क्या ईडी ने मनोज परमार और उनके सहयोगियों के खिलाफ 2.08 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की?

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क्या ईडी ने मनोज परमार और उनके सहयोगियों के खिलाफ 2.08 करोड़ रुपए की संपत्ति जब्त की?

सारांश

मनोज परमार और उनके सहयोगियों के खिलाफ ईडी की कार्रवाई ने 2.08 करोड़ रुपए की संपत्तियों की जब्ती का मामला उजागर किया है। यह मामला एक बड़े वित्तीय धोखाधड़ी के अंतर्गत आता है, जहां सरकारी लोन का दुरुपयोग किया गया। जानिए पूरी कहानी।

Key Takeaways

  • मनोज परमार पर धोखाधड़ी का आरोप।
  • ईडी ने 2.08 करोड़ रुपए की संपत्तियां जब्त की।
  • सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग किया गया।
  • जांच अभी भी जारी है।
  • और गिरफ्तारियों की संभावना।

भोपाल, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत मनोज परमार और अन्य सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए मध्य प्रदेश के आष्टा, सीहोर में लगभग 2.08 करोड़ रुपए की 12 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है।

जांच में पता चला कि मनोज परमार ने तत्कालीन पंजाब नेशनल बैंक, आष्टा ब्रांच के मैनेजर मार्क पायस करारी के सहयोग से प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना (सीएमवाईयूवाई) के तहत धोखाधड़ी से लोन प्राप्त किए थे।

आगे की जांच में यह भी सामने आया कि इन्होंने नकली आवेदन पत्र, जाली दस्तावेज और फर्जी कोटेशन का सहारा लेकर कुल 18 लोन मंजूर किए थे, जिनकी कुल राशि 6.20 करोड़ रुपए थी, जिनमें से 6.01 करोड़ रुपए जारी किए गए थे।

जांच में खुलासा हुआ कि लोन की मंजूरी के लिए निर्धारित शर्तों का उल्लंघन किया गया और ब्रांच मैनेजर की वित्तीय शक्ति से अधिक लोन स्वीकृत किए गए। बैंक अधिकारियों द्वारा किए गए फील्ड इंस्पेक्शन में यह साबित हुआ कि इन लोन से संबंधित कोई भी व्यवसायिक इकाई नहीं बनाई गई थी, और कई लाभार्थियों ने लोन लेने से मना कर दिया था।

इस धोखाधड़ी के पैसे को मनोज परमार और उसके करीबी सहयोगियों द्वारा नियंत्रित फर्मों के खातों में ट्रांसफर किया गया और फिर इन पैसों को विभिन्न तरीकों से सर्कुलेट किया गया, जैसे कि नकद में निकालना और जाली व्यापार गतिविधियां दिखाना।

ईडी के अनुसार, सरकारी सब्सिडी वाले लोन का इस प्रकार से डायवर्ट किया जाना और इस सारे पैसे का मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए सफेद किया जाना दर्शाता है कि इस धोखाधड़ी से अपराध की कमाई हुई थी।

मनोज परमार और उसके सहयोगियों ने मिलकर सार्वजनिक धन का अनुचित उपयोग किया और उसे व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल किया। यह कार्रवाई सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर की गई है।

प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं। जांच अभी भी जारी है और प्रवर्तन निदेशालय ने मामले में और गिरफ्तारियों की संभावना जताई है।

Point of View

यह आवश्यक है कि जांच को पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाया जाए ताकि दोषियों को सजा मिल सके।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

मनोज परमार के खिलाफ ईडी की कार्रवाई का कारण क्या है?
मनोज परमार पर सरकारी योजनाओं के तहत धोखाधड़ी से लोन प्राप्त करने का आरोप है।
ईडी ने कितनी संपत्तियों को जब्त किया है?
ईडी ने लगभग 2.08 करोड़ रुपए की 12 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी?
जांच जारी है और प्रवर्तन निदेशालय ने और गिरफ्तारियों की संभावना जताई है।
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