26 अगस्त 2026
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आंध्र प्रदेश में 1 जनवरी से 'संजीवनी' प्रोजेक्ट लागू होगा, सीएम चंद्रबाबू नायडू ने दिए निर्देश

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आंध्र प्रदेश में 1 जनवरी से 'संजीवनी' प्रोजेक्ट लागू होगा, सीएम चंद्रबाबू नायडू ने दिए निर्देश

सारांश

'संजीवनी' महज एक सरकारी योजना नहीं — यह आंध्र प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को डिजिटल और एआई की धुरी पर पुनर्गठित करने की कोशिश है। चित्तूर में हाइपरटेंशन के 56% मामले काबू में आए, और अब यही प्रयोग 28 जिलों तक फैलाया जाएगा।

मुख्य बातें

चंद्रबाबू नायडू ने 26 अगस्त को निर्देश दिया कि 'संजीवनी' प्रोजेक्ट 1 जनवरी से पूरे आंध्र प्रदेश में लागू किया जाए।
चित्तूर में हाइपरटेंशन के 56% मामले नियंत्रित हुए और डायबिटीज के 16% मामलों की गंभीरता कम हुई।
सर्वेक्षण में 91% उत्तरदाताओं ने 'संजीवनी' सेवाओं के बाद स्वास्थ्य की बेहतर समझ होने की बात कही।
राज्यव्यापी विस्तार के लिए 90 दिन का रोडमैप तैयार; 28 जिलों में मेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आधिकारिक भागीदार टाटा एमडी को हेल्थकेयर नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश; एआई-आधारित स्वास्थ्य प्रणाली विकसित की जा रही है।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 26 अगस्त को अपने कैंप ऑफिस में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि 1 जनवरी से 'संजीवनी' प्रोजेक्ट को पूरे आंध्र प्रदेश में लागू किया जाए। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड पर आधारित यह पहल राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में आमूल बदलाव लाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री नायडू ने कुप्पम निर्वाचन क्षेत्र और चित्तूर जिले में 'संजीवनी' के सफल परीक्षण के नतीजों की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि चित्तूर में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) के 56 प्रतिशत मामलों को नियंत्रण में लाया गया और डायबिटीज के 16 प्रतिशत मामलों की गंभीरता में कमी आई। इसके साथ ही प्राइमरी हेल्थकेयर सेवाओं के उपयोग में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

'संजीवनी' सेवाओं पर कराए गए एक सर्वेक्षण में 91 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि इन सेवाओं के बाद उन्हें अपने स्वास्थ्य की बेहतर समझ मिली। इन नतीजों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इसे पूरे राज्य में विस्तारित करने का निर्णय लिया।

90 दिन का विस्तार योजना

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि राज्यव्यापी विस्तार के लिए 90 दिन का रोडमैप तैयार किया गया है। इस योजना में बेसलाइन अध्ययन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण, मेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन, तथा राष्ट्रीय व राज्य पोर्टलों के साथ एकीकरण शामिल है। 28 जिलों में मेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षित करने की भी योजना है।

प्रोजेक्ट के आधिकारिक भागीदार टाटा एमडी को मुख्यमंत्री ने हेल्थकेयर सेक्टर में नवाचार पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। इसके अलावा स्क्रीनिंग से लेकर उपचार और अनुवर्ती देखभाल तक की पूरी प्रक्रिया के लिए एक एआई-आधारित स्वास्थ्य सेवा प्रणाली विकसित की जा रही है।

सरकार की प्राथमिकताएँ और दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएँ ऐसी होनी चाहिए जो पूर्वानुमान लगाने, रोकथाम करने, उपचार करने और किफायती होने की कसौटी पर खरी उतरें। उन्होंने आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ-साथ होम्योपैथी, आयुर्वेद, योग और प्राणायाम को भी एकीकृत करने पर ज़ोर दिया।

