर वर्ष एक बड़ी चुनौती बनती है। सतर्कता बनाए रखते हुए प्रशासन की निगरानी जारी रहेगी।