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जेपी इंफ्राटेक मनी लॉन्ड्रिंग: ईडी ने दो कंपनियों की ₹100 करोड़ की संपत्ति जब्त की

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जेपी इंफ्राटेक मनी लॉन्ड्रिंग: ईडी ने दो कंपनियों की ₹100 करोड़ की संपत्ति जब्त की

सारांश

जेपी इंफ्राटेक मामले में ईडी की कार्रवाई और तेज हुई — दो कंपनियों की ₹100 करोड़ की संपत्ति जब्त। ₹32,825 करोड़ की कथित धोखाधड़ी में हजारों होम बायर्स प्रभावित, एमडी मनोज गौड़ पहले से न्यायिक हिरासत में।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जेपी इंफ्राटेक मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ₹100 करोड़ की अचल संपत्तियाँ जब्त कीं।
जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी की ₹40 करोड़ और इन्वेस्टर्स क्लिनिक इंफ्राटेक की ₹60 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क।
कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत ईडी के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा की गई।
होम बायर्स से एकत्र ₹32,825 करोड़ (एनसीएलटी स्वीकृत दावों के अनुसार) में से बड़ी राशि गैर-निर्माण कार्यों में लगाने का आरोप।
एमडी मनोज गौड़ को 13 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था, वे अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
इससे पहले 7 जनवरी 2026 को भी अंतरिम कुर्की आदेश जारी हो चुका है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जेपी इंफ्राटेक से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो कंपनियों की कुल ₹100 करोड़ की अचल संपत्तियाँ अस्थायी रूप से जब्त की हैं। ईडी के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की है। एक आधिकारिक बयान में 9 जून को यह जानकारी दी गई।

किन कंपनियों की संपत्ति जब्त हुई

ईडी ने जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी की ₹40 करोड़ और इन्वेस्टर्स क्लिनिक इंफ्राटेक की ₹60 करोड़ की अचल संपत्तियाँ कुर्क की हैं। जांच में सामने आया कि जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी को अपराध से अर्जित धनराशि हस्तांतरित की गई थी, जबकि इन्वेस्टर्स क्लिनिक इंफ्राटेक में जमीन के रूप में अपराध की आय को छिपाकर रखा गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज कई एफआईआर के आधार पर ईडी ने जेपी ग्रुप के खिलाफ जांच शुरू की थी। ये एफआईआर जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स परियोजनाओं के हजारों होम बायर्स की शिकायतों पर आधारित हैं, जिनमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के आरोप लगाए गए हैं।

आरोप है कि आवासीय परियोजनाओं के निर्माण के लिए एकत्र की गई धनराशि का उपयोग निर्माण के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया, जिससे घर खरीदारों की परियोजनाएँ अधूरी रह गईं। यह ऐसे समय में और भी गंभीर है जब रियल एस्टेट क्षेत्र में होम बायर्स के साथ धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

₹32,825 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड (जेआईएल) और संबंधित इकाइयों द्वारा होम बायर्स से एकत्र किए गए ₹32,825 करोड़ — जो राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा स्वीकृत दावों के अनुसार हैं — में से बड़ी मात्रा में धनराशि गैर-निर्माण उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की गई और संबंधित संस्थाओं को हस्तांतरित कर दी गई।

मनोज गौड़ की गिरफ्तारी और पूर्व कार्रवाई

जेपी इंफ्राटेक और जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ को जांच में धन के गबन की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में केंद्रीय भूमिका निभाते हुए पाया गया। उन्हें 13 नवंबर 2025 को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था और वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। इसके बाद 7 जनवरी 2026 को एक अंतरिम कुर्की आदेश जारी किया गया था, जिसके तहत अपराध से प्राप्त प्रत्यक्ष आय को कुर्क किया गया था।

आगे क्या होगा

ईडी की यह कार्रवाई जेपी ग्रुप के खिलाफ चल रही व्यापक जांच का हिस्सा है। गौरतलब है कि यह मामला देश के सबसे बड़े रियल एस्टेट धोखाधड़ी मामलों में से एक माना जाता है, जिसमें हजारों होम बायर्स वर्षों से अपने घरों का इंतजार कर रहे हैं। जांच एजेंसी के अनुसार आगे भी संपत्तियों की जब्ती और कानूनी कार्रवाई जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

825 करोड़ का आँकड़ा महज एक संख्या नहीं — यह हजारों परिवारों की जमा-पूंजी है जो अधूरे फ्लैटों में फँसी है। ईडी की कार्रवाई देर से सही, लेकिन असली सवाल यह है कि जब्त संपत्तियों से होम बायर्स को राहत मिलेगी या यह सब कानूनी पचड़ों में उलझा रहेगा। रेरा और एनसीएलटी के बावजूद पीड़ित खरीदारों को न्याय मिलने की गति चिंताजनक रूप से धीमी है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईडी ने जेपी इंफ्राटेक मामले में किन कंपनियों की संपत्ति जब्त की?
ईडी ने जेसी वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी की ₹40 करोड़ और इन्वेस्टर्स क्लिनिक इंफ्राटेक की ₹60 करोड़ की अचल संपत्तियाँ पीएमएलए, 2002 के तहत अस्थायी रूप से जब्त की हैं। यह कार्रवाई ईडी के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय ने की है।
जेपी इंफ्राटेक मनी लॉन्ड्रिंग मामला क्या है?
जेपी इंफ्राटेक और जयप्रकाश एसोसिएट्स पर आरोप है कि उन्होंने जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स परियोजनाओं के हजारों होम बायर्स से आवासीय निर्माण के लिए एकत्र की गई धनराशि का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए किया। एनसीएलटी द्वारा स्वीकृत दावों के अनुसार यह राशि ₹32,825 करोड़ बताई गई है।
मनोज गौड़ को कब गिरफ्तार किया गया था?
जेपी इंफ्राटेक और जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ को 13 नवंबर 2025 को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया था। वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।
इस मामले में होम बायर्स पर क्या असर पड़ा?
जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स परियोजनाओं के हजारों होम बायर्स अपने घरों का वर्षों से इंतजार कर रहे हैं क्योंकि उनकी परियोजनाएँ अधूरी रह गईं। आरोप के अनुसार निर्माण के लिए जमा की गई उनकी धनराशि का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए किया गया।
इस मामले में ईडी की पिछली कार्रवाई क्या थी?
7 जनवरी 2026 को ईडी ने एक अंतरिम कुर्की आदेश जारी किया था, जिसके तहत अपराध से प्राप्त प्रत्यक्ष आय को कुर्क किया गया था। 9 जून को की गई ताज़ा जब्ती उसी चल रही जांच का अगला चरण है।
राष्ट्र प्रेस
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