क्या लव जिहाद को मजहब की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए? : शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

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क्या लव जिहाद को मजहब की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए? : शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

सारांश

क्या लव जिहाद को मजहब के चश्मे से नहीं देखना चाहिए? मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है। जानिए उनके इस विचार के पीछे का सच और इसके संभावित परिणाम।

Key Takeaways

  • लव जिहाद को मजहब के चश्मे से नहीं देखना चाहिए।
  • प्रेम एक स्वाभाविक और ऐतिहासिक प्रक्रिया है।
  • इस्लाम में धर्म परिवर्तन के लिए लालच और भय की मनाही है।
  • किसी भी समुदाय में अपमानजनक आरोप लगाना उचित नहीं है।
  • युवाओं को समझाने और प्रेरित करने की आवश्यकता है।

बरेली, 16 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा का मामला सामने आने के बाद से राज्य में लव जिहाद का मुद्दा फिर से गरमा गया है। इस संदर्भ में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने प्रदेश की राजनीतिक स्थिति को और भी संवेदनशील बना दिया है। उन्होंने कहा कि लव जिहाद को मजहब की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए।

मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि लव जिहाद के नाम पर एक गलत माहौल उत्पन्न किया जा रहा है, जिसमें मुस्लिम युवकों पर हिंदू लड़कियों को प्रेम में फंसाने का आरोप लगाया जाता है। उनके अनुसार, यह एक दुष्प्रचार है और मुस्लिम समुदाय में ऐसी कोई संगठित संस्था नहीं है जो इस तरह की योजना बनाती हो।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान उन्होंने प्रेम को एक स्वाभाविक और ऐतिहासिक प्रक्रिया बताया, जो बाबा आदम के जमाने से चली आ रही है। यह तो ब्रिटिश काल से लेकर आज तक चलती आ रही है और भविष्य में भी जारी रहेगी। इसे मजहब की दृष्टि से देखना ठीक नहीं है। यह पूरी तरह से गलत है।

बरेलवी ने अरबी के एक कथन को आधार बनाते हुए कहा कि इंसान स्वाभाविक रूप से गलतियां करता है, विशेषकर युवावस्था में, और इन गलतियों को सुधारने के लिए युवाओं को समझाने और प्रेरित करने की आवश्यकता है, न कि उन्हें किसी धर्म या मजहब के लेबल से जोड़ने की।

दूसरी ओर, उन्होंने कहा कि इस्लाम अपने अनुयायियों को इस बात की इजाजत नहीं देता कि भय, जुल्म, लालच के जरिए धर्म परिवर्तन कराया जाए। इन सभी बातों की इस्लाम मनाही करता है। अगर आप पैगंबर मुहम्मद साहब की पूरी जीवनी पढ़ेंगे तो कहीं भी आपको यह नहीं मिलेगा कि उन्होंने लालच और भय के जरिए जबरन धर्म परिवर्तन कराया हो। अगर कोई अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म अपनाता है, तो इसकी इजाजत इस्लाम देता है। साथ ही, हमारा कानून भी इस बात की इजाजत देता है। इस्लाम में स्पष्ट है कि लालच देकर किसी का धर्म नहीं बदलवाया जा सकता। अगर कोई ऐसा कर रहा है, तो वह मुजरिम है।

Point of View

मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी का यह बयान एक महत्वपूर्ण पहलू को उजागर करता है। देश में किसी भी मुद्दे को मजहब के चश्मे से देखने की बजाय, हमें सामाजिक समरसता और समझ को बढ़ावा देना चाहिए। यह विचारशीलता ही हमारे समाज को एकजुट रखेगी।
NationPress
31/08/2025

Frequently Asked Questions

लव जिहाद क्या है?
लव जिहाद एक विवादास्पद अवधारणा है जिसमें आरोप लगाया जाता है कि मुस्लिम युवक जानबूझकर हिंदू लड़कियों को प्रेम में फंसाकर उनका धर्म परिवर्तन कराते हैं।
क्या लव जिहाद के खिलाफ कोई कानून है?
भारत में लव जिहाद के खिलाफ कोई विशेष कानून नहीं है, लेकिन धार्मिक स्वतंत्रता और विवाह के संबंध में कानून हैं।
मौलाना रजवी का लव जिहाद पर क्या कहना है?
मौलाना रजवी ने कहा है कि लव जिहाद को मजहब की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए और यह एक गलत धारणा है।