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'वंदे मातरम्' विवाद: भाजपा ने खड़गे-सोनिया पर लगाया अपमान का आरोप, कांग्रेस ने किया खंडन

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'वंदे मातरम्' विवाद: भाजपा ने खड़गे-सोनिया पर लगाया अपमान का आरोप, कांग्रेस ने किया खंडन

सारांश

80वें स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में 'वंदे मातरम्' के दौरान खड़गे और सोनिया गांधी की बातचीत का वीडियो वायरल होते ही भाजपा ने माफी की मांग कर दी। कांग्रेस ने सफाई दी कि सोनिया के लिए बस कुर्सी मँगाई जा रही थी — लेकिन राजनीतिक आग भड़क चुकी है।

मुख्य बातें

80वें स्वतंत्रता दिवस पर इंदिरा भवन में 'वंदे मातरम्' गायन के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी की बातचीत का वीडियो वायरल हुआ।
भाजपा ने इसे राष्ट्रीय गीत का अपमान बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक माफी और स्पष्टीकरण की मांग की।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को संविधान सभा की पहली कार्यवाही भी 'वंदे मातरम्' से शुरू हुई थी।
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि गीत रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई; सोनिया गांधी केवल अपने लिए कुर्सी मँगा रही थीं।
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी कांग्रेस पर गीत रुकवाने की कोशिश का आरोप लगाया।

80वें स्वतंत्रता दिवस पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के गायन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के आपस में बातचीत करते दिखने पर राजनीतिक विवाद छिड़ गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे राष्ट्रीय गीत का अपमान करार देते हुए कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक माफी की मांग की है, जबकि कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया है।

विवाद की जड़: वायरल वीडियो

समारोह के दौरान सामने आए एक वीडियो में मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी को राष्ट्रीय गीत के गायन के बीच आपस में बातचीत करते और इशारे करते देखा जा सकता है। वीडियो में दोनों नेता पार्टी के एक सदस्य को बुलाकर कुछ निर्देश देते भी नजर आते हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैला और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का केंद्र बन गया।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह पहला स्वतंत्रता दिवस है जब राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को पूरा, बिना किसी कट और रुकावट के गाया गया। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को स्वतंत्र भारत की पहली संविधान सभा की कार्यवाही भी 'वंदे मातरम्' के गायन से ही शुरू हुई थी, क्योंकि उस समय तक राष्ट्रीय गान को संविधान द्वारा अपनाया नहीं गया था।

त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे राष्ट्रीय गीत के दौरान गंभीरता से खड़े नहीं थे। उन्होंने कहा, 'यह दर्शाता है कि कांग्रेस पार्टी ने अभी तक वंदे मातरम् के पूर्ण संस्करण को स्वीकार नहीं किया है। हम कांग्रेस नेतृत्व के व्यवहार की कड़ी निंदा करते हैं और उनसे माफी तथा स्पष्टीकरण की मांग करते हैं।' उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि माफी न मांगने पर संविधान, राष्ट्र और देशभक्ति के प्रति कांग्रेस की 'वास्तविक सोच' उजागर होगी।

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी कांग्रेस की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि 'वंदे मातरम्' सुनते समय सोनिया गांधी और राहुल गांधी नाराज दिख रहे थे और दोनों ने गीत को रुकवाने की कोशिश की।

कांग्रेस का खंडन

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय गीत को रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी। उन्होंने बताया कि मल्लिकार्जुन खड़गे काफी देर से खड़े थे और सोनिया गांधी केवल यह कह रही थीं कि उनके लिए एक कुर्सी वहाँ रख दी जाए। रमेश ने इस विवाद को राजनीति से प्रेरित बताया।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि 'वंदे मातरम्' को लेकर विवाद नया नहीं है — यह गीत ऐतिहासिक रूप से राजनीतिक बहसों का विषय रहा है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश 80वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा था और राजनीतिक दल राष्ट्रवाद के प्रतीकों पर अपनी-अपनी स्थिति को मजबूत करने में लगे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के विवाद अक्सर चुनावी माहौल में अधिक तीव्र हो जाते हैं।

आगे क्या

भाजपा ने कांग्रेस से औपचारिक माफी की मांग दोहराई है। कांग्रेस की ओर से अब तक कोई अतिरिक्त आधिकारिक बयान नहीं आया है। यह देखना होगा कि यह विवाद आने वाले दिनों में संसदीय बहस या सोशल मीडिया पर किस रूप में आगे बढ़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कांग्रेस इसे वृद्ध नेत्री के लिए कुर्सी की व्यवस्था। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि 'वंदे मातरम्' को लेकर राजनीतिक विवाद दशकों पुराना है और इसे चुनावी मौसम में बार-बार उठाया जाता है। असली सवाल यह है कि क्या यह जवाबदेही की माँग है या राष्ट्रवादी प्रतीकों का चुनावी उपयोग — और मतदाता इस अंतर को पहचानते हैं या नहीं।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'वंदे मातरम्' विवाद क्या है और यह कब हुआ?
15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के गायन के दौरान मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी को आपस में बातचीत करते दिखाने वाला वीडियो वायरल हुआ। भाजपा ने इसे राष्ट्रीय गीत का अपमान बताते हुए माफी की मांग की।
भाजपा ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी राष्ट्रीय गीत के दौरान गंभीरता से खड़े नहीं थे और आपस में बातचीत कर रहे थे। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने यह भी आरोप लगाया कि दोनों नेताओं ने गीत को रुकवाने की कोशिश की।
कांग्रेस ने इन आरोपों का क्या जवाब दिया?
कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय गीत को रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई थी। उन्होंने बताया कि मल्लिकार्जुन खड़गे काफी देर से खड़े थे और सोनिया गांधी केवल यह कह रही थीं कि उनके लिए एक कुर्सी वहाँ रख दी जाए।
भाजपा ने 'वंदे मातरम्' का ऐतिहासिक महत्व क्यों बताया?
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को स्वतंत्र भारत की पहली संविधान सभा की कार्यवाही 'वंदे मातरम्' के गायन से शुरू हुई थी, क्योंकि उस समय तक राष्ट्रीय गान संविधान द्वारा अपनाया नहीं गया था। इसी संदर्भ में उन्होंने इस गीत को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया।
इस विवाद का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
भाजपा ने कांग्रेस से औपचारिक माफी न मिलने पर इसे राष्ट्रवाद और देशभक्ति के प्रति कांग्रेस के रवैये का प्रमाण बताने की चेतावनी दी है। कांग्रेस ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है और आगे कोई अतिरिक्त बयान नहीं दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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