ईडी की बड़ी कार्रवाई: अरविंद जोशी मामले में ₹22.46 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के भोपाल स्थित जोनल ऑफिस ने मंगलवार, 30 जून 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत अरविंद जोशी और अन्य आरोपियों के मामले में ₹22.46 करोड़ की संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त करने का आदेश जारी किया। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार और बेनामी संपत्ति मामले में ईडी की जारी जांच का हिस्सा है।
जब्त संपत्तियों का विवरण
जब्त की गई संपत्तियों में भोपाल के सेमरी बज्याफत गाँव में स्थित एक क्रिकेट अकादमी और उससे जुड़ी संरचनाएँ — जिनमें एक होटल और रिसॉर्ट शामिल हैं — तथा संबंधित भूमि शामिल है। जांच एजेंसी के अनुसार इन संपत्तियों का निर्माण अपराध से अर्जित धन से किया गया था।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने यह जांच स्पेशल पुलिस एस्टेब्लिशमेंट, लोकायुक्त, भोपाल द्वारा स्वर्गीय अरविंद जोशी और टीनू जोशी — दोनों मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी — के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर शुरू की थी। दोनों पर अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से अधिक, कथित तौर पर लगभग ₹41.87 करोड़ की चल व अचल संपत्ति रखने का आरोप था। जांच में सामने आए साक्ष्यों के अनुसार दोनों अधिकारियों ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्टाचार में संलिप्तता बरती।
बेनामी नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग का तरीका
ईडी जांच में खुलासा हुआ कि स्वर्गीय अरविंद जोशी ने अपराध से प्राप्त धन का उपयोग न केवल अपने नाम पर, बल्कि परिवार के सदस्यों और करीबी सहयोगियों के नाम पर भी संपत्तियाँ अर्जित करने में किया। संपत्तियों के असली स्वामित्व को छिपाने और उन्हें वैध दिखाने के लिए बेनामी संस्थाओं, फर्जी समझौतों और बहु-स्तरीय लेन-देन का सहारा लिया गया।
जांच में यह भी स्थापित हुआ कि 'फेथ क्रिकेट क्लब' का संचालन वास्तव में स्वर्गीय अरविंद जोशी ही करते थे। क्रिकेट अकादमी और उससे जुड़े बुनियादी ढाँचे के निर्माण में किया गया निवेश उनके सहयोगी राघवेंद्र सिंह तोमर के माध्यम से उनकी अवैध संपत्ति से आया था।
पूर्व में हुई कार्रवाई और आगे की जांच
गौरतलब है कि ईडी इस मामले में इससे पहले भी लगभग ₹13.60 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुकी है और भोपाल की विशेष अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं। ताज़ा जब्ती के साथ इस मामले में कुल जब्त संपत्ति का आँकड़ा अब ₹36 करोड़ से अधिक पहुँच गया है। पीएमएलए के तहत अपराध से प्राप्त शेष धन की पहचान और जब्ती के लिए आगे की जांच जारी है।