मध्य प्रदेश में IMD का भारी बारिश और आंधी-तूफान अलर्ट, 35 से अधिक जिले प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के भोपाल स्थित मौसम केंद्र ने 26 अगस्त 2026 को मध्य प्रदेश के 35 से अधिक जिलों के लिए भारी बारिश, बिजली कड़कने और आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की है। पश्चिमी और उत्तरी जिलों में अलर्ट का स्तर सबसे अधिक है, जबकि मध्य और पूर्वी हिस्सों में स्थिति पर निगरानी रखी जा रही है।
किन जिलों में सबसे अधिक खतरा
IMD की एडवाइजरी के अनुसार, श्योपुर कलां, मुरैना, ग्वालियर, भिंड, दतिया/रतनगढ़, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, टीकमगढ़, निवाड़ी/ओरछा और मंदसौर/गांधी सागर अभयारण्य में मध्यम दर्जे की आंधी और बारिश की संभावना है। इन क्षेत्रों में 5-15 मिमी प्रति घंटे की दर से वर्षा हो सकती है और बादलों से जमीन पर बिजली गिरने की संभावना 30 से 60 प्रतिशत तक आंकी गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून का मौसम अपने चरम पर है और राज्य के कई हिस्सों में पहले से ही जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
हल्की चेतावनी वाले जिले
नीमच, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, विदिशा, दमोह, पन्ना, रीवा, सतना, चित्रकूट, छतरपुर, खजुराहो, भोपाल, सीहोर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, शाजापुर, उज्जैन, बालाघाट, सिवनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, मंडला, डिंडोरी, कटनी, उमरिया, अनूपपुर, सागर, सीधी, शहडोल और सिंगरौली में हल्की आंधी-तूफान, बिजली चमकने और हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। इन जिलों में बारिश की रफ्तार 5 मिमी प्रति घंटे से कम रहने और बिजली चमकने की संभावना 30 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान है।
आम जनता पर संभावित असर
मौसम विभाग ने भारी बारिश के कई संभावित दुष्प्रभावों की ओर ध्यान दिलाया है। निचले इलाकों में जलभराव और अस्थायी बाढ़ का खतरा है। कम दृश्यता और सड़कों पर पानी जमा होने के कारण सड़क और रेल यातायात में अस्थायी रुकावट आ सकती है। तेज हवाओं से कमजोर पेड़ उखड़ सकते हैं और फूस या अस्थायी ढाँचों को नुकसान पहुँच सकता है। स्थानीय स्तर पर बिजली आपूर्ति में भी व्यवधान की आशंका है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के कई जिले पहले ही मानसूनी बारिश से प्रभावित हैं, और यह नई चेतावनी राहत एजेंसियों के लिए अतिरिक्त सतर्कता का संकेत है।
किसानों और वाहन चालकों के लिए सलाह
IMD ने आम नागरिकों को नदियों, नहरों और निचले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है। तूफान के दौरान पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे खड़े न होने और बिजली व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सुरक्षित रखने की हिदायत दी गई है। किसानों से कहा गया है कि वे कटी हुई फसलों और मवेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। वाहन चालकों को गीली सड़कों पर सतर्कता से वाहन चलाने और प्रभावित इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।
आगे क्या
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी और उत्तरी जिलों में स्थिति अगले 24-48 घंटों तक बनी रह सकती है। प्रशासन को सतर्क रहने और राहत दलों को तैयार रखने की सिफारिश की गई है।