आंध्र प्रदेश में 1 जनवरी से 'संजीवनी' प्रोजेक्ट लागू होगा, सीएम चंद्रबाबू नायडू ने दिए निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 26 अगस्त को अपने कैंप ऑफिस में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि 1 जनवरी से 'संजीवनी' प्रोजेक्ट को पूरे आंध्र प्रदेश में लागू किया जाए। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड पर आधारित यह पहल राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में आमूल बदलाव लाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री नायडू ने कुप्पम निर्वाचन क्षेत्र और चित्तूर जिले में 'संजीवनी' के सफल परीक्षण के नतीजों की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि चित्तूर में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के 56 प्रतिशत मामलों को नियंत्रण में लाया गया और डायबिटीज के 16 प्रतिशत मामलों की गंभीरता में कमी आई। इसके साथ ही प्राइमरी हेल्थकेयर सेवाओं के उपयोग में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
'संजीवनी' सेवाओं पर कराए गए एक सर्वेक्षण में 91 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि इन सेवाओं के बाद उन्हें अपने स्वास्थ्य की बेहतर समझ मिली। इन नतीजों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इसे पूरे राज्य में विस्तारित करने का निर्णय लिया।
90 दिन का विस्तार योजना
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि राज्यव्यापी विस्तार के लिए 90 दिन का रोडमैप तैयार किया गया है। इस योजना में बेसलाइन अध्ययन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण, मेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन, तथा राष्ट्रीय व राज्य पोर्टलों के साथ एकीकरण शामिल है। 28 जिलों में मेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षित करने की भी योजना है।
प्रोजेक्ट के आधिकारिक भागीदार टाटा एमडी को मुख्यमंत्री ने हेल्थकेयर सेक्टर में नवाचार पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। इसके अलावा स्क्रीनिंग से लेकर उपचार और अनुवर्ती देखभाल तक की पूरी प्रक्रिया के लिए एक एआई-आधारित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली विकसित की जा रही है।
सरकार की प्राथमिकताएँ और दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएँ ऐसी होनी चाहिए जो पूर्वानुमान लगाने, रोकथाम करने, उपचार करने और किफायती होने की कसौटी पर खरी उतरें। उन्होंने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ-साथ होम्योपैथी, आयुर्वेद, योग और प्राणायाम को भी एकीकृत करने पर ज़ोर दिया।
उन्होंने 'एआई डॉक्टर्स' के व्यापक उपयोग, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने वाले डैशबोर्ड के निर्माण, तथा नागरिकों के मोबाइल फोन पर सीधे हेल्थ अपडेट भेजने की प्रणाली विकसित करने के निर्देश भी दिए। अस्पतालों में आउटसोर्स सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक स्पष्ट नीति बनाने को भी कहा गया।
आम जनता पर असर
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि राज्य के परिवारों पर शिक्षा और स्वास्थ्य पर भारी आर्थिक बोझ है और 'संजीवनी' जैसी पहल इसे कम करने में सहायक होगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और सामर्थ्य एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 'संजीवनी' को इतना प्रभावी बनाया जाए कि अन्य राज्य आंध्र प्रदेश को हेल्थकेयर सेवाओं के लिए एक मॉडल के रूप में देखें।
बैठक में कौन-कौन उपस्थित थे
समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव, स्वास्थ्य सचिव वीरपांडियन, संयुक्त सचिव रोनांकी गोपालकृष्ण और टाटा एमडी के प्रतिनिधि शामिल रहे। यह बैठक 'संजीवनी' के राज्यव्यापी क्रियान्वयन की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।