ईडी ने अंसल प्रॉपर्टीज के खिलाफ 598 करोड़ की संपत्तियां अटैच की, गुरुग्राम में धोखाधड़ी का खुलासा
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने 598 करोड़ की संपत्तियों को अटैच किया है।
- यह कार्रवाई गुरुग्राम में भूमि अधिग्रहण में धोखाधड़ी के आरोपों पर आधारित है।
- अंसल प्रॉपर्टीज के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत की गई कार्रवाई।
- जांच में अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
- निर्दोष खरीदारों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए गए हैं।
नई दिल्ली, 25 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ईडी) ने मेसर्स अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एपीआईएल) के विरुद्ध प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। ईडी ने आगरा, उत्तर प्रदेश में कई अचल संपत्तियों को 598 करोड़ रुपए से अधिक के मूल्य के रूप में अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है।
यह कार्रवाई सीबीआई की एसीबी, नई दिल्ली द्वारा की गई एफआईआर के आधार पर की गई, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों (सिविल अपील नंबर 8977/2014) के अनुपालन में 23 जनवरी 2019 को दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में आईपीसी की धारा 120-बी, 420 और पीसी एक्ट की धारा 13(2) रीड विद 13(1)(डी) के तहत एपीआईएल, सरकारी कर्मचारियों और निजी बिल्डरों/कॉलोनाइजरों पर आरोप लगाए गए हैं।
यह मामला हरियाणा के गुरुग्राम में सेक्टर 58 से 63 और 65 से 67 तक की भूमि अधिग्रहण और विमोचन में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। प्रारंभ में, भूमि को लैंड एक्विजिशन एक्ट, 1894 की धारा 4 और 6 के तहत एचयूडीए द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन (डेवलपमेंट और लैंड बैंक) के लिए अधिसूचित किया गया था। लेकिन बाद में मिलीभगत और धोखाधड़ी के कारण अधिकांश भूमि निजी कॉलोनाइजरों को सौंप दी गई, जिससे कानूनी सुरक्षा उपाय कमजोर हुए और सरकारी पारदर्शिता पर सवाल उठे।
ईडी की जांच में यह सामने आया कि एपीआईएल ने कोलेबोरेशन एग्रीमेंट किए और अधिसूचित भूमि के मालिकों से जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) प्राप्त किए। इसमें सेक्शन 4 नोटिफिकेशन से पहले कोई मुआवजा न देना, अनुबंध शर्तों की कमी और पोस्ट-फैक्टो बदलाव जैसी खामियां थीं। इस स्थिति ने अनिश्चितता पैदा की, जिससे मालिकों की मोलभाव क्षमता कम हो गई और भूमि बाजार मूल्य से बहुत कम दर पर स्थानांतरित हुई। इससे एपीआईएल को अवैध लाभ हुआ और भूमि मालिकों को नुकसान।
हरियाणा के डीटीसीपी ने बादशाहपुर गांव में 142.306 एकड़ भूमि पर एपीआईएल को लाइसेंस (18/2010, 21/2011, 26/2012) दिए, जिसमें 42.751 एकड़ अधिसूचित भूमि को अधिग्रहण से मुक्त किया गया था। इस भूमि पर 'एसेंसिया' और 'वर्सालिया' प्रोजेक्ट्स विकसित हुए, जो अब पूरी तरह से विकसित होकर तृतीय-पक्ष खरीदारों को बेचे जा चुके हैं।
इसलिए, निर्दोष खरीदारों और प्रोजेक्ट कब्जे में समस्याओं से बचाने के उद्देश्य से ईडी ने एपीआईएल से संबंधित एसोसिएट कंपनियों/व्यक्तियों के नाम पर आगरा में अन्य अचल संपत्तियां अटैच कीं। जांच में यह पाया गया कि ये संस्थाएं भूमि-धारण करने वाले वाहनों के रूप में इस्तेमाल की गईं, जबकि फंडिंग, नियंत्रण और लाभकारी स्वामित्व एपीआईएल के पास था।