क्या मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का हरिद्वार विवाद पर बड़ा बयान है?

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क्या मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का हरिद्वार विवाद पर बड़ा बयान है?

सारांश

हरिद्वार में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंधों पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि इस तरह की हरकतें भारतीय संस्कृति के खिलाफ हैं और नफरत फैलाने का प्रयास हो रहा है। जानिए उनकी पूरी बात।

Key Takeaways

  • धार्मिक स्थलों पर किसी भी समुदाय की आस्था पर रोक लगाना गलत है।
  • भारत की गंगा-जमुनी तहजीब को बनाए रखना आवश्यक है।
  • नफरत का जवाब मोहब्बत से देना चाहिए।
  • हरिद्वार जैसे स्थानों पर सभी को पूजा-पाठ करने का समान अधिकार है।
  • सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

बरेली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के प्रमुख मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने हरिद्वार में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर लगाए गए कथित प्रतिबंधों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों पर किसी भी समुदाय की आस्था पर रोक लगाना भारत की गंगा-जमुनी तहजीब के खिलाफ है और इससे समाज में नफरत फैलती है।

उन्होंने सरकार से ऐसे बोर्ड लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत में मौलाना रजवी ने कहा कि हरिद्वार के हर की पौड़ी जैसे धार्मिक स्थलों पर लोग अपनी-अपनी आस्था के अनुसार पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यक्रम करते हैं। इसमें किसी को कोई दिक्कत या परेशानी नहीं होनी चाहिए। लेकिन अब कुछ जगहों पर 'गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है' जैसे बोर्ड लगाए जा रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है।

उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम की ओर से इस तरह के बोर्ड लगाया जाना सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा देता है और हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को कमजोर करता है।

उन्होंने कहा कि भारत में हिंदू और मुसलमान हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं। चाहे 1857 की आजादी की लड़ाई हो, 1947 का दौर हो या उसके बाद के हालात, हर मुश्किल घड़ी में दोनों समुदायों ने एक-दूसरे का साथ दिया है। ऐसे में इस तरह के बोर्ड लगाकर नफरत फैलाने की कोशिश की जा रही है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

मौलाना रजवी ने सरकार से अपील की कि वह खुद संज्ञान ले और ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे जो समाज में जहर घोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें नफरत का जवाब नफरत से नहीं, बल्कि मोहब्बत से देना चाहिए।

मौलाना रजवी ने अजमेर शरीफ स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह का उदाहरण दिया, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का बड़ा केंद्र है। वहां जितनी बड़ी संख्या में मुसलमान आते हैं, उतनी ही बड़ी संख्या में हिंदू, सिख और दूसरे धर्मों के लोग भी आते हैं और श्रद्धा प्रकट करते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी भी दरगाह या धार्मिक स्थल पर किसी समुदाय की एंट्री बैन करने के पक्ष में नहीं हैं। मौलाना ने उन लोगों से भी अपील की जो दरगाहों या धार्मिक स्थलों पर पाबंदी लगाने की मांग कर रहे हैं कि वे अपने बयान वापस लें।

उन्होंने कहा कि ख्वाजा साहब किसी एक धर्म के नहीं हैं, बल्कि सभी के हैं - हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों, यहूदियों और मुसलमानों के भी। आस्था और सम्मान सबका अधिकार है। किसी पर भी पाबंदी नहीं लगाई जानी चाहिए।

उन्होंने बताया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के पुनर्निर्माण, शांति और अमन के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। इसके लिए 60 देशों को आमंत्रित किया गया है और हर सदस्य देश से एक अरब डॉलर का योगदान मांगा गया है ताकि यह राशि गाजा के विकास और पुनर्निर्माण में इस्तेमाल की जा सके। उन्होंने कहा कि भारत को भी इस समिति में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। अब यह भारत सरकार पर निर्भर करता है कि वह इस समिति का सदस्य बनती है या नहीं।

मौलाना रजवी ने याद दिलाया कि भारत का रुख हमेशा से फिलिस्तीन के समर्थन में रहा है। उन्होंने कहा कि चाहे गाजा और इजरायल के बीच संघर्ष हो या उससे पहले का समय, भारत ने हमेशा फिलिस्तीन का साथ दिया है। यासिर अराफात के समय से ही भारत और फिलिस्तीन के रिश्ते अच्छे रहे हैं। कांग्रेस सरकार के दौर में भारत हर साल करीब छह करोड़ रुपए की मदद फिलिस्तीन को देता था, जिसे मौजूदा केंद्र सरकार के कार्यकाल में बढ़ाकर आठ करोड़ रुपए कर दिया गया है। भारत आगे भी फिलिस्तीन के लोगों की मदद करता रहेगा और शांति के प्रयासों में सकारात्मक भूमिका निभाएगा।

Point of View

NationPress
19/01/2026

Frequently Asked Questions

हरिद्वार में गैर-हिंदुओं का प्रवेश क्यों वर्जित है?
कुछ स्थानों पर 'गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है' जैसे बोर्ड लगाए गए हैं, जो सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा देते हैं।
मौलाना रजवी ने इस पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि यह भारत की गंगा-जमुनी तहजीब के खिलाफ है और नफरत फैलाने का प्रयास है।
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