टीपू सुल्तान की तस्वीर पर मौलाना शहाबुद्दीन का समर्थन, मालेगांव नगरपालिका को बताया 'बहादुर'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने बुधवार, 26 अगस्त को बरेली में कई विवादास्पद मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने मालेगांव के डिप्टी मेयर के कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने का खुलकर समर्थन किया, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हिजाब संबंधी फैसले पर सवाल उठाए और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के विरोध को अनुचित बताया।
मालेगांव और टीपू सुल्तान की तस्वीर
मालेगांव के डिप्टी मेयर द्वारा अपने दफ्तर में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने के विवाद पर मौलाना रजवी ने स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने कहा, मालेगांव में 70 प्रतिशत मुस्लिम और 30 प्रतिशत गैर-मुस्लिम आबादी है, और यह शहर उर्दू भाषा को जीवित रखने वाला देश का एकमात्र शहर है।
उन्होंने कहा, 'अगर वहां अंग्रेजों के खिलाफ जंग लड़ने वाले टीपू सुल्तान की फोटो लग गई तो कोई जुल्म नहीं हुआ। मैं मालेगांव नगरपालिका को मुबारकबाद देता हूं, क्योंकि उन्होंने बहादुरी का काम किया।' उन्होंने यह भी कहा कि मालेगांव में सड़कों, गलियों, दुकानों और पुलिस चौकियों पर उर्दू में साइनबोर्ड लगे हैं, जो इस शहर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हिजाब फैसले पर सवाल
इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा हिजाब की अनुमति संबंधी याचिका खारिज किए जाने पर मौलाना रजवी ने कहा कि इस मामले को दो अलग नजरियों से देखना होगा — स्कूल का यूनिफॉर्म कोड और हिजाब।
उनके अनुसार, 'न्यायालय का कहना है कि हिजाब इस्लाम का हिस्सा नहीं है, लेकिन मेरा मानना है कि छात्रा के वकील कोर्ट को समझाने में नाकाम रहे। अगर कुरान और हदीस के हवाले से दलीलें दी जातीं, तो न्यायालय यह राय नहीं बनाता।' उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में पर्दे की परंपरा केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं रही — पूर्व में हिंदू महिलाएं भी घूंघट और पूरे शरीर को ढकने वाले वस्त्र पहनती थीं।
RSS प्रमुख के न्यूयॉर्क दौरे पर विरोध अनुचित
RSS प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क दौरे का न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी द्वारा विरोध किए जाने पर मौलाना रजवी ने कहा कि यह एक निजी कार्यक्रम है और इसका विरोध नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस विरोध को अनावश्यक बताते हुए संयम बरतने की नसीहत दी।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
मौलाना रजवी की टिप्पणियाँ ऐसे समय में आई हैं जब मालेगांव में टीपू सुल्तान की तस्वीर को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। आलोचकों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों में किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व की तस्वीर लगाना संवेदनशील मुद्दा है, जबकि समर्थकों का तर्क है कि टीपू सुल्तान ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध लड़ने वाले स्वतंत्रता सेनानी थे।
यह विवाद भारत में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों की विरासत और उनकी व्याख्या को लेकर जारी बहस की एक और कड़ी है। आगे देखना होगा कि मालेगांव नगरपालिका इस मामले में क्या निर्णय लेती है और राज्य सरकार की क्या प्रतिक्रिया आती है।