राजस्थान में गर्मियों से पहले जल प्रबंधन के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश
सारांश
Key Takeaways
- गर्मी के मौसम में पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए योजनाएँ बनाई गई हैं।
- जल आपूर्ति में लापरवाही की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- राज्य की हेल्पलाइन पर शिकायतों का 24 घंटे में समाधान होगा।
- विशिष्ट क्षेत्रों के लिए विशेष जल प्रबंधन योजनाएँ तैयार की गई हैं।
- पौधारोपण के लिए पहले से स्थान चिन्हित किए जाएंगे।
जयपुर, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार को अधिकारियों और जिला प्रशासन को यह निर्देश दिया कि गर्मी के मौसम में हर गांव और शहर में पीने के पानी की व्यवस्था को सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को पानी की कोई कमी न हो।
मुख्यमंत्री कार्यालय में गर्मियों की तैयारियों पर हुई समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि राज्य की समर कंटीजेंसी प्लान (गर्मी से निपटने की योजना) को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नए हैंडपंप और ट्यूबवेल लगाने, पुराने पंपों की मरम्मत करने, और पाइपलाइन व अन्य जल संबंधी व्यवस्थाओं को भीषण गर्मी शुरू होने से पहले ठीक करने का कार्य पूरा कर लिया जाए।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि पानी की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही को सहन नहीं किया जाएगा।
उन्होंने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) और बिजली विभाग के अधिकारियों को मिलकर काम करने की सलाह दी। साथ ही कहा कि राज्य की हेल्पलाइन 181 पर आने वाली पानी से जुड़ी सभी शिकायतों का समाधान 24 घंटे के भीतर किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों में अभी 48, 72 या 96 घंटे में एक बार पानी की सप्लाई होती है, वहां इस अंतराल को कम किया जाए।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि राज्य के 41 जिलों के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए एक विस्तृत आपात योजना तैयार की गई है। जिला कलेक्टरों ने अपने-अपने क्षेत्रों के अनुसार कार्ययोजना प्रस्तुत की है। इसमें बीकानेर के नहर क्षेत्रों, जोधपुर जैसे रेगिस्तानी इलाकों, डूंगरपुर के ट्यूबवेल आधारित क्षेत्रों और उदयपुर के आदिवासी व पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग रणनीतियाँ बनाई गई हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि राज्य में 19 मार्च से ‘विकसित ग्राम–शहरी वार्ड’ अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान के तहत ग्राम पंचायत और शहरी वार्ड स्तर पर विकास की मास्टर प्लान तैयार किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि इस योजना में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली और सड़क जैसी सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में छोटे और सूक्ष्म उद्योगों के अवसरों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में बताया कि पिछले दो वर्षों में राज्य में करीब 19 करोड़ पौधे लगाए गए हैं, जबकि इस वर्ष 10 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पौधारोपण के लिए पहले से जगह चिन्हित की जाए और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फलदार पेड़ लगाने को बढ़ावा दिया जाए, जिससे खेती को भी लाभ मिले और पानी का संरक्षण भी हो सके।
बैठक में पीएचईडी मंत्री कन्हैयालाल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कई मंडल आयुक्त और जिला कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।