27 अगस्त 2026
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गंडक बाढ़ पर बिहार सरकार का बड़ा बयान: स्थिति नियंत्रण में, डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने वाल्मीकिनगर का किया हवाई सर्वेक्षण

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गंडक बाढ़ पर बिहार सरकार का बड़ा बयान: स्थिति नियंत्रण में, डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने वाल्मीकिनगर का किया हवाई सर्वेक्षण

सारांश

नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद बिहार में अलर्ट था, लेकिन 250-300 किलोमीटर की दूरी ने बाढ़ की तीव्रता को काफी घटा दिया। डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने हवाई सर्वेक्षण के बाद कहा — गंडक बराज पर जलस्राव अनुमान से काफी कम रहा, स्थिति नियंत्रण में है।

मुख्य बातें

बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने 27 अगस्त को वाल्मीकिनगर का हवाई सर्वेक्षण कर गंडक बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की।
नेपाल में ग्लेशियर फटने का स्थान वाल्मीकिनगर से करीब 250 से 300 किलोमीटर ऊपर है, जिससे पानी की तीव्रता घटकर आई।
नेपाल के देवघाट में जलस्तर अधिकतम सात मीटर तक पहुँचा; खतरे का निशान आठ मीटर है और अब कमी शुरू हो गई है।
वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर अनुमानित दो से सवा दो लाख क्यूसेक के मुकाबले अधिकतम एक लाख दस-बारह हज़ार क्यूसेक जलस्राव दर्ज हुआ।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सभी जिला अधिकारियों को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने 27 अगस्त को स्पष्ट किया कि नेपाल के ऊपरी क्षेत्र में ग्लेशियर फटने की घटना से उत्पन्न बाढ़ का बिहार पर फिलहाल कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ा है। गंडक नदी में जलस्राव नियंत्रण में है और वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर स्थिति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है।

हवाई सर्वेक्षण और ज़मीनी समीक्षा

उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ मिलकर नेपाल की बाढ़ और उसके संभावित प्रभाव को लेकर गंडक नदी की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। सबसे पहले पूरे क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया गया, इसके बाद वाल्मीकिनगर पहुँचकर जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की गई। उन्होंने कहा कि वाल्मीकिनगर पहुँचने पर यह स्पष्ट हुआ कि सभी संबंधित अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद हैं और स्थानीय लोगों में भी सरकार की तैयारियों को लेकर संतोष है।

250-300 किलोमीटर की दूरी ने घटाई बाढ़ की तीव्रता

चौधरी ने बताया कि नेपाल में जहाँ ग्लेशियर फटने की घटना हुई, वह स्थान वाल्मीकिनगर से करीब 250 से 300 किलोमीटर ऊपर है। इतनी लंबी दूरी तय करने के दौरान बाढ़ के पानी का वेग और प्रवाह स्वाभाविक रूप से कम होता जाता है। इसके अतिरिक्त, घटना के समय गंडक नदी में जलस्तर सामान्य से भी कुछ कम था, जिससे संभावित खतरे के बावजूद स्थिति गंभीर नहीं बनी।

उन्होंने नदी के मार्ग की भी जानकारी दी — नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद पानी पहले भोटे कोसी नदी में आया, फिर त्रिशूली नदी में पहुँचा, जो आगे चलकर नारायणी बनती है और भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक के रूप में प्रवाहित होती है। इस लंबे मार्ग के कारण पानी की तीव्रता में उल्लेखनीय कमी आई।

जलस्राव के आँकड़े और नेपाल की निगरानी

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि नेपाल के देवघाट में जलस्तर की निगरानी के लिए गेज मीटर लगाया गया है। नेपाल सरकार की ओर से वहाँ करीब सात से आठ मीटर पानी आने का अनुमान जताया गया था, जबकि आठ मीटर वहाँ का खतरे का निशान है। हालाँकि जलस्तर अधिकतम करीब सात मीटर तक ही पहुँचा और अब इसमें कमी शुरू हो गई है।

वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर अधिकतम दो से सवा दो लाख क्यूसेक जलस्राव आने का आकलन किया गया था। वास्तव में अब तक अधिकतम जलस्राव करीब एक लाख दस से बारह हज़ार क्यूसेक रहा, जबकि फिलहाल यह करीब एक लाख चार हज़ार क्यूसेक है। सुबह के समय यह एक लाख क्यूसेक से भी नीचे चला गया था।

सरकार की तैयारी और प्रशासन की सतर्कता

चौधरी ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के बारे में निश्चित भविष्यवाणी करना संभव नहीं है — बादल फटने या ग्लेशियर टूटने जैसी घटनाएँ अचानक हो सकती हैं। इसलिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जिला प्रशासन से लेकर सभी संबंधित अधिकारियों को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। निचले इलाकों के लोगों को सतर्क किया गया और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। जल संसाधन विभाग पूरी मुस्तैदी से स्थिति पर नज़र रख रहा है।

आगे क्या

उपमुख्यमंत्री ने दोहराया कि मौजूदा स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और ऊपर से मिल रही सूचनाओं के अनुसार फिलहाल चिंता की कोई बड़ी वजह नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के दौरान नेपाल से आने वाली नदियों में अचानक बाढ़ बिहार के लिए हर वर्ष एक बड़ी चुनौती बनती है। सतर्कता बनाए रखते हुए प्रशासन की निगरानी जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि बिहार हर मानसून में नेपाल की नदियों से आने वाली अचानक बाढ़ का शिकार होता है और हर बार यही आश्वासन दिए जाते हैं। असली सवाल यह है कि क्या दीर्घकालिक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और नेपाल के साथ वास्तविक समय डेटा-साझेदारी को संस्थागत रूप दिया जा रहा है। इस बार भूगोल ने बिहार को बचाया — 250-300 किलोमीटर की दूरी ने तबाही टाली — लेकिन यह हर बार नहीं होगा। सतर्कता का यह क्षण स्थायी बाढ़ प्रबंधन ढाँचे की माँग करता है, न कि केवल मौसमी समीक्षाओं की।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंडक नदी में बाढ़ की मौजूदा स्थिति क्या है?
27 अगस्त को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के अनुसार, गंडक नदी में जलस्राव पूरी तरह नियंत्रण में है और वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर स्थिति सामान्य है। बराज पर अधिकतम जलस्राव करीब एक लाख दस-बारह हज़ार क्यूसेक रहा, जो अनुमानित दो से सवा दो लाख क्यूसेक से काफी कम है।
नेपाल में ग्लेशियर फटने का बिहार पर क्या असर पड़ा?
नेपाल में ग्लेशियर फटने की घटना वाल्मीकिनगर से 250-300 किलोमीटर ऊपर हुई, जिससे पानी की तीव्रता लंबी दूरी तय करते हुए स्वाभाविक रूप से कम हो गई। इसके अलावा घटना के समय गंडक में जलस्तर सामान्य से भी कम था, इसलिए बिहार पर कोई गंभीर असर नहीं पड़ा।
नेपाल के देवघाट में जलस्तर कितना पहुँचा?
नेपाल सरकार ने देवघाट में सात से आठ मीटर पानी आने का अनुमान जताया था, जहाँ आठ मीटर खतरे का निशान है। वास्तव में जलस्तर अधिकतम करीब सात मीटर तक पहुँचा और अब इसमें कमी शुरू हो गई है।
बिहार सरकार ने बाढ़ से निपटने के लिए क्या तैयारियाँ की हैं?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जिला प्रशासन से लेकर सभी संबंधित अधिकारियों को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। निचले इलाकों के लोगों को सतर्क किया गया, ज़रूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई और जल संसाधन विभाग पूरी मुस्तैदी से निगरानी कर रहा है।
गंडक नदी नेपाल से बिहार तक किस मार्ग से आती है?
नेपाल में ग्लेशियर फटने के बाद पानी पहले भोटे कोसी नदी में आया, फिर त्रिशूली नदी में पहुँचा, जो आगे नारायणी बनती है। भारत में प्रवेश करने के बाद यही नदी गंडक के रूप में प्रवाहित होती है। इस लंबे मार्ग के कारण पानी की तीव्रता में उल्लेखनीय कमी आती है।
राष्ट्र प्रेस
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