26 अगस्त 2026
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गंडक नदी में बाढ़ का खतरा: विजय चौधरी बोले- घबराएं नहीं, तेजस्वी ने माँगी 24 घंटे तटबंध निगरानी

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गंडक नदी में बाढ़ का खतरा: विजय चौधरी बोले- घबराएं नहीं, तेजस्वी ने माँगी 24 घंटे तटबंध निगरानी

सारांश

नेपाल में ग्लेशियर फटने से गंडक नदी में बाढ़ का संकट गहराया — देवघाट में जलस्तर पौने आठ मीटर तक पहुँचने की आशंका। बिहार सरकार सतर्क, विजय चौधरी ने घबराने से मना किया; तेजस्वी यादव ने 24 घंटे तटबंध निगरानी और छह ज़िलों में अलर्ट की माँग की।

मुख्य बातें

नेपाल के तिब्बत से सटे क्षेत्र में ग्लेशियर फटने से गंडक नदी में जलप्रवाह बढ़ने का खतरा।
देवघाट में मौजूदा जलस्तर 4.7 मीटर ; नेपाल सरकार के अनुसार 3 मीटर और बढ़ सकता है — कुल पौने आठ मीटर तक।
कुल जलप्रवाह ढाई से पौने तीन लाख क्यूसेक से अधिक न जाने की संभावना; बुधवार की रात सबसे महत्वपूर्ण।
उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा — स्थिति चुनौतीपूर्ण, लेकिन नियंत्रण में; बाढ़ विशेषज्ञ टीम रवाना।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में अलर्ट और 24 घंटे तटबंध निगरानी की माँग की।

नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में ग्लेशियर फटने और फ्लैश फ्लड की स्थिति के बाद गंडक नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ने की आशंका को देखते हुए बिहार सरकार ने 26 अगस्त 2026 को संबंधित जिलों में विशेष सतर्कता बढ़ा दी है। उप मुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि स्थिति चुनौतीपूर्ण अवश्य है, किंतु सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है और नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। वहीं, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तटबंधों की 24 घंटे निगरानी और संवेदनशील इलाकों में समय रहते चेतावनी जारी करने की माँग की है।

ग्लेशियर से उठा संकट: नेपाल से बिहार तक का सफर

विजय कुमार चौधरी ने बताया कि नेपाल के तिब्बत से सटे क्षेत्र में ग्लेशियर फटने की सूचना मिली है। इससे निकला पानी नेपाल की त्रिशुली नदी के रास्ते नारायणी नदी में आ रहा है, जो बिहार में गंडक नदी के नाम से जानी जाती है। नेपाल सरकार के आकलन के अनुसार, देवघाट में जलस्तर करीब तीन मीटर तक बढ़ सकता है। यह पानी अगले दो से तीन घंटे में देवघाट पहुँचने की संभावना बताई गई थी।

जलस्तर का गणित: कितना खतरनाक हो सकता है

चौधरी ने विस्तार से बताया कि देवघाट में फिलहाल करीब 4.7 मीटर पानी है। यदि जलस्तर तीन मीटर और बढ़ता है तो यह लगभग पौने आठ मीटर तक पहुँच सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आठ से नौ मीटर या उससे ऊपर जलस्तर पहुँचने पर स्थिति ज़्यादा खतरनाक मानी जाती है। फिलहाल गंडक में बिहार की ओर से जलप्रवाह एक लाख क्यूसेक से कम है, जबकि नेपाल से आने वाले अतिरिक्त पानी का आकलन करीब डेढ़ लाख क्यूसेक तक किया गया है। ऐसे में कुल जलप्रवाह करीब ढाई से पौने तीन लाख क्यूसेक से अधिक नहीं जाने की संभावना जताई गई है।

सरकार की तैयारी और प्रशासनिक सक्रियता

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि बाढ़ प्रबंधन से जुड़े सभी ज़रूरी कार्य पूरे कर लिए गए हैं। संबंधित जिलों के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है। बाढ़ प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाले अधिकारियों की एक अतिरिक्त टीम बुधवार दोपहर रवाना की गई। देवघाट में पानी पहुँचने के करीब चार घंटे बाद बराज तक पानी पहुँचने की संभावना है, जिससे बुधवार की रात सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बाढ़ की किसी भी आपात स्थिति और बचाव कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री तैयार रखी गई है।

