ईडी का ताशी ग्रुप पर बड़ा एक्शन: दिल्ली-एनसीआर में 7 जगह छापे, ₹386 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने 20 अगस्त 2025 को दिल्ली-एनसीआर में सात स्थानों पर तलाशी और सर्वे ऑपरेशन चलाया। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत चल रही जांच के सिलसिले में की गई, जिसमें 600 से अधिक घर खरीदारों से कथित तौर पर ₹386 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है।
किन कंपनियों और व्यक्तियों पर है जांच
ईडी की यह जांच ताशी लैंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, केएनएस इन्फ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड, सोनी इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड और मौजूदा रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल काशी नाथ शुक्ला तथा उनसे जुड़ी अन्य कंपनियों व व्यक्तियों पर केंद्रित है। ईडी ने गुरुवार को जारी एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इसकी पुष्टि की।
यह जांच दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज कई एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू की गई थी।
मुख्य आरोप: किन प्रोजेक्ट्स में हुई धोखाधड़ी
जांच में दो प्रमुख रियल एस्टेट परियोजनाएं सामने आई हैं — गुरुग्राम के सेक्टर-111 में स्थित 'ताशी कैपिटल गेटवे प्रोजेक्ट' और सेक्टर-68 में 'ओरियन गैलेक्सी प्रोजेक्ट' (जिसे पहले 'स्पायर साउथ' के नाम से जाना जाता था)। आरोपों के अनुसार, इन परियोजनाओं में घर खरीदारों और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की गई।
जांच के अनुसार, ताशी ग्रुप ने 600 से अधिक घर खरीदारों से लगभग ₹386 करोड़ एकत्र किए, लेकिन 10 से 15 वर्ष बीत जाने के बाद भी संपत्ति का कब्जा नहीं दिया गया। इसके अतिरिक्त, निवेशकों के फंड से लगभग ₹120 करोड़ का गबन किए जाने का आरोप है, जिसमें स्वामिह इन्वेस्टमेंट फंड का ₹98 करोड़ का निवेश भी शामिल बताया जा रहा है।
फंड डायवर्जन और मनी ट्रेल की जांच
ईडी के अनुसार, घर खरीदारों से जमा की गई और वित्तीय/निवेश माध्यमों से प्राप्त बड़ी रकम को आपस में जुड़ी ग्रुप कंपनियों और प्रमोटर के नियंत्रण वाली संस्थाओं के बीच स्थानांतरित किया गया। जांच एजेंसी अब मनी ट्रेल, कंपनियों के बीच लेन-देन, प्रोजेक्टवार फंड उपयोग और एक परियोजना से दूसरी परियोजना में फंड के संभावित डायवर्जन की जांच कर रही है।
गौरतलब है कि यह मामला उस व्यापक रियल एस्टेट धोखाधड़ी की श्रृंखला का हिस्सा है जिसमें देशभर के लाखों घर खरीदार वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मुख्य प्रमोटर के परिवार पर विदेशी संपत्ति के आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि मुख्य प्रमोटर काशी नाथ शुक्ला के परिवार के सदस्य कथित तौर पर विदेश में बस गए हैं और पिछले 5 से 10 वर्षों में भारत में अपनी बड़ी संपत्तियाँ बेच दी हैं या उनका निपटान कर दिया है। जांच के अनुसार, परिवार के सदस्यों के नाम पर विदेशी कंपनियों और संस्थाओं में निवेश किया गया है, जिसमें यूके में एक ओल्ड एज केयर होम संचालित करना भी शामिल है।
इसके अतिरिक्त, परिवार के एक सदस्य ने कथित तौर पर निवेश के माध्यम से सेंट किट्स की नागरिकता के लिए आवेदन किया था — यह तथ्य जांच की गंभीरता को और बढ़ाता है।
तलाशी में क्या मिला, आगे क्या होगा
तलाशी अभियान के दौरान जांच के दायरे में आने वाली कंपनियों और परियोजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, विदेशी निवेश से संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा जब्त किए गए। इसके साथ ही ₹22 लाख के बकाया बैलेंस वाले बैंक खाते/फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (एफडीआर) और एक लग्जरी कार को फ्रीज व जब्त किया गया।
ईडी ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और 'अपराध से हुई कमाई' तथा उससे खरीदी गई संपत्तियों की कुल मात्रा का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशक संरक्षण को लेकर नीति-निर्माताओं पर दबाव बढ़ रहा है।