ईडी का इंपीरिया ग्रुप पर बड़ा एक्शन: दिल्ली में 8 ठिकानों पर छापे, ₹50.50 लाख नकद व 3 लग्जरी गाड़ियाँ जब्त
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने 30 जुलाई 2025 को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत रियल एस्टेट कंपनियों इंपीरिया विशफील्ड प्राइवेट लिमिटेड (आईडब्ल्यूपीएल) और इंपीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड (आईएसएल) के प्रमोटर डायरेक्टरों तथा नई दिल्ली स्थित रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के आठ रिहायशी और कमर्शियल ठिकानों पर एक साथ तलाशी और सर्वे अभियान चलाया। इस कार्रवाई में ₹50.50 लाख नकद और तीन लग्जरी गाड़ियाँ जब्त की गई हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा आईडब्ल्यूपीएल और आईएसएल के डायरेक्टरों-प्रमोटरों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 के तहत दर्ज कई एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की। इन एफआईआर में आरोप लगाए गए हैं कि कंपनियों ने निवेशकों को बहला-फुसलाकर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं किए, मासिक तय रिटर्न और लीज रेंटल का भुगतान नहीं किया और दिल्ली-एनसीआर के निवेशकों की रकम को गलत तरीके से अन्यत्र लगाया।
इस मामले में ईडी ने प्रमोटर डायरेक्टरों — हरप्रीत सिंह बत्रा, ब्रजिंदर सिंह बत्रा, प्रदीप शर्मा, अविनाश सेठिया और अन्य — के खिलाफ ईसीआईआर दर्ज की है।
जांच में सामने आए मुख्य तथ्य
जांच के अनुसार, आईडब्ल्यूपीएल ने गुरुग्राम के सेक्टर 37 में अपने 'एल्वेडोर' प्रोजेक्ट के खरीदारों से जमा कराई गई रकम को अपनी अन्य देनदारियाँ चुकाने में इस्तेमाल किया। इसके अलावा, खरीदारों के निवेश को संबंधित कंपनियों या व्यक्तियों को ऋण और अग्रिम (लोन और एडवांस) के रूप में हस्तांतरित कर दिया गया।
आईडब्ल्यूपीएल ने 2011 से खरीदारों से बुकिंग लेना शुरू किया था, लेकिन 15 वर्ष बाद भी कंपनी इकाइयों (यूनिट) का कब्जा देने में नाकाम रही। वहीं, आईएसएल ने गुरुग्राम के 'इंपीरिया माइंडस्पेस' और ग्रेटर नोएडा के 'इंपीरिया बिजनेस पार्क' के खरीदारों से एडवांस बुकिंग लेकर कब्जा, मासिक तय रिटर्न और लीज रिटर्न देने के वादे किए, जो पूरे नहीं हुए।
गौरतलब है कि जांच में ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें एक ही यूनिट के लिए कई खरीदारों से बुकिंग ली गई। साथ ही जानबूझकर बायर-बिल्डर एग्रीमेंट (बीबीए) नहीं किए गए और केवल ऐसे एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) साइन किए गए जिनमें यूनिट की पहचान और कब्जे की समय-सीमा का कोई उल्लेख नहीं था।
जब्ती और बरामदगी
ईडी के अनुसार, तलाशी के दौरान कई डिजिटल डिवाइस और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए — जिनमें प्रमोटरों-डायरेक्टरों से जुड़े संपत्ति के कागजात, ऑडिट किए गए वित्तीय रिकॉर्ड, टैली डेटा, फंड डायवर्जन की जानकारी और खरीदारों द्वारा निवेश की गई समस्त राशि का विवरण शामिल है। इसके अतिरिक्त, ₹50.50 लाख नकद और तीन महंगी लग्जरी गाड़ियाँ भी जब्त की गई हैं।
अब तक की जांच में पता चला है कि आईडब्ल्यूपीएल को एल्वेडोर प्रोजेक्ट के खरीदारों से कथित तौर पर लगभग ₹63 करोड़ प्राप्त हुए। माइंडस्पेस (गुरुग्राम) और इंपीरिया बिजनेस पार्क (ग्रेटर नोएडा) जैसे अन्य प्रोजेक्टों में अपराध से अर्जित आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का आकलन किया जा रहा है।
आगे की जांच
फिलहाल 'एल्वेडोर' प्रोजेक्ट रिजॉल्यूशन की प्रक्रिया से गुजर रहा है। ईडी को जांच के दायरे में आए प्रोजेक्टों के घर खरीदारों से भी कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशक-धोखाधड़ी के मामलों में ईडी की कार्रवाइयाँ लगातार तेज हो रही हैं। मामले से जुड़ी आगे की जांच जारी है।