तेजस्वी यादव की माँग: 24 घंटे निगरानी और जन-जागरण

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नेपाल में फ्लैश फ्लड से हुए जान-माल के नुकसान और बिहार में संभावित खतरे को देखते हुए सरकार को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने माँग की कि सरकार बाँधों और तटबंधों की 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित करे और उनकी मज़बूती एवं सुरक्षा पर विशेष ध्यान दे। यादव ने राजद कार्यकर्ताओं से भी गंडक नदी से जुड़े जिलों में लोगों को जागरूक करने की अपील की।

उन्होंने विशेष रूप से पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के स्थानीय लोगों को आवश्यक सूचना और चेतावनी देकर सतर्क करते रहने का आग्रह किया।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि गंडक नदी बिहार के कई जिलों के लिए हर मानसून में बाढ़ का प्रमुख स्रोत रहती है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून का मौसम अपने चरम पर है और नेपाल में भारी वर्षा का सिलसिला जारी है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि स्थिति की जानकारी समय-समय पर आम लोगों तक पहुँचाई जाएगी। आने वाले 24 से 48 घंटे गंडक तटवर्ती जिलों के लिए निर्णायक रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी तटबंधों की स्थिति और पूर्व-चेतावनी तंत्र की मज़बूती पर सवाल हर बार उठते हैं। विजय चौधरी का 'घबराएं नहीं' का संदेश तभी विश्वसनीय होगा जब ज़मीन पर मौजूद अधिकारी वास्तव में सक्रिय हों, न केवल कागज़ पर। तेजस्वी यादव की 24 घंटे निगरानी की माँग राजनीतिक भी है, लेकिन तकनीकी रूप से उचित भी — क्योंकि नेपाल से आने वाला पानी रात में बराज तक पहुँच सकता है जब प्रशासनिक सतर्कता स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है। असली परीक्षा यह होगी कि छह प्रभावित जिलों में आम लोगों तक चेतावनी समय पर पहुँचती है या नहीं।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंडक नदी में बाढ़ का खतरा क्यों बढ़ा है?
नेपाल के तिब्बत से सटे क्षेत्र में ग्लेशियर फटने से त्रिशुली और नारायणी नदी के रास्ते गंडक में अचानक जलप्रवाह बढ़ने की आशंका है। नेपाल सरकार के अनुसार देवघाट में जलस्तर तीन मीटर तक बढ़ सकता है, जिससे बिहार के तटवर्ती जिलों पर सीधा असर पड़ सकता है।
देवघाट में अभी कितना जलस्तर है और यह कितना खतरनाक हो सकता है?
देवघाट में फिलहाल करीब 4.7 मीटर पानी है। नेपाल सरकार के आकलन के अनुसार यह तीन मीटर और बढ़कर पौने आठ मीटर तक पहुँच सकता है। आठ से नौ मीटर या उससे ऊपर जलस्तर पहुँचने पर स्थिति ज़्यादा खतरनाक मानी जाती है।
बिहार सरकार ने बाढ़ से निपटने के लिए क्या तैयारी की है?
बाढ़ प्रबंधन में विशेषज्ञ अधिकारियों की एक अतिरिक्त टीम बुधवार दोपहर रवाना की गई है। संबंधित जिलों के अधिकारी मौके पर तैनात हैं और बचाव सामग्री तैयार रखी गई है। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि स्थिति की जानकारी समय-समय पर जनता तक पहुँचाई जाएगी।
तेजस्वी यादव ने किन जिलों के लिए अलर्ट की माँग की है?
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली के लोगों को सतर्क करने की माँग की है। उन्होंने सरकार से बाँधों और तटबंधों की 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित करने को भी कहा है।
बुधवार की रात को सबसे महत्वपूर्ण क्यों बताया जा रहा है?
देवघाट में पानी पहुँचने के करीब चार घंटे बाद गंडक बराज तक पानी पहुँचने की संभावना है। चूँकि ग्लेशियर का पानी दो से तीन घंटे में देवघाट पहुँचने की आशंका थी, इसलिए बराज तक पानी रात तक पहुँच सकता है — जिससे बुधवार की रात सबसे संवेदनशील मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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