उन्होंने 'एआई डॉक्टर्स' के व्यापक उपयोग, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने वाले डैशबोर्ड के निर्माण, तथा नागरिकों के मोबाइल फोन पर सीधे हेल्थ अपडेट भेजने की प्रणाली विकसित करने के निर्देश भी दिए। अस्पतालों में आउटसोर्स सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक स्पष्ट नीति बनाने को भी कहा गया।

आम जनता पर असर

मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि राज्य के परिवारों पर शिक्षा और स्वास्थ्य पर भारी आर्थिक बोझ है और 'संजीवनी' जैसी पहल इसे कम करने में सहायक होगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और सामर्थ्य एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 'संजीवनी' को इतना प्रभावी बनाया जाए कि अन्य राज्य आंध्र प्रदेश को हेल्थकेयर सेवाओं के लिए एक मॉडल के रूप में देखें।

बैठक में कौन-कौन उपस्थित थे

समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव, स्वास्थ्य सचिव वीरपांडियन, संयुक्त सचिव रोनांकी गोपालकृष्ण और टाटा एमडी के प्रतिनिधि शामिल रहे। यह बैठक 'संजीवनी' के राज्यव्यापी क्रियान्वयन की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक या दो जिलों की सफलता को 28 जिलों तक स्केल करना तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर बड़ी चुनौती है। 90 दिन का रोडमैप महत्वाकांक्षी है, और यह तभी सार्थक होगा जब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों तक वास्तव में पहुँचे। एआई डॉक्टर और डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड की बात तब तक अधूरी है जब तक इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता सुनिश्चित न हो। असली कसौटी यह होगी कि 1 जनवरी के बाद के महीनों में राज्य के सबसे पिछड़े इलाकों में 'संजीवनी' कितनी गहराई तक उतरती है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'संजीवनी' प्रोजेक्ट क्या है और यह आंध्र प्रदेश में कब लागू होगा?
'संजीवनी' आंध्र प्रदेश सरकार की डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड-आधारित स्वास्थ्य सेवा पहल है, जिसे 1 जनवरी से पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को पूर्वानुमान-आधारित, किफायती और तकनीक-संचालित बनाना है।
चित्तूर और कुप्पम में 'संजीवनी' के क्या नतीजे रहे?
चित्तूर जिले में हाइपरटेंशन के 56 प्रतिशत मामले नियंत्रण में आए और डायबिटीज के 16 प्रतिशत मामलों की गंभीरता कम हुई। एक सर्वेक्षण में 91 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि 'संजीवनी' सेवाओं के बाद उन्हें अपने स्वास्थ्य की बेहतर समझ मिली।
राज्यव्यापी विस्तार के लिए क्या योजना बनाई गई है?
अधिकारियों ने 90 दिन का रोडमैप तैयार किया है जिसमें बेसलाइन अध्ययन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण, 28 जिलों में मेडिकल स्टाफ की ट्रेनिंग, सर्टिफिकेशन और राष्ट्रीय व राज्य पोर्टलों के साथ एकीकरण शामिल है।
'संजीवनी' में एआई और टेक्नोलॉजी की क्या भूमिका होगी?
स्क्रीनिंग से लेकर उपचार और अनुवर्ती देखभाल तक की पूरी प्रक्रिया के लिए एक एआई-आधारित स्वास्थ्य प्रणाली विकसित की जा रही है। मुख्यमंत्री ने 'एआई डॉक्टर्स' के व्यापक उपयोग, डेटा सुरक्षा डैशबोर्ड और नागरिकों के मोबाइल पर सीधे हेल्थ अपडेट भेजने की प्रणाली बनाने के निर्देश दिए।
इस प्रोजेक्ट में टाटा एमडी की क्या भूमिका है?
टाटा एमडी 'संजीवनी' प्रोजेक्ट का आधिकारिक भागीदार है। मुख्यमंत्री नायडू ने टाटा एमडी को हेल्थकेयर सेक्टर में नवाचार पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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